एक कर्तव्य ऐसा भी स्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्ध व तपस्वी आचार्य थे । उनके प्रसिद्ध राधा स्वामी आश्रम तीर्थयात्रियों व भक्तों के ठहरने व खाने की निशुल्क व्यवस्था थी। परिचित भक्तों व अनुयायियों के अतिरिक्त कोई भी अपरिचित तीर्थयात्री भी वहाँ ठहर सकता था व भोजन ग्रहण कर सकता था। भगवान की ऐसी कृपा थी कि उनका यह लंगर वर्षों से चल रहा था। भक्तों को भी स्वादिष्ट व निशुल्क भोजन (प्रसादी) पाने के बाद दान देने की प्रेरणा स्वतः होती थी। इसलिये स्वामी जी की ख्याति दूर दूर तक फैली हुयी थी। परन्तु स्वामी जी किसी से कुछ नहीं मागते थे, स्व प्रेरणा से लोग दान देते थे।
राहें - 1
एक कर्तव्य ऐसा भीस्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्ध वतपस्वी आचार्य थे । उनके प्रसिद्ध राधा आश्रम तीर्थयात्रियोंव भक्तों के ठहरने व खाने की निशुल्क व्यवस्था थी। परिचित भक्तोंव अनुयायियों के अतिरिक्त कोई भी अपरिचित तीर्थयात्री भी वहाँठहर सकता था व भोजन ग्रहण कर सकता था। भगवान की ऐसीकृपा थी कि उनका यह लंगर वर्षों से चल रहा था। भक्तों को भीस्वादिष्ट व निशुल्क भोजन (प्रसादी) पाने के बाद दान देने की प्रेरणास्वतः होती थी। इसलिये स्वामी जी की ख्याति दूर दूर तक फैलीहुयी थी। परन्तु स्वामी जी किसी से कुछ नहीं मागते थे, स्व प्रेरणासे ...Read More
राहें - 2
धोखारामचंद्र के पुत्र सुभाष की शादी बड़ी धूमधाम से हुयी। नगर मेंचर्चा का विषय रहा। सुभाष भिलाई स्टील प्लांट असिस्टेंट मैनेजरहै। लड़की भिलाई के प्रतिप्ठित व्यापारी की पुत्री है। दोनो परिवारोंमें बेहद खुशी का माहौल था। रामचन्द्र के तीन बेटों में सुभाष ही पढ़लिख कर इन्जीनियर बना और परीक्षा पास करते ही भिलाई स्टीलप्लांट नौकरी लग गई, माता पिता के खुशी का ठिकाना नहीं था।फिर शादी भी अच्छे घर की पढ़ी लिखी लड़की से हो गई परिवार मेंखुशियों की बहार थी। बहू दहेज में भी बहुत सामान लाई थी।शादी के कुछ दिनों बाद ही सुभाष पत्नी स्नेहा के साथ ...Read More