Vidrohini - 5 by Brijmohan sharma in Hindi Social Stories PDF

विद्रोहिणी - 5

by Brijmohan sharma in Hindi Social Stories

नाटक शुरू हुए एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका था । श्यामा के लिए निकल भागने का समय आगया था। आधी रात का समय था। चारों ओर श्याह अंधेरा था। कौशल्या व श्यामा की आंखों में नींद नहीं थी। ...Read More