Social Stories Books in Hindi language read and download PDF for free

    प्रतिदान
    by Raja Singh

    प्रतिदान राजा सिंह साहेब का ट्रान्सफर हो गया था, उनके चेहरे से प्रसन्नता निकल-निकल रही थी। शारीरिक भाषा बया कर रही थी कि वह कितने प्रसन्न है। वह अपने ...

    अपने-अपने इन्द्रधनुष - 8
    by Neerja Hemendra

    अपने-अपने इन्द्रधनुष (8) मैं समझ चुकी थी कि विक्रान्त मुझसे निकटता बढ़ाने के लिए ही ऐसा करता है। अपनी पत्नी को तलाक दे चुका है, संपन्न घर का है, ...

    सुरतिया - 3
    by vandana A dubey

    आप सोच रहे होंगे कि हम इतना सब क्यों बता रहे? अरे भाई! न बतायें, तो आप बाउजी को जान पायेंगे? नहीं न? तो चुपचाप पढ़िये उनके बारे में.  ...

    छल
    by Pavitra Agarwal

    छल पवित्रा अग्रवाल "दीदी मेरी एक सहेली मुसीबत में है। असल में वह एक धोखे का शिकार हो गई है। आपसे कुछ सलाह-मशवरा करना चाहती है। आपसे बिना पूछे ...

    सड़क पार की खिड़कियाँ - 3
    by Nidhi agrawal

    सड़क पार की खिड़कियाँ डॉ. निधि अग्रवाल (3) स्वर मासूम है। मैं अपने द्वंद से स्वयं ही आहत। सपने भी हमें रुला सकते हैं। आभासी दुनिया यथार्थ से अधिक ...

    गूगल बॉय - 8
    by Madhukant

    गूगल बॉय (रक्तदान जागृति का किशोर उपन्यास) मधुकांत खण्ड - 8 सुबह-सुबह गूगल माँ के साथ उठ बैठा। माँ की आदत थी सुबह साढ़े चार बजे से पाँच के ...

    एनीमल फॉर्म - 10 - अंतिम भाग
    by Suraj Prakash

    एनीमल फॉर्म जॉर्ज ऑर्वेल अनुवाद: सूरज प्रकाश (10) वर्ष़ों बीत गए। मौसम आए और गए। अल्पजीवी पशु अपनी जीवन-लीला समाप्त कर गए। एक ऐसा भी वक्त आया जब क्लोवर, ...

    जिंदगी मेरे घर आना - 11
    by Rashmi Ravija

    जिंदगी मेरे घर आना भाग – ११ सर ने क्या पढ़ाया कुछ भी नहीं गया दिमाग तक... बेल लगते ही... डेस्क फलांगती पहुँच गई, अपनी पसंदीदा जगह पर। केमिस्ट्री ...

    इक समंदर मेरे अंदर - 13
    by Madhu Arora

    इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (13) बादल एक दूसरे को धकियाते हुए तैरते से लगते थे और उनसे जब पानी बरसता था, तो लगता था मानो वे मोती ...

    गवाक्ष - 31
    by Pranava Bharti

    गवाक्ष 31== डॉ. श्रेष्ठी एक ज़हीन, सच्चरित्र व संवेदनशील विद्वान थे। वे कोई व्यक्ति नहीं थे, अपने में पूर्ण संस्थान थे 'द कम्प्लीट ऑर्गेनाइज़ेशन !'उनका चरित्र शीतल मस्तिष्क व गर्म ...

    गूंगा गाँव - 14 समाप्त
    by रामगोपाल तिवारी (भावुक)

                              चौदह गूंगा गाँव 14      जनजीवन से जुड़ी कथायें ही भारत की सच्ची तस्वीर है।’ यह बात हमारे मन-मस्तिष्क में उठती रही है। किन्तु इस प्रश्न को हल ...

    मुक्ति-धाम
    by Nisha chandra

    मुक्ति-धाम कहते हैं, एक बार मुक्ति ने भगवान से प्रार्थना करते हुए प्रश्न किया कि ‘ हे गोपाल! हे कृष्ण ! मैं सबको मुक्ति दिलाती हूँ, लेकिन मेरी मुक्ति ...

    लहराता चाँद - 1
    by Lata Tejeswar renuka

    लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' लहराता चाँद, (उपन्यास) सिर दर्द से फटा जा रहा था। आँखें भारी-भारी -सी लग रही थी। वह उठने की कोशिश कर रही थी पर ...

    क्या नाम दूँ ..! - 2
    by Ajay Shree

    गातांक से आगे.... क्या नाम दूँ ..! अजयश्री द्वितीय अध्याय सूरज आज भी अपने समय और जगह पर था, बस दिन बदल गया| पण्डित जटाशंकर मिश्र की टन-टन घंटी ...

    उलझन - 4
    by Amita Dubey

    उलझन डॉ. अमिता दुबे चार अंशिका बहुत दुविधा में है। यह बात वह सौमित्र को बताये या न बताये। यदि वह सौमित्र को बताती है तो कहीं वह मैम ...

    बात बस इतनी सी थी - 13
    by Dr kavita Tyagi

    बात बस इतनी सी थी 13. उस दिन मैं पिछले दिन की तरह चाय-नाश्ता और दोपहर या रात के खाने के मुद्दे में अपनी जिंदगी को उलझाना नहीं चाहता ...

    फैसला
    by Sudha Adesh

    फैसला         शीशे जैसे नाजुक दिल पर व्यंग्य बाणों के पत्थर बरसेंगेे तो किरचें उडेंगी ही । किरचें जख्मों को जन्म न दें, ऐसा संभव ही नहीं ...

    हसरतें
    by Dr Shilpi Jha

    हसरतें पूरे घर में कोलाहल था. घर की नई आमद को चारों ओर से घेरे सारा परिवार इकठ्ठा था. शीशम की फिनिश और वेलवेट के गद्दों वाले आठ कुर्सियों ...

    गौरव
    by rajendra shrivastava

    कहानी-- गौरव                                                       ...

    लीव इन लॉकडाउन और पड़ोसी आत्मा - 1
    by Jitendra Shivhare

    लीव इन लॉकडाउन और पड़ोसी आत्मा जितेन्द्र शिवहरे (1) धरम की गिनती असामाजिक तत्वों में होने लगी थी। परिवार वाले उसकी मारपीट और गुंडागर्दी से तंग आ आ गये। ...

    अपने-अपने इन्द्रधनुष - 7
    by Neerja Hemendra

    अपने-अपने इन्द्रधनुष (7) ’’ दीदी.......दीदी....’’ .सहसा पीछे से आवाज आयी। कोई मुझे ही पुकार रहा था। कौन....? पीछे पलट कर देखा तो महुआ थी। मैं रूक गयी। वह मुस्कराती ...

    आखा तीज का ब्याह - 11
    by Ankita Bhargava

    आखा तीज का ब्याह (11) आखिर श्वेता के वापस जाने के दिन पास आ गए थे। उसने काकाजी को कमरे का किराया देने की कोशिश की तो उन्होंने पैसे ...

    दास्तानगो - 3
    by Priyamvad

    दास्तानगो प्रियंवद ३ जब दरवाजे पर दस्तक हुयी शाम का धुंधलका शुरू हो गया था। द्घर इतना बड़ा और खुला हुआ था कि दरवाजे की दस्तक पत्तियों के गिरने ...

    आपकी आराधना - 4
    by Pushpendra Kumar Patel

    अतीत के कुछ अनसुलझे रहस्य जो बदल देंगे आराधना की जिन्दगी...

    30 शेड्स ऑफ बेला - 18
    by Jayanti Ranganathan

    30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Day 18 by Suman Bajpai सुमन बाजपेई कैनवास पर उभरने लगे हैं कुछ रंग रिया जैसे ही पार्क ...

    चार लोग और उनकी कहीं बातें।
    by MaAn meena

    हम रोज़ की तरह अपनी बालकनी में बैठे काॅफी का लुफ्त उठा रहे थे, तभी हमारे कानों में साइड वाली बालकनी हो रही लडा़ई की आवाजे़ पडी़ और फिर ...

    जय हिन्द की सेना - 13
    by Mahendra Bhishma

    जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म तेरह ढाका में हम्माद अपने बड़े भाई अमजद के यहाँ तौसीफ के साथ गया जो सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियन्ता के पद पर ...

    राम रचि राखा - 6 - 6
    by Pratap Narayan Singh

    राम रचि राखा (6) अभी शाम होने में लगभग घंटा-डेढ़ घंटा बाकी था। परन्तु दोपहर की बरसात ने मौसम सुहाना कर दिया था। हवा में थोड़ी शीतलता आ गयी ...

    पूर्ण-विराम से पहले....!!! - 25 - अंतिम भाग
    by Pragati Gupta

    पूर्ण-विराम से पहले....!!! 25. प्रखर और शिखा को एक दूसरे के लिए जो भी करना अच्छा लगता वही करने की कोशिश करते| शिखा अभी घर से बाहर बहुत कम ...

    गवाक्ष - 30
    by Pranava Bharti

    गवाक्ष 30== बिना किसी टीमटाम के कुछ मित्रों एवं स्वरा के माता-पिता की उपस्थिति में विवाह की औपचारिकता कर दी गई । स्वरा के माता-पिता कलकत्ता से विशेष रूप ...