VANCHIT by rajendra shrivastava in Hindi Travel stories PDF

वंचित

by rajendra shrivastava in Hindi Travel stories

कहानी-- वंचित राजेन्‍द्र कुमार श्रवास्‍तव, ‘’यही ऑफिस है.......शायद कॉलोनाइजर का!’’ ‘’हेल्‍लो, दानेश्‍वरजी।‘’ ‘’हॉं.....। आपको मेरा नाम?’’ ‘’बड़े साहब ने बताया,......आप ही का वेट कर रहे हैं; अन्‍दर।‘’ लगता है, यह यहॉं ...Read More