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बाजार में रामधन - कैलाश बनवासी
by राज बोहरे

कैलाश वनवासी का कथा संग्रह                                               भौंचक खडे रामधन और बाजार में बदलता समाज                                                                   पुस्तक समीक्षा- राजनारायण बोहरे     कथा संग्रह- बाजार में रामधन  कहानीकार- क

आलोचना की अदालत-राजनारायण बोहरे
by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

कृति  आलोचना की अदालत कथाकार श्री राजनारायण बोहरे जी        सम्ंपादक के.बी.एल पाण्डेय जी उदीप्त प्रकाशन लखमीपुरा खीरी उ.प्र.                                        समीक्षक  वेदराम प्रजापति मनमस्त कृति आलोचना की अदालत ...

केशर कसूरी:शिवमूर्ति
by राज बोहरे

कहानी संग्रह                    केशर कसूरी:शिवमूर्ति                   स्त्री विमर्श और आमजन की सशक्त कहानियां   अपनी कम कहानियों के बूते पर ही आठवें दशक के कहानीकारों की पहली पंक्ति मे स्थान ...

स्वतंत्र सक्सेना-सरल नहीं था यह काम
by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

समीक्षा के आईने में ’’सरल नहीं था यह काम और अन्य कविताएं’’ समीक्षक - वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’तटस्थ नीति के अध्येता ,चिंतन के सहपाठी और ईमानदारी की जमीन को तराशने ...

अटकन चटकन- वंदना अवस्थी दुबे
by राजीव तनेजा

क़ुदरती तौर पर कुछ चीज़ें..कुछ बातें...कुछ रिश्ते केवल और केवल ऊपरवाले की मर्ज़ी से ही संतुलित एवं नियंत्रित होते हैं। उनमें चाह कर भी अपनी मर्ज़ी से हम कुछ ...

‘બે દોકડા’ : વાર્તામાં જોવા મળતું સામાજિક પ્રતિબિંબ
by Surya Barot

‘બે દોકડા’ : વાર્તામાં જોવા મળતું સામાજિક પ્રતિબિંબ ગુજરાતી વાર્તાનું કલા તત્વ કે વાર્તાનું સ્વરૂપ સતત પરિવર્તિત રહ્યું છે કહેવાય છે કે ‘દર દસકે’ ઘણા નવા વાર્તાકારો પોતાની વાર્તાઓ ...

प्रोस्तोर --एक नया प्रयोग
by Yashvant Kothari

प्रोस्तोर उपन्यास  एक नया प्रयोग  यु हिंदी में उपन्यास लेखन की परम्परा बहुत पुराणी नहीं है,मुश्किल से डेढ़ सौ साल पुराणी.कम ही उपन्यास लिखे जाते हैं,फिर आजकल पढने का ...

उपन्यास महाकवि भवभूति- रामगोपाल भावुक
by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

उपन्यास महाकवि भवभूति - समीक्षात्मक अध्ययन                                                            वेदराम प्रजापति ‘मनमस्त’           पद्मावती, पवाया पंचमहल डबरा भवभूति नगर का एक एतिहासिक और साँस्कृतिक वैभवशाली नगर रहा है, जिसने गालवऋषि ...

भावुक’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का समीक्षात्मक अध्ययन
by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

शोधग्रंथ रामगोपाल तिवारी‘ भावुक’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का समीक्षात्मक अध्ययन   समीक्षक वेदराम प्रजापति ’बरिष्ठ कवि                         ...

यूपी 65- निखिल सचान
by राजीव तनेजा

कई बार पढ़ते वक्त कुछ किताबें आपके हाथ ऐसी लग जाती हैं कि पहले दो चार पन्नों को पढ़ते ही आपके मुँह से बस..."वाह" निकलता है और आपको लेखक ...

रत्नावली रामगोपाल भावुक समीक्षा
by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

रत्नावली रामगोपाल भावुक समीक्षा के आइने में-                                                   वेदराम प्रजापति ‘मनमस्त’                   कभी- कभी, विनोद के लहजे में कही गई अटल सत्य बात भी इतनी कड़वी हो ...

મારી નજરે - બુક રિવ્યૂ
by Vijeta Maru

શું તમે સારું લખી શકો છો? શું તમે સારૂ એવું લખાણ કરી એને પુસ્તક નું સ્વરૂપ આપવા માંગો છો? શું તમે તમારી લેખન કળા ને વધુ વિકસતી જોવા માંગો ...

અંધાયુગ: મહાભારત ને ભારતકાળનુ વાસ્તવચિત્ર
by Dr Tarun Banker

અંધાયુગ, ધર્મવીર ભારતીની એવી કૃતિ જેને 'ન ભૂતો ન ભવિષ્યતિ' પણ કહી શકાય. 1954ના સપ્ટેમ્બર મહિનામાં લખાયેલ આ કૃતિના અનેક સંસ્કરણો પ્રકાશિત થયાં છે. હિન્દી સાહિત્યના વરિષ્ઠ સાહિત્યકાર્ ધર્મવીર ...

नरोत्तमदास पाण्डेय ’’मधु’’ -भाषा और शिल्प
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय

भाषा और शिल्प                                 भाषा अभिव्यक्ति का सहज और प्रमुख माध्यम है। साहित्य के क्षेत्र में अनुभूति के रूप-विधान की सभी पद्धतियाँ भाषा पर ही आश्रित होती हैं। ...

ચોખ્ખું ને ચણક - ભાગ ૨ - આસ્વાદ પર્વ
by શબ્દ શબ્દનો સર્જનહાર

શીર્ષક:ત્રેવડ હોય તેને જ સાધુ થવું!હમણાની જે પરિસ્થિતિ છે અને છાપામાં વાંચવામાં આવે છે તે જોતા તો એક પંક્તિ પ્રિતમદાસ ની યાદ આવે છે કે,"હરિનો મારગ છે શૂરાનો, નહીં ...

रावण-आर्यवर्त का शत्रु- अमीश त्रिपाठी
by राजीव तनेजा

किसी को उनकी लेखनी दिलचस्प, बाँध लेने वाली तथा जानकारी से भरपूर नज़र आती है। तो कोई उन्हें भारत के महान कथाकारों में शुमार करता है। कोई उन्हें भारत ...

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ की वैचारिकता
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ की वैचारिकता                काव्य में भाव-तत्त्व के साथ ही विचार-तत्त्व का भी काव्य में बहुत महत्त्व है। जीवन में अनेक स्थितियों का प्रभाव केवल हार्दिक उद्धेलन ...

પુસ્તક પરિચય 'stories we never tell'
by SUNIL ANJARIA

બુક રિવ્યુ- stories we never tell.*****હાલમાં જ બુક 'stories we never tell' - savi sharma વાંચી. આપણાં સુરત શહેરની જ લેખિકાએ લખેલી. જીવન માટે પ્રેરણાત્મક સંદેશ બે સમાંતર રોચક આખ્યાનો ...

હરિલાલ : મહાત્માના પ્રકાશનો પડછાયો તો નહોતા જ
by Dr Tarun Banker

"શ્રી દિનકર જોશીના ‘પ્રકાશનો પડછાયો’ પુસ્તકના આધારે લખાયેલ "ગાંધી વિરુદ્ધ ગાંધી" નામના મરાઠી, ગુજરાતી, હિન્દી અને છેલ્લે અંગ્રેજી ભાષામાં Mahatma vs. Mahatma રજુ થયેલ નાટકમાં વાસ્તવિકતાને સમજ્યા વિના જે ...

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ का स्फुट काव्य
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ का स्फुट काव्य                    उपर्युक्त प्रबन्ध रचनाओं और मुक्तक कृतियों के अतिरिक्त ‘मधु’का प्रभूत काव्य स्फुट रूप में है। स्फुट काव्य में कहीं-कहीं किसी स्थिति, ...

पिघली हुई लड़की- आकांक्षा पारे
by राजीव तनेजा

आम कहानियों की अपेक्षा अगर किसी कहानी में प्रभावी ढंग से समाज में पनप रही विद्रूपताओं का जिक्र हो तो मेरे ख्याल से उस कहानी की उम्र आम कहानियों ...

नरोत्तम दास पाणेय ‘‘मधु’’ की मुक्त कृतियां
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तम दास पाणेय ‘‘मधु’’ की मुक्त कृतियां काव्य के निर्बन्ध स्वरूप को मुक्तक कहा जाता है। ‘अग्निपुराण’ में ऐसे श्लोक को मुक्तक कहा गया है जो स्वयं में ही ...

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘‘मधु’’ की प्रबंध कृतियां
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय

            नरोत्तमदास पाण्डेय ‘‘मधु’’ की प्रबंध कृतियां                  ‘‘मधु’’ की प्रबंध कृतियाँ काव्य रूपों की दृष्टि से दो प्रकार की हैं। कुछ कृतियाँ खण्डकाव्य की कोटि की हैं ...

લજ્જા
by Bhavin Jasani

પુસ્તક :  " લજ્જા "લેખક  :   તસલીમા નસરીન             પુસ્તક એક વાર્તા ના સ્વરૂપે છે, કોઈ પણ વાર્તા નુ સર્જન ક્યારે થાય કે જયારે એવી ...

બુક રિવ્યુ circle of reasond
by SUNIL ANJARIA

 બંગાળી લેખક અમીતાવ ઘોષની ઈંગ્લીશ બેસ્ટ સેલર the circle of reasons વાંચી. અંગ્રેજી નવલકથામાં પણ બ્રિટિશ, અમેરિકન, કેરાલી, બંગાળી દરેકની વર્ણનો અને પ્લોટની સ્ટાઇલ તથા ભાષા, શબ્દો અલગ હોય ...

प्रकाशकान्त: मकतल
by राज बोहरे

समीक्षा-                          मकतल: प्रकाशकान्त                          साजिशन सजा की दर्दगाथा        अपनी सोच साफगोई और सकारात्मक दृष्टि के लिए मशहूर कथाकार प्रकाश कान्त का उपन्यास ‘ मकतल’   मेधा बुक्स ने प्रकाशित ...

The चिरकुट्स- आलोक कुमार
by राजीव तनेजा

अगर अपवादों की बात ना करें तो आमतौर पर कॉलेज की दोस्ती ...कॉलेज के बाद भी किसी ना किसी माध्यम से हम सबके बीच, तब भी ज़िंदा एवं सक्रिय ...

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘‘मधु’ और छायावाद
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय

ऽ सम सामयिक परिवेश ऽ उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम दशकों और बीसवीं शताब्दी के प्रथमार्द्ध की परिस्थितियाँ भारतीय जिजीविषा का इतिहास हैं। राजनीतिक आकाश में राष्ट्रीयता की भावना के ...

किस्सा लोकतंत्र: विभूतिनारायण राय
by राज बोहरे

उपन्यास                                    किस्सा लोकतंत्र: विभूतिनारायण राय                 लोकतंत्र का कच्चा चिट्ठा बताती एक उम्दा कहानी      हिन्दी उपन्यास का वर्तमान काल उपन्यास के पुनरोदभव का काल कहा जा सकता ...

पिताजी चुप रहते हैं: ज्ञानप्रकाश विवेक
by राज बोहरे

  कहानी संग्रह  पिताजी चुप रहते हैं:  ज्ञानप्रकाश विवेक                             कविता का मजा देती कहानियाँ कुछ आलोचक जो कविता और कहानी में  गलत फहमिया पैदा करके दोनों की भाषा ...

ચાર્લી ચેપ્લિન
by Bhavin Jasani

આજે આપણે વાત કરવા ની છે એક આવા વ્યક્તિત્વ વિશે એક એવી વ્યક્તિ વિશે જેણે દુનિયા ને પોતાની કલા થી હસાવી હસાવી ને હંફાવી નાખ્યા પણ કહેવાય ને કે ...

गूंगे नहीं हैं शब्द हमारे-संपादन- सुभाष नीरव, डॉ. नीरज सुघांशु
by राजीव तनेजा

पुरुषसत्तात्मक समाज होने के कारण आमतौर पर हमारे देश मे स्त्रियों की बात को..उनके विचारों..उनके जज़्बातों को..कभी अहमियत नहीं दी गयी। एक तरफ पुरुष को जहाँ स्वछंद प्रवृति का ...