आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) छात्रों की स्वाभाविक इंटेलिजेंस ख़त्म कर रही है |तकनीक को इंसान की मदद के लिए बनाया गया है, उसकी सोच की जगह लेने के लिए नहीं। शिक्षा का उद्देश्य केवल सही उत्तर प्राप्त करना नहीं, बल्कि सोचने, तर्क करने, प्रश्न पूछने और अपनी बात स्वयं व्यक्त करने की क्षमता विकसित करना भी है। डिजिटल शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रयोग आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में एक गंभीर बहस का विषय बन गया

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) छात्रों की स्वाभाविक इंटेलिजेंस ख़त्म कर रही है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) छात्रों की स्वाभाविक इंटेलिजेंस ख़त्म कर रही है |तकनीक को इंसान की मदद के लिए बनाया है, उसकी सोच की जगह लेने के लिए नहीं। शिक्षा का उद्देश्य केवल सही उत्तर प्राप्त करना नहीं, बल्कि सोचने, तर्क करने, प्रश्न पूछने और अपनी बात स्वयं व्यक्त करने की क्षमता विकसित करना भी है। डिजिटल शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रयोग आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में एक गंभीर बहस का विषय बन गया ...Read More

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हम विद्यार्थी भूल रहे संस्कृति और संस्कारों को

हम विद्यार्थी भूल रहे संस्कृति और संस्कारों को हम विद्यार्थी भूल रहे,जीवन के संस्कारों को। माँ की ममता भूल का मान भुलाते हैं,बड़ों के चरणों में झुकना,अब हम कहाँ निभाते हैं?आशीषों की छाँव छोड़कर,ढूँढ़ रहे हम सहारों को,हम विद्यार्थी भूल रहे,संस्कृति के उन प्यारों को। दादी की मीठी लोरी अब,कानों में कम आती है,नानी की प्यारी कहानियाँ,यादों में रह जाती हैं।मोबाइल की झिलमिल दुनिया,खींच रही मन-तारों को,हम विद्यार्थी भूल रहे,जीवन के संस्कारों को। गुरु को पहले देव मानकर,शीश झुकाया जाता था,गुरु की हर एक सीख को,जीवन-मंत्र बनाया था।अब तो चकाचौंध लुभाती,भाती झूठी बातों को,हम विद्यार्थी भूल रहे,गुरु के उन ...Read More

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हारो नहीं, खुद को चुनौतियों के लिए तैयार करो

हारो नहीं, खुद को चुनौतियों के लिए तैयार करो (अनुज्ञा मिश्रा) जीवन संघर्षों से जूझने का नाम है। यह ऐसी यात्रा है जिसमें रुकना विकल्प नहीं, चलते रहना ही जीवन का स्वभाव है। कभी रास्ते सीधे और सरल होते हैं, तो कभी अचानक ऐसे मोड़ आ जाते हैं जिनकी हमने कल्पना भी नहीं की होती। कहीं रास्ता फूलों से भरा मिलता है, तो कहीं ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों पर नंगे पाँव चलना पड़ता है। जीवन की सबसे बड़ी सीख यही है कि हमें केवल अच्छे समय के लिए नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों के लिए भी स्वयं को तैयार करना होगा। अक्सर ...Read More

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हारो नहीं, खुद को चुनौतियों के लिए तैयार करो

हारो नहीं, खुद को चुनौतियों के लिए तैयार करोजीवन संघर्षों से जूझने का नाम है। यह एक ऐसी यात्रा जिसमें रुकना विकल्प नहीं, चलते रहना ही जीवन का स्वभाव है। कभी रास्ते सीधे और सरल होते हैं, तो कभी अचानक ऐसे मोड़ आ जाते हैं जिनकी हमने कल्पना भी नहीं की होती। कहीं रास्ता फूलों से भरा मिलता है, तो कहीं ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों पर नंगे पाँव चलना पड़ता है। जीवन की सबसे बड़ी सीख यही है कि हमें केवल अच्छे समय के लिए नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों के लिए भी स्वयं को तैयार करना होगा। अक्सर हम जीवन से ...Read More

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बोया पेड़ बबूल का

बोया पेड़ बबूल का कही ऐसा तो नहीं तुम ही सिखा रहे हो लोभ लालच, ईर्ष्या ,अहंकार अपने बच्चों , उसकी गलतियों की अनदेखी कर रहे हो , ये सब वह बड़ा होकर तुम्हे ही लौटने वाला है, तुम्हे बुजुर्गों का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होता , कल को तुम्हारे बच्चे तुम्हे भी बर्दाश्त नहीं करेंगे | बृद्धावस्था में पछताने से अच्छा है अभी अच्छे संस्कार दे डालो ऐसे ही कहानी है रामसरन की, ऊँची शिक्षा, मंहगे सामान उपहार , कभी न झुकने की सीख, बड़े बाप का होने का अहंकार कूट कूट कर भर दिया ,अब तो बड़ा होकर ...Read More

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कविता-अनुभूति से आनंद तक

कविता-अनुभूति से आनंद तक(अनुज्ञा मिश्र )कविता केवल पढ़ने या सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन में उतारने की एक साधना है। जब अनुभूति संवेदना बनती है, संवेदना चिंतन का रूप लेती है, चिंतन सृजन में परिवर्तित होता है और सृजन लोकमंगल का माध्यम बनता है, तभी मनुष्य सच्चे अर्थों में आनंद की अनुभूति करता है। भारतीय काव्य परंपरा केवल शब्दों का सौंदर्य नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति, जीवन का दर्शन, संवेदनाओं की साधना और समाज के कल्याण का सशक्त माध्यम है। कविता मनुष्य के अंतर्मन में छिपी भावनाओं, कल्पनाओं, विचारों और अनुभूतियों को सुंदर शब्दों में अभिव्यक्त करती है। ...Read More

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जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना, अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए

जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना, अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए... गोपाल दास नीरज की ये पंक्तियाँ कविता की सुंदर अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि हमारे जीवन और समाज के लिए एक गहरा संदेश हैं। दीपावली आती है तो पूरा देश रोशनी से नहा उठता है। घर-आँगन सजते हैं, बाजार जगमगाते हैं, पटाखों और फुलझड़ियों की आवाज आसमान तक गूँजती है। नए कपड़े, मिठाइयाँ, उपहार और करोड़ों-अरबों का कारोबार त्योहार की रौनक बढ़ाते हैं। हर ओर उल्लास है, उत्सव है, चमक है। लेकिन इस चमक-दमक के बीच एक सवाल मन को बेचैन करता है—क्या सचमुच अँधेरा मिट रहा ...Read More