Social Stories Books in Hindi language read and download PDF for free

    ढाई आखर प्रेम का
    by Sudha Adesh

    ढाई आखर प्रेम का‘‘मांजी, देखिए तो कौन आया है,’’ अनुज्ञा ने अपनी सासूमां के कमरे में प्रवेश करते हुए कहा.‘‘कौन आया है, बहू…’’ उन्होंने उठ कर चश्मा लगाते हुए ...

    पुण्‍य
    by Ramnarayan Sungariya

    कहानी--   पुण्‍य                                                     ...

    आज़ाद परिंदा - मिस्ड कॉल
    by Mens HUB

    नरेश एक सरकारी संस्थान में उच्च पद पर कार्यरत है और उसे इस पद पर काम करते हुए तकरीबन 9 वर्ष हो चुके है | उसका अभी तक का ...

    सीमारेखा
    by Dr. Vandana Gupta

    हर व्यक्ति की ज़िंदगी में एक मकसद होता है. बिना मकसद के ज़िन्दगी बेमानी है. ज़िन्दगी को जीना और उसे काटना दोनों अलग बातें हैं. ज़िन्दगी जब बोझ लगने ...

    बर्फीली रातों के गुलदस्ते
    by Jayanti Ranganathan

    शीला शाम को जब लंबी सैर से वापस आई, सामने ही उसे राबर्ट नजर आ गया अपने कुत्ते जीरो के साथ। राबर्ट उसे देख ठिठक गया। शीला ने उसे ...

    तीसरे लोग - 8
    by Geetanjali Chatterjee

    8. न्यूयॉर्क स्मारक के लिए अजनबी शहर नहीं था। उसने स्वयं को एड्स की रोकथाम के अनुसंधान में डुबो दिया | उनकी रिसर्च टीम रोज सोलह-सत्रा घंटे काम कर ...

    सुलझे...अनसुलझे - 18
    by Pragati Gupta

    सुलझे...अनसुलझे भावनात्मक स्पर्श ------------------ आज मेरी मुलाक़ात एक अरसे बाद अपनी बचपन की मित्र लेखा से हुई। सुना था कि उसकी शादी एक बहुत ही धनाढ्य परिवार में हुई ...

    लहराता चाँद - 29
    by Lata Tejeswar renuka

    लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' 29 महुआ की स्टेटमेंट से गैंग के कई बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरोहे के कुछ बदमाश लोग भाग निकले। महुआ को ...

    अपने-अपने कारागृह - 12
    by Sudha Adesh

    अपने-अपने कारागृह-11  हम सामान लेकर अभी बाहर निकले ही थे कि शैलेश और नंदिता 'वेलकम दीदी एवं जीजा जी 'का फ्लैग लेकर खड़े नजर आए । उन्हें देखते ही शैलेश ...

    एक दुनिया अजनबी - 12
    by Pranava Bharti

    एक दुनिया अजनबी 12 - मृदुला को विभा तबसे जानती है जब से प्रखर का जन्म हुआ था | उन दिनों शर्मा-परिवार किराए पर रहता था | प्रखर के जन्म पर वह उससे ...

    मिशन सिफर - 15
    by Ramakant Sharma

    15. राशिद पूरी तरह तंदुरुस्त हो चुका था। अब उसे कमजोरी भी महसूस नहीं हो रही थी। लेकिन, वह इसे जाहिर नहीं कर रहा था ताकि वह घर में ...

    बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 12
    by Pradeep Shrivastava

    भाग - १२ ' जीवन, दुनिया की खूबसूरती देखने का आपका नजरिया क्या है?' 'अब नजरिया का क्या कहूं, मैं जल्द से जल्द सब कुछ बदलना, देखना, चाहती थी। ...

    कच्ची डगर....
    by Dr Vinita Rahurikar

    आज खाना बनाते हुए सीमा के मन में विचारों की तरंगे उठ रही थी रह-रहकर। पिछले कई दिनों से वह देख रही थी उसकी किशोर वय बेटी श्वेता उसके ...

    बिटवा आ गवा... लॉकडाउन
    by Sunita Bishnolia

        पूनम की रात में जवान होने को आतुर चाँद को एकटक देखती रजनी के देखते ही देखते चाँद आसमान में अपनी आभा बिखरे चुका था। लंबे समय ...

    चिराग़-गुल
    by Deepak sharma

    चिराग़-गुल बहन की मृत्यु का समाचार मुझे टेलीफोन पर मिला. पत्नी और मैं उस समय एक विशेष पार्टी के लिए निकल रहे थे. पत्नी शीशे के सामने अपना अन्तिम ...

    काला धन
    by राज कुमार कांदु

    मैं घर से दूकान की तरफ जा रहा था । सुबह का खुशनुमा मौसम था । सडकों पर शोर शराबा लगभग नहीं होता है । अपनी धुन में चलते ...

    कालचक्र
    by श्रुत कीर्ति अग्रवाल

    कालचक्र उस दिन अचानक आशीष का फोन आया। न जाने कितने समय बाद उसकी आवाज़ कान में पड़ी थी। ये मेरे इकलौते बेटे की आवाज़ थी... उस बेटे की, जिसे ...

    इमली की चटनी में गुड़ की मिठास - 7
    by Shivani Sharma

    भाग-7 चन्द्रेश ने लौटते समय उसकी कार में चलने का आग्रह किया।पहले तो शालिनी झिझकी पर फिर उसे लगा चन्द्रेश के साथ थोड़ा सा और वक्त बिताने को मिल ...

    बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 11
    by Pradeep Shrivastava

    भाग - ११ मैं घूमना चाहती थी। खूब देर तक घूमना चाहती थी। रास्ते भर कई बार मैंने बहुत लोगों की तरफ देखा कि, लोग मुझे देख तो नहीं ...

    तीसरे लोग - 7
    by Geetanjali Chatterjee

    7. ट्रैन शायद किसी बड़े जंक्शन पर रुकी थी। किसना की अंतड़ियां मारे भूख और प्यास के सिकुड़ गई थी। जेब में पैसे तो थे, पर उतरने की हिम्मत ...

    जगत बा
    by Neelam Kulshreshtha

    जगत बा [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] कुछ बरस पहले मैंने अपने सरकारी घर के पीछे के कम्पाउंड में खुलने वाला दरवाज़ा खोला था, देखा वे हैं -बा, दो कपडों ...

    सुलझे...अनसुलझे - 17
    by Pragati Gupta

    सुलझे...अनसुलझे बेशकीमती रिश्ते -------------------- ‘छोटे बच्चों को मनाना कितना आसान होता है न मैडम| ज्यों-ज्यों ये बच्चे बड़े होते जाते है, उतना ही इनको मनाना मुश्किल का सबब बनता ...

    लता सांध्य-गृह - 8
    by Rama Sharma Manavi

          पूर्व कथा जानने के लिए पिछले अध्याय अवश्य पढ़ें।   आठवां अध्याय-----------------  गतांक से आगे….  ---------------   शोभिता की कक्ष साथी थीं विमलेश जी,पैंसठ वर्षीया, रिटायर्ड प्रधानाध्यापिका।   स्नातक ...

    लहराता चाँद - 28
    by Lata Tejeswar renuka

    लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' 28 कुछ महीने बीत गए। अनन्या अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गई। अवन्तिका के कॉलेज में आखिरी साल भी खत्म हो चुका था। महुआ ...

    मिशन सिफर - 14
    by Ramakant Sharma

    14. पता नहीं वह कितनी देर तक सोता रहा था। खिचड़ी लेकर आई नुसरत ने ही उसे उठाया था और पूछा था – “अब कैसा लग रहा है?” “बुखार ...

    एक दुनिया अजनबी - 11
    by Pranava Bharti

    एक दुनिया अजनबी 11- एक झौंका जीवन की दिशा पलट देता है, पता ही नहीं चलता इंसान किस बहाव में बह रहा है| आज जिस पीने-पिलाने को एक फ़ैशन समझा जाता ...

    पत्थर की मूरत
    by राज कुमार कांदु

    छमाही इम्तिहान के नतीजे घोषित हो चुके थे । कमल को सत्तर प्रतिशत अंक मिले थे । अपने इस प्रदर्शन से वह स्वयं ही काफी निराश था । लेकिन ...

    आ अब लौट चलें
    by Abdul Gaffar

    आ अब लौट चलें। (कहानी)लेखक - अब्दुल ग़फ़्फ़ार उस समय मैं दिल्ली में पढ़ाई कर रहा था जब धर्मा के मरने की ख़बर मिली। उसे गेहुअन सांप ने डंस लिया था। ...

    अपने-अपने कारागृह - 11
    by Sudha Adesh

    अपने-अपने कारागृह-10  थोड़ी ही देर में ही अपनी जगह पर आकर विमान रुक गया ,.। विमान का गेट खुलते ही यात्री एक-एक करके उतरने लगे । गेट पर परिचारिका हाथ ...

    मिरगी
    by Deepak sharma

    मिरगी उस निजी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग का चार्ज लेने के कुछ ही दिनों बाद कुन्ती का केस मेरे पास आया था| “यह पर्ची यहीं के एक वार्ड बॉय ...