स्पर्श - अनोखे रूप हे ( भाग 3 )

by Siddharth in Marathi Love Stories

अजब दस्तुर है दुनिया का जो जमाणे से परे है बेटी का हर गुनाह माफ है बहु की गलती भी गुनाह है नित्या रात्रीचा स्वयंपाक आवरून एकटीच बसली होती ..खर तर तिला खूप भूक लागली होती पण मृन्मयच्या ...Read More