Gubbara by Vivek Mishra in Hindi Social Stories PDF

गुब्बारा

by Vivek Mishra Matrubharti Verified in Hindi Social Stories

अगस्त का आख़िरी हफ़्ता था। बारिश बहुत कम हुई थी। बादल आसमान पर ठहरे थे। बरसने के लिए उन्हें किसी ख़ास चीज़ की तलाश थी, जो शायद ज़मीन पर नहीं थी। हम उन्हें बरसने पर मजबूर नहीं कर सके ...Read More