Aankh ki Kirkiri - 25 by Rabindranath Tagore in Hindi Fiction Stories PDF

आँख की किरकिरी - 25

by Rabindranath Tagore Matrubharti Verified in Hindi Fiction Stories

(25) उसी गंभीर भाव से सिलाई करती हुई विनोदिनी बोली - भाई साहब, तुम यहाँ नहीं रहोगे। अपने उठते हुए आग्रह पर चोट पा कर महेंद्र व्याकुल हो उठा। गदगद स्वर में बोला - क्यों, तुम मुझे दूर क्यों ...Read More