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"बीमारी बढ़ती गई, इलाज कहीं ना मिला"---एपिसोड 4: अस्पताल की वो रातेंआइना के बिस्...
My Contract Wife बारिश की हल्की-हल्की बूंदें ज़मीन को छू रही थीं। आसमान जैसे आज...
एपिसोड 29: राव का चक्र पूरी तरह टूटासूर्योदय की पहली किरणें पटना के बंगले के विश...
Chapter 2 — Village Without BirdsAfter the van engine shut off, no one spoke for...
উত্তরের উত্তরে বরফে ঢাকা এক রাজ্য—যেখানে সূর্য ওঠে, কিন্তু উষ্ণতা নামে না—সেই রা...
महिमा की मुस्कान अब गायब हो चुकी थी। उसने एक गंभीर वकील की तरह फाइल मेज पर रखी औ...
(હજારો વર્ષો પહેલાંની પૃથ્વી અને સમુદ્રકની બાબા આર્દે કહેલી પ્રેમકહાની!)બાબા આર્...
अधूरी मोहब्बत — अध्याय 9: आखिरी विदा अस्पताल की गलियों में भागते हुए अर्जुन और र...
धीरे-धीरे, खुशी और रुद्रांश की यादें पूरी तरह लौटने लगीं।हर हल्का सा एहसास, हर म...
मोनिका अब एकदम चुप थी , मोनिका को मन ही मन अब भी आदित्य पर ही गुस्सा आ रहा था ,...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
'જય શ્રી કૃષ્ણ' વાંચક મિત્રો! આજ એક ન્યુ ધારાવાહિક નિલક્રિષ્નામાં પ્રવેશ કરવા જઇ રહી છું. વાંચક મિત્રો તમારો સાથ, સહકાર હંમેશા મળતો રહ્યો છે, અને આગળ પણ મળતો રહે! એવી અપેક...
कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ प्यार और दोस्ती की परिभाषा बदल जाती है। बचपन की मासूम दोस्ती धीरे-धीरे दिल की गहराई में उतर जाती है, लेकिन समय, दूरी और परिस्थितियाँ...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
આ રચના સંપૂર્ણપણે કાલ્પનિક છે જેનો જીવિત કે મૃત તથા કોઈપણ ઘટના, ધર્મ, પ્રદેશ સાથે સંબંધ નથી. જો કોઈ સામ્યતા જણાય તો એ સંયોગ માત્ર છે. **************** ડિસેમ્બરની હાડ થીજવી દેત...
આજના સમયમાં જે પ્રમાણે ટેકનોલોજીનો વિકાસ થઇ રહ્યો છે, તેટલી જ ઝડપથી માહિતીનું પણ આદાન પ્રદાન થઇ રહ્યું છે. એક સમયે એવો હતો કે, માહિતી સંતાડવી અને તેણે જાહેર થતી રોકવી ખુબ જ સહેલું...
ही कथा पूर्णपणे काल्पनिक असायला हवी होती खरंतर. कारण उगाच दोन जीवांची ताटातूट. त्यातून आलेली उदासीनता... आणि शेवटी अधुरं राहिलेलं एक स्वप्नं जे दोघांनी पाहिलेलं... अनेक उतार आणि चढ...
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