Jhuki hui phoolo bhari daal - 2 by Neelam Kulshreshtha in Hindi Social Stories PDF

झुकी हुई फूलों भरी डाल - 2

by Neelam Kulshreshtha Verified icon in Hindi Social Stories

बहुत उमस भरी जून की रात है गाँव के इस खुले मैदान भी रह रहकर गर्दन चिपचिपा रही है। पसीना पोंछते हुए उसका अंगौछा गीला हो चुका है। नौटंकी शुरू होने में बहुत देर है। एक आदमी हॉर्मोनियम पर ...Read More