Mukhbir - 29 by राज बोहरे in Hindi Social Stories PDF

मुख़बिर - 29

by राज बोहरे in Hindi Social Stories

मुख़बिर राजनारायण बोहरे (29) शिनाख़्त छोटा दरोगा बोला -‘‘ चलो तुम्हारा किस्सा निपट गया !‘‘ मैंने मन ही मन सोचा कि किस्सा कहां निपटा था, असली किस्सा तो फिर शुरू हुआ था । जब बिस्तर पर पहुंचा, तो मेरी ...Read More