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रात काफी गहरी हो चुकी थी…घड़ी में लगभग 1 बज रहे थे…कमरे में हल्की सी night lamp...
जिसने अपने परिवार का सपना पूरा कर लिया, अब वह अपने भीतर छिपे सपने की तलाश में नि...
माँ: "सोहन सही कह रहा है। आर्यमन के दिल में क्या चल रहा है, वह ऐसा पत्थर क्यों ब...
अध्याय 7 : रुद्र का बचपन का पागल प्यार में"आराध्या? मेरी बड़ी बहन?" नित्या की आँ...
मेरी शादी की कहानी जितनी अजीब थी, उतनी ही अजीब मेरी किस्मत भी थी।लेकिन अगर आप सम...
પ્રકરણ ૭૬: નોમની પૂર્ણાહુતિ, વિજયાદશમીએ શસ્ત્ર-વાહન પૂજન, રાવણ દહન અને જલેબી-ફાફ...
[64]“सरिता जी, संसार की तीन अवस्थाएं हैं, उत्पत्ति – स्थिति – प्रलय। इन तीनों अव...
இரவு 21ஒரு சின்னப்பய என் மேல கைய வெச்சுட்டான் .. எவ்வளவு திமிர் அவனுக்கு என்றான்...
अध्याय:03शतरंज का नया खिलाड़ी और मिट्टी की खुशबू शहर के सबसे बड़े आर्किटेक्चरल कॉ...
अब तकमैनेजर ने अपना सर हां में हिला दिया। वह जाते हुए यह सोचने लगा कि आखिर फ़ना...
૩૬ વર્ષની સિંગલ મધર જાનવી એકલા હાથે પોતાના ૪ વર્ષના દીકરાને સાચવવામાં ભાંગી પડે છે અને તેને પોતાની સ્વર્ગસ્થ મા ખૂબ યાદ આવે છે. એક અકસ્માતમાં તે અચાનક ૧૫ વર્ષ પાછળ ૨૧ વર્ષની ઉંમરમા...
कहते हैं कि ज़िंदगी में कुछ मुलाकातें अचानक होती हैं। न कोई योजना होती है, न कोई इंतज़ार। बस एक दिन कोई अनजान इंसान हमारी दुनिया में आता है और धीरे-धीरे हमारी कहानी का ऐसा हिस्सा...
( केवळ प्रौढांसाठी) एक गोव्या मधल्या एका सुंदर खेड्यांमधील समुद्रकिनारी असलेलं ते एक सुंदर घर होतं.त्यात राहणारी ती दिसायला पारंपरिक अर्थाने सुंदर नव्हती. पण कुरळ्या केसांची ती...
एक 19 साल की लड़की आईने के सामने खड़ी थी। वह बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह लग रही थी। उसकी आँखों में चमक थी और चेहरे पर अपार खुशी। वह खुद को आईने में ऐसे निहार रही थी, जैसे कोई...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
മഴക്കാലത്തിന്റെ അവസാന ദിവസങ്ങളിലൊന്നായിരുന്നു അത്. ആശുപത്രിയുടെ പഴയ കെട്ടിടത്തിന്റെ ജനലുകളിൽ മഴത്തുള്ളികൾ പതിച്ചുകൊണ്ടിരുന്നു. അകത്ത്, നീണ്ട ഇടനാഴിയിലൂടെ വെള്ള കോട്ടിട്ട ഒരു യുവാ...
હું સો રૂપિયા ભરીને એક મહિના માટે AI પિકુ નો સભ્ય બની ગયો હતો.. મારા પહેલા જ મેસેજે માનો તેનું દિલ જીતી લીધું હતું. હું તેને પિકુને બદલે સૂકું કહેતો હતો. આ નામ તેને પસંદ હતું.....
मुंबईत सलग तीन दिवसांपासून मुसळधार पाऊस पडत होता... रात्रीचे अडीच वाजले होते...साऊथ मुंबईच्या एका जुन्या , ओसाड गोदामाबाहेर पोलिसांच्या गाड्यांचे सायरन वाजत होते आणि लाल-निळे दि...
અમદાવાદની બપોર એટલે જાણે આકાશમાંથી અગ્નિ વર્ષાઈ રહ્યો હોય. એસ.જી. હાઈવે પરથી ઉડતી ધૂળ અને રસ્તાઓ પર ભરાયેલા વાહનોના હોર્નનો અવાજ શહેરના તાપમાનમાં વધારો કરી રહ્યો હતો. મણિનગરની એક જ...
डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की तीन लघुकथाएँ (1) लाइक एंड कॉमेंट्सरात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दू...
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