Aankh ki Kirkiri - 29 by Rabindranath Tagore in Hindi Fiction Stories PDF

आँख की किरकिरी - 29

by Rabindranath Tagore Matrubharti Verified in Hindi Fiction Stories

(29) पूजनीय मौसी, तुम्हारे सिवाय आज मेरा कोई नहीं। एक बार आओ और अपनी इस दुखिया को अपनी गोद में उठा लो, वरना मैं जिऊँगी कैसे! क्या लिखूँ, नहीं जानती। चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। तुम्हारी प्यारी चुन्नी अन्नपूर्णा काशी ...Read More