Book Detail

पूर्वग्रह।

written by:  mahebub sonaliya
70 downloads
Readers review:  
4.9

कभी हमारी सोच उस सिक्के की तरह होती है। जिसके पीछे की छवि हम तब तक नही देख पाते जब तलक हम उसे पलटकर नहीं देखते। ये कहानी है विजयगिरी जी की जो एक मातृ भक्त है। वतन में ही जीना मरना चाहते है। और उनका बेटा अनिकेत उन्हें अपने साथ अहमदाबाद ले जाना चाहता है।

RuksMir  06 Dec 2017  

khoob j saras

Yasin  06 Dec 2017  

achha likha haY

Aamir  06 Dec 2017  

wah

Arsh  06 Dec 2017  

srs

READ MORE BOOKS BY mahebub sonaliya