रात का सन्नाटा

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अंधेरे में चमकती हुई उन दो आँखों को देखकर चारों के शरीर में सिहरन दौड़ गई। "क... कौन है वहाँ?" रोहित ने काँपती आवाज़ में पूछा। कोई जवाब नहीं आया। बस वही आँखें अंधेरे में स्थिर खड़ी रहीं। अमन ने हिम्मत करके मोबाइल की टॉर्च उनकी तरफ़ घुमाई। रोशनी पड़ते ही सबके होश उड़ गए। वहाँ कोई इंसान नहीं था। एक दुबला-पतला काला कुत्ता खड़ा था। चारों ने राहत की साँस ली। "साला, मैं तो डर ही गया था," विकास हँस पड़ा। लेकिन तभी सोनू का चेहरा पीला पड़ गया। "यार... उसके पैर देखो।" सबकी नज़र कुत्ते के पैरों पर गई। और अगले ही पल उनकी साँसें अटक गईं।

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रात का सन्नाटा - 1

अंधेरे में चमकती हुई उन दो आँखों को देखकर चारों के शरीर में सिहरन दौड़ गई।"क... कौन है वहाँ?" ने काँपती आवाज़ में पूछा।कोई जवाब नहीं आया।बस वही आँखें अंधेरे में स्थिर खड़ी रहीं।अमन ने हिम्मत करके मोबाइल की टॉर्च उनकी तरफ़ घुमाई।रोशनी पड़ते ही सबके होश उड़ गए।वहाँ कोई इंसान नहीं था।एक दुबला-पतला काला कुत्ता खड़ा था।चारों ने राहत की साँस ली।"साला, मैं तो डर ही गया था," विकास हँस पड़ा।लेकिन तभी सोनू का चेहरा पीला पड़ गया।"यार... उसके पैर देखो।"सबकी नज़र कुत्ते के पैरों पर गई।और अगले ही पल उनकी साँसें अटक गईं।कुत्ता उनकी तरफ़ मुँह करके ...Read More

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रात का सन्नाटा - 2

रात के लगभग ग्यारह बजे थे। गाँव के बाहर बने बड़े से मैरिज गार्डन में शादी का शोर अब कम होने लगा था। रोशनी से जगमगाता मैदान, तेज़ संगीत और लोगों की भीड़ अब खत्म होने की ओर बढ़ रही थी।चार दोस्त—अमन, रोहित, विकास और सोनू—भी खाना खाकर घर लौटने की तैयारी कर रहे थे।"यार, आज तो खाने का मज़ा ही आ गया!" रोहित ने पेट पर हाथ फेरते हुए कहा।"खासकर वो गुलाब जामुन..." सोनू हँसते हुए बोला।अमन की नज़र अभी भी मिठाई वाले स्टॉल पर थी। वहाँ बड़े से बर्तन में गुलाब जामुन बचे हुए थे।उसने इधर-उधर देखा। ...Read More