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काम और घर की जिम्मेदारी संभालती स्त्रीआज की स्त्री केवल घर की चारदीवारी तक सीमित...
अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या ने वीर की असलियत अपनी आँखों से देख ली। जिस व्यक्ति ने...
: शून्य का संगीत (The Symphony of Silence)1. नई संधि का उदयवर्ष 2156 की शुरुआत ए...
ट्रेन धीरे-धीरे अपने गंतव्य की ओर बढ़ती रही और कुछ ही घंटों बाद वह उस छोटे से स्...
कहानी: सच्ची मेहनत और संकल्प की विजयअध्याय 1: धूल भरा गाँव और ऊंचे सपनेरामपुर ना...
: : प्रकरण - 52 : : मैंने माधुरी एक्सपोर्ट्स को छोड़ द...
मोनिका :- ये दैखो उसने मुझसे शादी का वादा किया था , फिर मेरे साथ वो सब किया और म...
अर्जुन की बाहों में खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थी… लेकिन फोन पर लिखे दो शब्द म...
शहद की गुड़िया - प्रकरण - 4 "अब तो बस इंतजार है उस प...
रह-रहकर उसका शरीर सिहर उठता। तभी झट से दरवाजा खोल कर उसका दोस्त रमेश भीतर दाखिल...
एक एंकर अपनी न्यूज़ रूम में चिल्ला चिल्लाकर लोगों को एक जानकारी दे रही थी।"लोगों को भी सचेत रहना चाहिए, अगर सच्चाई सामने नहीं आती तो किसी बेगुनाह को जिंदगी भर सलाखों के पीछे सड...
सन्नाटे की गूँज माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
मुंबई की चमकती ऊँची इमारतों में से एक — “नव्या ग्लोबल कॉर्प” का हेडक्वार्टर। शीशे की दीवारों से ढका वो टॉवर शहर की ताकत और महत्वाकांक्षा का प्रतीक था। और उसकी सबसे ऊपरी मंज़िल पर...
रात के ठीक 2:13 बजे थे। शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का पिछला हिस्सा — जहाँ शायद ही कोई जाता हो — अँधेरे में डूबा हुआ था। वहीं था… मॉर्ग। दीवारों पर जमी सीलन, टिमटिमाती हुई...
'जैकब्स हॉस्टल' के बाहर सन्नाटे को चीरती हुई बर्फीली हवाएं चल रही थीं। छुट्टियों का सीजन था, इसलिए जो हॉस्टल कभी 500 लड़कों के शोर से गूँजता था, आज वहाँ मुर्दा शांति पसरी थी...
मुंबई की उस रात में उमस नहीं, एक दम घोटने वाली खामोशी थी. उपनगर की एक तंग गली के आखिरी छोर पर स्थित उस जर्जर इमारत का कमरा नंबर सत्रह, किसी जिंदा कब्र जैसा लग रहा था. घडी की सुइयां...
" इच्छा... तुम... नहीं नहीं तुम मेरी इच्छा नहीं हो सकती... " जोरो से हॅसते हुए आवाज गूंजती है.... " सही पहचाना में तेरी इच्छा नहीं हूँ मै.. वो हूँ जो तू सोच भी नही...
कुछ यादें अचानक गायब नहीं होतीं। वे बस धीरे-धीरे पीछे खिसक जाती हैं, इस तरह कि हमें लगता है हमने ही उन्हें छोड़ दिया है। और जब वे लौटती हैं, तो शोर नहीं करतीं—बस चुपचाप अपनी जगह...
मुंबई की रातें— जो कभी हज़ारों सपनों की धड़कन हुआ करती थीं, वे अब अविन अविनाशी चौहान के लिए किसी रोमांच से नहीं, बल्कि एक खामोश मजबूरी से भरी थीं। यह नवंबर की उमस भरी रात थी; मरीन...
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