Mukhbir - 10 by राज बोहरे in Hindi Social Stories PDF

मुख़बिर - 10

by राज बोहरे in Hindi Social Stories

सौ, पचास, दस और पांच-पांच के नांटों की अलग-अलग गड्डी बनाके मैंने और लल्ला ने रूपये गिनना शुरू कर दिया । जब तक सब्जी बनी, तब तक नोट गिने जा चुके थे । मैं बोला-‘‘ मुखिया, जे नोट तो ...Read More