Hindi Social Stories Books and stories free PDF

    पश्चाताप - 2
    by Meena Pathak
    • (2)
    • 27

    शहर के पॉश एरिया में भव्य और सुंदर सा बंगला, नौकर-चाकर, हर सुख-सुविधा और क्या चाहिए था उसे ! गेट से प्रवेश करते ही बड़ा सा बगीचा जिसमे देशी-विदेशी ...

    कभी यूँ भी तो हो... - 1
    by प्रियंका गुप्ता
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    • 26

    नर्स ने आकर मुझे झकझोरा तो सहसा मैं जैसे एक बहुत गहरे कुऍ से बाहर आई। दो पल को तो समझ ही नहीं आया, मैं हूँ कहाँ...फिर एक झटके ...

    दस दरवाज़े - 20
    by Subhash Neerav
    • (3)
    • 34

    जब भी वक्त मिलता है, रोजमरी बातें करने लग पड़ती है। मेरी पत्नी को तो मानो वह बातें करने के लिए तलाशती ही रहती है। परंतु पत्नी की अंग्रेजी ...

    आसपास से गुजरते हुए - 3
    by Jayanti Ranganathan
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    मेरी आई निशिगन्धा नाइक महाराष्ट्र की सारस्वत ब्राह्मण थीं। पुणे में उने बाबा थियेटर कम्पनी चलाते थे। आई भी थियेटर में काम करती थीं। उनका पूरा परिवार नाटक में ...

    खुशियों की आहट - 7
    by Harish Kumar Amit
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    • 33

    अगले दिन शाम के छह बजे के आसपास मोहित क्रिकेट खेलने जाने के लिए तैयार हो ही रहा था कि दरवाज़े की घंटी बजी. कुछ पल बाद दरवाज़ा खोलने ...

    खास बात
    by Mamtora Raxa
    • (4)
    • 30

      खासबात                                           आईने में देखकर वह मन ही मन अपने सौंदर्य को देखकर खुश हो रही थी, खुश क्यों न हो टाईट जिन्स और पिंक कलर कलर ...

    पल जो यूँ गुज़रे - 5
    by Lajpat Rai Garg
    • (4)
    • 59

    जिस दिन निर्मल घर वापस आया, दोपहर में सोने के बाद माँ को कहकर जितेन्द्र से मिलने के लिये जाने लगा तो सावित्री ने उसे बताया — ‘मैं बन्टु ...

    दस दरवाज़े - 19
    by Subhash Neerav
    • (3)
    • 39

    हम वैंबले की विक्टोरिया रोड पर खड़े हैं। मैं नक्शा खोलकर ट्रैवलर्ज़ कैम्प दीखने जैसी जगह खोज रहा हूँ। जैकलीन ने ही मुझे बता रखा है कि जिप्सियों को ...

    सैलाब - 1
    by Lata Tejeswar
    • (2)
    • 30

    शतायु पलंग से उठ कर बैठा। नींद न आने के कारण वैसे भी परेशान था, ऊपर से गरमी। कुछ देर पहले ही बिजली गुल हो गई थी। आधी रात ...

    लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 2
    by Neelam Kulshreshtha
    • (6)
    • 65

    कावेरी को जयपुर अपने घर आये उन्नीस बीस दिन हो चुके हैं लेकिन ऐसा लगता है दिल व घर दोनों खंडहर बन गये हैं। । एक जानलेवा सूनेपन का ...

    वसीयत
    by Namita Gupta
    • (20)
    • 140

            रेखा घर के कामों में व्यस्त थी । तभी बाहर बड़ी तेजी से कोलाहल उठा । लगता आज फिर किसी के यहां कुछ झगड़ा हो ...

    रिश्ता प्यार का
    by Savita Mishra
    • (5)
    • 58

    “घर में अकेले परेशान हो जाती हूँ | न आस न पड़ोस | न नाते रिश्तेदार |”“सुबह-शाम तो मैं रहता ही हूँ न !”“हुह ..सुबह जल्दी भागते हो और देर ...

    पश्चाताप - 1
    by Meena Pathak
    • (14)
    • 188

    अमिता फूट फूट कर रो रही थी अब उसे अपने किये पर पश्चाताप हो रहा था शायद उसे उन बुजुर्गों की हाय लगी थी जिसे ...

    उदास क्यों हो निन्नी...? - 2
    by प्रियंका गुप्ता
    • (3)
    • 41

    आज सोचती हूँ, उस दिन अनुज दा मुझे समझाते तो शायद एक अनजान रास्ते पर यूँ बढ़ते मेरे कदम रुक गए होते, पर अनुज दा की ज़बान पर ताला ...

    लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 1
    by Neelam Kulshreshtha
    • (0)
    • 41

    ``ऑनलाइन जर्नलिस्ट अवॉर्ड गोज़ टु प्रिशा पटेल फ़ॉर हर राइट अप `यूज़ ऑफ़ सेनेटरी नेपकिन्स एन्ड हाइजीन इन वीमन ऑफ़ विलेजेज़। ``शी मीडिया के पुरस्कार समारोह में घोषणा होती ...

    दूसरी का चक्कर
    by r k lal
    • (28)
    • 277

    “दूसरी का चक्कर” आर 0 के 0 लाल           उनके घर के सामने बड़ी भीड़ लगी  हुई थी। सभी लोग इंतजार कर रहे थे कि चंदन की बॉडी ...

    आसपास से गुजरते हुए - 2
    by Jayanti Ranganathan
    • (2)
    • 30

    रात के बारह बजने को थे। मैंने फुर्ती से अलमारी से वोद्का की बोतल निकाली और दोनों के लिए एक-एक पैग बना लिया, ‘नए साल का पहला जाम, मेरी ...

    दस दरवाज़े - 18
    by Subhash Neerav
    • (5)
    • 45

    ऊषा के जाने के बाद घर जैसे खाली खाली सा हो गया हो। इतना खाली तो यह पहली पत्नी जगीरो के जाने के बाद भी नहीं हुआ था। ऊषा ...

    अदृश्य हमसफ़र - 30 - अंतिम भाग
    by Vinay Panwar
    • (15)
    • 70

    रास्ते भर भैया और ममता चुपचाप रहे। दोनो को कुछ सूझ ही नही रहा था कि बात करें भी तो क्या। बीच बीच में एक दूसरे की तरफ देखकर बस ...

    उर्फ देवीजी
    by Geeta Shri
    • (2)
    • 47

    सिकुड़ी चमड़ी वाली लंबी-चौड़ी हथेली एक छोटे से गोल मुंह पर है। थोड़ी गंध से भरी महकती। फिर दूध-सी सफेद आंखों की आकर्षक पुतलियों की मासूमियत में थोड़ा डर ...

    ... कि हरदौल आते हैं
    by Manish Vaidya
    • (3)
    • 23

    हम विस्मय से सुनते हैं साँस थामकर। रात की ख़ामोशी को तोड़ते हुए दूर कहीं से मामी की आवाज़ गिरती है। वह काँच की तरह गिरती है और किरच-किरच ...

    खुशियों की आहट - 6
    by Harish Kumar Amit
    • (3)
    • 37

    दोपहर बाद मोहित स्कूल से वापिस आया तो उसका मुँह उतरा हुआ था. उसका मैथ्स का टैस्ट कुछ ख़ास अच्छा नहीं हुआ था. दो-तीन प्रश्न तो वही आए थे, ...

    पल जो यूँ गुज़रे - 4
    by Lajpat Rai Garg
    • (4)
    • 51

    इकतीस जुलाई को निर्मल ने कोचग कोर्स बीच में ही छोड़कर वापस चण्डीगढ़ जाना था, बल्कि यह कहना अध्कि उपयुक्त होगा कि निर्मल ने कोर्स के लिये इकतीस जुलाई ...

    लोभिन - 3
    by Meena Pathak
    • (23)
    • 218

    गर्मियों के दिन थे दोनों जेठानियाँ बच्चों के साथ मायके गयीं थीं घर में बस सास-ससुर और नौकर-चाकर थे पति तो रात के ...

    उदास क्यों हो निन्नी...? - 1
    by प्रियंका गुप्ता
    • (3)
    • 48

    आज पूरे बारह साल बाद इस कमरे के उस खुले हिस्से पर बैठी हूँ, जिसके लिए बरसों बाद भी कोई सही शब्द नहीं खोज पाई...। कुछ-कुछ छज्जे जैसा, पर ...

    दस दरवाज़े - 17
    by Subhash Neerav
    • (5)
    • 39

    एक दिन करमजीत का फोन आता है - “कैसे भाई, लगाए जाता है?” “और अब क्या करूँ।” “कोई शिकायत तो नहीं?” “शिकायत तो कोई नहीं, पर कब तक रहेगी ये?” “जब कोई शिकायत ही ...

    अदृश्य हमसफ़र - 29
    by Vinay Panwar
    • (8)
    • 55

    ममता के मन में शांति थी कि चलो कुछ ज्यादा हंगामा नहीं हुआ था। बड़े भैया के सामने बात हुई तो चिल्लपों कुछ ज्यादा नही मची थी। व्यापार के ...

    अम्मा की पेंशन
    by r k lal
    • (20)
    • 128

    “ अम्मा की पेंशन” आर 0 के 0 लाल     अम्मा कई दिनों से कह रही थी जरा मिथुन को कह दो कि आते समय मेरे लिए मेहंदी ...

    आसपास से गुजरते हुए - 1
    by Jayanti Ranganathan
    • (3)
    • 40

    मुझे पता चल गया था कि मैं प्रेग्नेंट हूं। मैं शारीरिक रूप से पूरी तरह सामान्य थी। ना शरीर में कोई हलचल हो रही थी, ना मन में। मैं ...

    खुशियों की आहट - 5
    by Harish Kumar Amit
    • (5)
    • 42

    मोहित का अंदाज़ा ग़लत निकला. चाय-नाश्ते के बाद मोहित ने कुमुद आंटी को अपनी कविताएँ सुनाईं. फिर मम्मी कपड़े बदलकर नए सिरे से तैयार होने में लग गईं. मोहित ...