Patri Pe Intzaar by Paras Vanodia in Hindi Love Stories PDF

पटरी पे इंतज़ार

by Paras Vanodia in Hindi Love Stories

12 बज गए थे में कबसे उसका इंतज़ार कर रहा था पर इसे ही समय चलता रहा और घडी के काटे तेज चलने लगे देखते ही देखते ट्रेन आ गयी....... मेरी बेचैनी बढ़ती गई और....