मुझे हमेशा अंकों में उलझते हुए भी शब्दों से खेलते हुए सुकून की तलाश रही है। बचपन से ही मनोभावों को डायरी के पन्नों में छुपाया है, कविताओं के रूप में। प्रकृति से राग और अपनों से अनुराग के कुछ पल, मानवीय संवेदनाओं में डूबा मन कभी खुश होता, कभी उदास, कभी प्रेम में डूबा तो कभी अलगाव की पीड़ा से बेचैन। जिंदगी के कई पहलुओं को नजदीक से जाना तो कुछ आज तक अनछुए ही रहे। जीवन की संगति और विसंगति से उपजी रचनाओं में खुशी, उदासी, प्रेम, पर्व, अलगाव, संस्कार और अपनत्व जैसे जिंदगी के रंग भरने का प्रयास रहता है।