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சுபாவை பார்க்க பிரேம் தீபா உடன் போயிருந்தான். அவளுக்கென வாங்கிய பொருட்களை கொடுத்...
ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्...
Present time....कबीर सोफे पर अकेले बैठा था। चेहरा ठंडा, आँखें गंभीर। पर हाथ… हाथ...
धड़ाम!जैसे ही वह बैंक के अंदर भागा, एक भारी आग बुझाने वाला सिलेंडर (Fire Extingui...
ભારતની સીમાઓ ઓળંગીને બની વિશ્વવ્યાપી પ્રાચીન વિજ્ઞાન અને ઇતિહાસનો અમર વારસો આજના...
डाइनिंग टेबल पर हल्की रोशनी थी… लेकिन बातचीत का माहौल धीरे-धीरे गंभीर होता जा रह...
Title: दुश्मनी के दरमियान इश्कPart 15: खामोशियों के बीच साजिशकबीर और Myra के बीच...
"उस बंद कमरे में सन्नाटा इतना भारी था कि अयान के सीने में धड़कता हुआ गुस्सा साफ...
ಮೈಸೂರಿನ ಚಾಮುಂಡಿ ಬೆಟ್ಟದ ಪಾದದ ಬಳಿ ಆದರ್ಶ್ ತನ್ನ ಬೈಕ್ ನಿಲ್ಲಿಸಿದಾಗ ಸಮಯ ಮಧ್ಯರಾತ್ರಿ ಕಳೆದ...
---किरण और मधुकर एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे। वो अब इस रिश्ते में बहुत आगे ब...
આજના સમયમાં જે પ્રમાણે ટેકનોલોજીનો વિકાસ થઇ રહ્યો છે, તેટલી જ ઝડપથી માહિતીનું પણ આદાન પ્રદાન થઇ રહ્યું છે. એક સમયે એવો હતો કે, માહિતી સંતાડવી અને તેણે જાહેર થતી રોકવી ખુબ જ સહેલું...
वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था। हवा ठंडी थी, मगर उसके भीतर एक अनकही बेचैनी थी, जैसे कोई राज धीरे-धीरे परतों से बाहर आने को तैयार हो। शह...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
ಬೆಂಗಳೂರಿನ ಆ ಅರೆಬರೆ ಕತ್ತಲ ರಸ್ತೆಗಳಲ್ಲಿ ರಾತ್ರಿ ಒಂದು ಗಂಟೆಯೆಂದರೆ ಅದು ಕೇವಲ ಸಮಯವಲ್ಲ ಅದು ಮನುಷ್ಯರ ಲೋಕ ಮತ್ತು ಮೃತ್ಯುಲೋಕದ ನಡುವಿನ ಒಂದು ತೆಳುವಾದ ಪರದೆ ಸರಿಯುವ ಕ್ಷಣ. ಆಕಾಶದಿಂದ ಬೀಳುತ್ತಿದ್ದ ಮಳೆಯ ಹನಿಗಳು...
*"सात फेरों का इंतज़ार, सौ सवालों की बरसात"* _ प्रेम कहानी - किरण और मधुकर_---किरण गाँव की सबसे भोली और सीधी-साधी लड़की थी। उसका स्वभाव इतना विनम्र था कि पूरा गाँव...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
Happiness (1) Pain or happiness, always smiling mom, whether night or day, always smiling mom sleeping in wet, keeping me dry, pampering mom, all year along, always smiling mom, wh...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
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