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महाभारत की कहानी - भाग-१९३ भीष्म द्वारा वर्णित खड़्ग की उत्पत्ति की कथा प्रस्त...
भाग 1 -टैगलाइन: "जब डर का मजाक उड़ाया गया... डर ने सबक सिखा दिया।"---एक्ट 1 — रो...
(सुबह का समय। घर में सन्नाटा। कौशिक ऑफिस के लिए निकल चुका है—चश्मा लगाए हुए।)(सु...
रिश्तों का दर्द लेखक: विजय शर्मा एरी ---प्रस्तावनारिश्ते जीवन की सबसे बड़ी पूँज...
शादी की रस्में अग्नि और मंत्रोच्चार के शोर में किसी 'बफरिंग' होती मेमोरी...
पॉज़िट्रॉन–कक्षा–ऊर्जा स्थायित्व सिद्धांत(Positron Orbital–Energy Persistence Th...
चौघे लगबगीने वॉर रूममध्ये आले. भारताचे CDS व्हिडिओ कॉलवर होते."So worriers, what...
શીર્ષક: "સ્માર્ટફોનનો વ્યાપ અને સંબંધોનો સંતાપ"આજની ૨૧મી સદીનું સૌથી મોટું આશ્ચર...
राजन ने जब खाने का निवाला यूं चेहरे पर मुस्कान और आंखों में प्यार के साथ त्रिशा...
कुछ लोग मुस्कुरा रहे थे—“लगता है आदित्य सर का सॉफ्ट साइड भी है।”जानवी यह सब देख...
यह कहानी एक लड़की की है, इस कहानी में त्याग, एकतरफा प्यार, वफादारी और बहुत कुछ है। धोखा और विश्वासघात। यह एक बहुत ही सुंदर, भावनात्मक और भविष्योन्मुखी कहानी है।
"Gulab, are your parents going to be late today?" A teacher asked the six year old, little girl standing alone near the gate waiting for her parents. Gulab shrugged, not...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर दिव्या के कमरे में फैल रही थी। अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँख खुल गई थी। वह कुछ पल यूँ ही छत को देखती रही, जैसे किसी अधूरे सपने को याद करने की कोश...
Mira had always believed some places remembered people. The cafe on the corner of Ashwood Street was one of them. She didn’t know why her chest tightened every time she pushe...
सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था। शहर की यह शाम भी कुछ वैसी ही थी—आधी भागदौड़ में डूबी हुई, आधी थकी हुई। वह कैफ़े के कोने वाली कुर्सी पर ब...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
यह उपन्यास पूरी तरह कल्पना पर आधारित है और केवल कहानी व मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें बताए गए विचार या कॉन्सेप्ट लेखक के व्यक्तिगत विचार नहीं हैं और इस कहानी में दर्शाए...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
সন্ধ্যা নামার ঠিক আগের এই সময়টা খুব প্রিয় মণিকার। যখন স্কুল কলেজে পড়ত, এই সময়ে এককাপ চা নিয়ে মায়ের সঙ্গে বসত গোল বারান্দায়। মা বসতে চাইত না, সন্ধে দিতে হবে, জলখাবার করতে হবে,...
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