Hindi Social Stories Books and stories free PDF

    बड़ी दीदी - 2
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
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    • 50

    कलकत्ता की भीड़ और कोलाहल भरी सड़कों पर पहुंचकर सुरेन्द्र नाथ धबरा गया। वहां न तो कोई डांटने-फटकारने वाला था और न कोई रात-दिन शासन करने वाला। मुंह सुख ...

    कौन है ये लोग ?
    by Akshay Mulchandani
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    • 37

    भारत को जीतने के लिए इस ओवर में चाहिए केवल ७ रन ..!और ये पहली गेंद, और इस गेंद पर महेंद्र सिंह धोनी का लाजवाब छक्का और बस एक ...

    सैलाब - 19
    by Lata Tejeswar renuka Verified icon
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    उस दिन शाम को सेजल बिंदु से मिलने गई। जब वह बिंदु के घर पहुँची तब विनिता सूखे कपड़े धूप से निकाल रही थी। हाय आंटी। कैसी हैं आप? ...

    पल जो यूँ गुज़रे - 23
    by Lajpat Rai Garg Verified icon
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    • 106

    यूपीएससी द्वारा अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के लिये चयनित उम्मीदवारों को पुलिस वेरीफिकेशन के पश्चात्‌ डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनॅल एण्ड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्मस द्वारा नियुक्ति के ऑफर लेटर जारी किये जाते ...

    लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 20 - Last Part
    by Neelam Kulshreshtha
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    • 128

    मीशा आज अब तक कमरे से क्यों नहीं निकल रही है ? दामिनी ने जाकर उसके कमरे को नॉक किया मीशा फ़ोन पर बात कर रही ...

    लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 19
    by Neelam Kulshreshtha
    • (2)
    • 148

    ज़िंदगी हर कदम एक नई जंग है ---सच, दामिनी ने इस जंग को खूब बहादुरी से लड़ा है आदमी की बाहरी जंग तो सबको दिखाई देती है ...

    बिटिया! बदल गई तुम
    by VIRENDER VEER MEHTA
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    बिटिया! बदल गई तुम मेरी प्यारी बिटिया, ढेरों प्रेम भरा स्नेह और आशीर्वाद। जानता हूँ अपने मेल बॉक्स में मेरी मेल देखकर तुम हैरान अवश्य हो रही होगी, क्योंकि ...

    आखर चौरासी - 21
    by Kamal
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    • 47

    ‘‘बाहर बड़ी देर लगा दी ?’’ भीतर घुसते ही उनकी पत्नी ने पूछा। ‘‘हाँ, वो सामने वाले अम्बिका बाबू बातें करने लग गए थे। नेताजी के बारे में कह रहे ...

    बड़ी दीदी - 1
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
    • (9)
    • 140

    इस धरती पर एक विशिष्ट प्रकार के लोग भी वसते है। यह फूस की आग की तरह होते हैं। वह झट से जल उठते हैं और फिर चटपट बुझ ...

    समझोते
    by Upasna Siag
    • (7)
    • 126

    माँ ! आज आप सुरभि आंटी के पास जरूर जा कर आना ! मानसी ने मुझसे कहा। अब सुरभि क्या करेगी ? पढाई तुमने करनी है। जिसमें रूचि हो ...

    आसपास से गुजरते हुए - 20
    by Jayanti Ranganathan Verified icon
    • (4)
    • 144

    आई को इस उम्र में यह जिम्मेदारी सौंपना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। इससे तो अच्छा होता, मैं दिल्ली चली जाती। वहां मैं अकेली संभाल लेती, पर ...

    इंद्रजाल
    by Shailendra Chauhan
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    • 60

    शैलेन्द्र चौहान उनके हाथों में जब-तब एक लॉलीपॉप रहता।अक्सर तो वे अपने हाथों का उपयोग कुछ लेने के लिए ही करते थे परंतु जब भी वे अपने आसपास किसी ...

    अनुराधा - 7 - अंतिम भाग
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
    • (7)
    • 222

    कुमार नही आया, यह सुनकर विजय की मां मारे भय के कांप उठी ‘यह केसी बात है रे? जिसके साथ लडाई है उसी के पाक लड़के को छोड़ आया?’ विजय ...

    वह रात किधर निकल गई
    by Geeta Shri
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    • 93

    वह रात नसीबोवाली नहीं थी. देर रात फोन पर झगड़ने के बाद बिंदू किसी काम के लायक नहीं बची थी। आयशा और वैभव दोनों दूर से सब देख समझ रहे थे, ...

    आखर चौरासी - 20
    by Kamal
    • (3)
    • 97

    हरनाम सिंह का पूरा घर अँधेरे में डूबा हुआ था। घर के सभी खिड़की दरवाजे बंद थे। जाड़ों की शामें यूँ भी जल्द खामोश हो जाती हैं। बाहर ठण्ढी ...

    सैलाब - 18
    by Lata Tejeswar renuka Verified icon
    • (2)
    • 79

    पावनी किचन के काम में व्यस्त थी,आखिर संक्रांति की तैयारियां भी करनी थी। तब घर की घंटी बज उठी। पावनी ने अपना काम छोड़ कर दरवाजा खोला। सामने ४० ...

    पल जो यूँ गुज़रे - 22
    by Lajpat Rai Garg Verified icon
    • (10)
    • 207

    तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार निर्मल का परिवार, कुल सात लोग — परमानन्द, सावित्री, जितेन्द्र, सुनन्दा, कमला, बन्टु तथा निर्मल — रविवार शाम को शिमला पहुँच गये। अनुराग ने इनके ...

    अनुराधा - 6
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
    • (11)
    • 185

    इसीत से तरह पांच-दिन बीत गए। स्त्रियों के आदर और देख-रेख का चित्र विजय के मन में आरंभ से ही अस्पष्ट था। अपनी मां को वह आरंभ से ही ...

    सांच कि, झूठ
    by Sapna Singh Verified icon
    • (7)
    • 126

    रंभा ने गोबर के ढे़र में पानी का छींटा मारकर सींचा और उन्हें सानने के लिये अपने दोनों हाथ उसमें घुसेड़ दिये। घिन बर आई, पिछले कुछ वर्षों में ...

    अनुराधा - 5
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
    • (9)
    • 142

    कलकत्ता से कुछ साग-सब्जी, फल और मिठाई आदि आई थीं। विजय ने नौकर से रसोईघर के सामने टोकरी उतरवाकर कहा, ‘अंदर होंगी जरूर?’ अंदर से मीठी आवाज में उत्तर आया, ...

    आखर चौरासी - 19
    by Kamal
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    • 66

    फैक्ट्री कैंटीन से जिन्दा बच निकले उन 28 सिक्खों जितने खुशकिस्मत, वे तीन सरदार फैक्ट्री कर्मचारी नहीं थे, जो एक नवंबर की उस काली सुबह अपनी ड्यूटी पर पहुँचे ...

    आसपास से गुजरते हुए - 19
    by Jayanti Ranganathan Verified icon
    • (4)
    • 104

    अगले दिन मैं शो देखने नहीं गई। दिन-भर टीवी देखती रही। शाम को कुछ दूर पैदल चली, अकेले में निराशा फिर घर करने लगी। पता नहीं, अब दिल्ली जाकर ...

    अनुराधा - 4
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
    • (9)
    • 171

    इस प्रकार में आने के बाद एक पुरानी आराम कुर्सी मिल गई थी। शाम को उसी के हत्थों पर दोनों पैर पसाक कर विजय आंखें नीचे किए हुए चुरुट ...

    सैलाब - 17
    by Lata Tejeswar renuka Verified icon
    • (2)
    • 77

    कॉलिंग बेल की आवाज से किचन में व्यस्त पावनी ने किचन से बाहर आ कर दरवाजा खोला। सामने बिंदु और उसकी ३ सहेलियाँ खड़ी थी। पावनी आश्चर्य चकित हो ...

    अश्लील क्या है.. नज़रिया या कपड़े??
    by Roopanjali singh parmar
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    • 146

    एक शब्द है जिस पर अक्सर ही बहुत सारे विचार पढ़ने या सुनने को मिलते हैं.. और वो शब्द है 'अश्लीलता'। अगर चर्चा अश्लीलता पर होगी तो महिलाओं का ...

    पल जो यूँ गुज़रे - 21
    by Lajpat Rai Garg Verified icon
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    • 149

    अन्ततः मई के द्वितीय सप्ताह की एक खुशनुमा प्रातः ऐसी आई जब शिमला स्थित सभी प्रमुख समाचारपत्रों के सम्वाददाता अपने—अपने कैमरामैन के साथ मशोबरा के ‘मधु—स्मृति विला' के परिसर ...

    यूँ ही
    by Pranava Bharti
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    एक उम्र होती है न जो पीछे जितनी छूटती जाती है, उतनी ही परछाईं की तरफ़ दौड़ लगाती है जैसे ---उसकी उम्र भी शायद कुछ ऎसी ही है ...

    छलिया कौन
    by Dr. Vandana Gupta
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        सब कहते हैं और हमने भी सुना है कि जिंदगी एक अबूझ पहेली है। जिंदगी के रंग कई रे.…. और सबसे गहरा रंग है प्यार का.... और ...

    लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 18
    by Neelam Kulshreshtha
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    • 130

    जब घरवाले अपने घर आने वाले होतें हैं तो ढेर सी तैयारियाँ करनी होतीं है, कैसी उत्तेजना भरी ख़ुशी मन में रहती है। तब अपनी थकान पर ध्यान नहीं ...

    लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 17
    by Neelam Kulshreshtha
    • (1)
    • 128

    यामिनी ने रोती हुई दिल दहलाने जैसा सवाल पूछती सृष्टि को अपने हाथों में जकड़ लिया, नहीं, बिलकुल नहीं, किसने कहा तुमसे कि तुम्हारी मम्मी मर जाएगी ?” उसने ...