प्रियंका गुप्ता Books | Novel | Stories download free pdf

नाम में क्या रखा है...

by प्रियंका गुप्ता
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  • 19.6k

शाम के साढ़े छः बजे थे। वो बस अभी ही कमरे में घुसी थी। पूरा दिन कितना तो थकान ...

चाँद

by प्रियंका गुप्ता
  • (5/5)
  • 6.6k

रात जाने कितनी जा चुकी थी पर नींद थी कि जैसे उसकी आँखों का रास्ता ही भूल गई थी। ...

कूड़ा

by प्रियंका गुप्ता
  • (4.8/5)
  • 11.8k

अयांश की मेज़ साफ़ करते हुए उसकी डायरी उठाई तो बीच में फँसा पेन खिसक कर नीचे गिर गया। ...

कुछ किस्से अफ़साने नहीं होते

by प्रियंका गुप्ता
  • (4.7/5)
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ज़िन्दगी में अचानक ही चलते-चलते किसी अप्रत्याशित से मोड़ पर हम उनसे मिल जाते हैं, जिनसे मिलने की सपने ...

कुछ आवाज़ें मरती नहीं

by प्रियंका गुप्ता
  • (4.7/5)
  • 7.8k

मैं मरने वाली थी...आज नहीं तो कल, पर मेरा मरना तय था...। मरूँगी कैसे, ये भी पता था मुझे...। ...

काले कवर की डायरी और एक नाम

by प्रियंका गुप्ता
  • (4.7/5)
  • 10.9k

हम उसी शाम मिले थे...। बहुत सारी उदास शामों की तरह वो भी तो एक अटपटी सी शाम थी...और ...

कलर-ब्लाइण्ड

by प्रियंका गुप्ता
  • (4.4/5)
  • 6.9k

वह कलर-ब्लाइण्ड था। आम भाषा में कहा जाए तो वह रंगों को ठीक से पहचान नहीं पाता था...खास तौर ...

अब वो खुश हैं...

by प्रियंका गुप्ता
  • (4.6/5)
  • 11.7k

रसोई में बर्तनों की खटर-पटर से नीला की आँख खुल गई। बगल में रखी अलार्म-घड़ी देखी तो हड़बड़ा कर ...