Mukhbir - 7 by राज बोहरे in Hindi Social Stories PDF

मुख़बिर - 7

by राज बोहरे in Hindi Social Stories

मैं मन ही मन किरपाराम की बातों में खो गया तो रघुवंशी बोला -‘‘ अब आगे का किस्सा सुनाओ यार !‘‘ मैंने वहीं से डोर पकड़ ली, जहां से छोड़ी थी । बस के दरवाजे पर चादर बिछाके डाकुओं ने दस मिनिट ...Read More