Changing Relationships (Last Part) by किशनलाल शर्मा in Hindi Social Stories PDF

बदलते रिश्ते (अंतिम भाग)

by किशनलाल शर्मा Matrubharti Verified in Hindi Social Stories

""हां,"सालू दीर्घ निःस्वास छोड़ते हुए बोली,,"उसी प्यार का वास्ता देकर तुमसे कुछ मांगने आयी हूँ।""तुम्हारे लिए जान भी हाज़िर है।मांगो क्या मांगना है?""मेरे पति को मेरा तुमसे मिलना पसंद नही है,"सालू बोली,"तुम मुझे अपनी तो नही बना सके।लेकिन मेरे ...Read More