Tukda-Tukda Jindagi - 1 by प्रियंका गुप्ता in Hindi Social Stories PDF

टुकड़ा-टुकड़ा ज़िन्दगी - 1

by प्रियंका गुप्ता in Hindi Social Stories

ढोलक की थापों के साथ बन्ना घोड़ी गाने वाली का सुर भी तार-सप्तक नापने लगता था। बीच-बीच में कहीं सुर धीमा पड़ता तो नसीबन खाला की हाँक...अरे, सुबह कुछ खाया-पीया नहीं क्या लड़कियों...? बिल्कुल ही मरी आवाज़ निकल रही ...Read More