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स्वर आले जुळूनी By Prof Shriram V Kale

अहमदाबाद हायवेवरुन बिऱ्हाडाकडे परतताना बुवांचे शब्द ईश्वराच्या देवळातील धडाम् ss धुडूम् ss वाजणाऱ्या नगाऱ्यासारखे माझ्या कानात घुमत राहिलेले....! “कलेची साधनाम्हणजे मोठं दिव्य असतं...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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विक्रम और बेताल. By Vedant Kana

यह कहानी राजा विक्रमादित्य के समय की है, जिसे "विक्रम और बेताल" की कहानियों की शुरुआत माना जाता है। यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे राजा विक्रमादित्य ने एक साधु को दिए गए अ...

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क्या सब ठीक है By Narayan Menariya

यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।
हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...

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પડછાયો: એક પેઢીના સ્વપ્નનો વારસો By I AM ER U.D.SUTHAR

શિયાળાની ધીમી અને ફૂલગુલાબી ઠંડીમાં, હરગોવનદાસ સોની પોતાના નાનકડા ૨ BHK ફ્લેટની બાલ્કનીમાં બેઠા હતા. સવારના તાજા ખબર વાંચતાં તેઓ ઠંડીનો આનંદ માણી રહ્યા હતા. તેમનું જીવન શાંત અને સર...

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अम्मा By Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा।

अब...

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थंड झाल्यार खावचा By Prof Shriram V Kale

पहिला कोंबडा झालाआणि सनई चौघडा सुरु झाला. तशी आचाऱ्यांची लगबग सुरु झाली . जनूभटाने मोठा टोप भरून पाणी तापत लावले आणि बरोबरच्या पोराना हाकारायला लागला. “पद्या, सख्या,...

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पर्दे के पीछे By ARTI MEENA

सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...

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When Miracles Happen By fiza saifi

“राजू… उठ जा बेटा… चल, काम पर नहीं जाना है क्या?”

राजू की माँ उसे रोज़ सुबह जल्दी जगा दिया करती थी, जिससे वह हमेशा चिढ़ जाता था। वह अपने कानों पर हाथ रखकर चादर फिर से मुँह तक खी...

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ગીતા - સવાલ તમારા જવાબ શ્રીકૃષ્ણના By Hardik Galiya

મિત્રો હું છું હાર્દિક ગાળિયા. અહીંયા યુવા મિત્રોને ગમે અને જીવનમાં કેવી રીતે ઉપયોગી બને તે રીતે શ્રીમદ્ ભગવદ્ ગીતાને શબ્દો દ્વારા અને પોડકાસ્ટ ના સ્વરૂપમાં અહીં લખવાનો પ્રયત્ન કર્...

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स्वर आले जुळूनी By Prof Shriram V Kale

अहमदाबाद हायवेवरुन बिऱ्हाडाकडे परतताना बुवांचे शब्द ईश्वराच्या देवळातील धडाम् ss धुडूम् ss वाजणाऱ्या नगाऱ्यासारखे माझ्या कानात घुमत राहिलेले....! “कलेची साधनाम्हणजे मोठं दिव्य असतं...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

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वह...

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विक्रम और बेताल. By Vedant Kana

यह कहानी राजा विक्रमादित्य के समय की है, जिसे "विक्रम और बेताल" की कहानियों की शुरुआत माना जाता है। यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे राजा विक्रमादित्य ने एक साधु को दिए गए अ...

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क्या सब ठीक है By Narayan Menariya

यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।
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પડછાયો: એક પેઢીના સ્વપ્નનો વારસો By I AM ER U.D.SUTHAR

શિયાળાની ધીમી અને ફૂલગુલાબી ઠંડીમાં, હરગોવનદાસ સોની પોતાના નાનકડા ૨ BHK ફ્લેટની બાલ્કનીમાં બેઠા હતા. સવારના તાજા ખબર વાંચતાં તેઓ ઠંડીનો આનંદ માણી રહ્યા હતા. તેમનું જીવન શાંત અને સર...

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अम्मा By Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा।

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थंड झाल्यार खावचा By Prof Shriram V Kale

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पर्दे के पीछे By ARTI MEENA

सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...

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When Miracles Happen By fiza saifi

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राजू की माँ उसे रोज़ सुबह जल्दी जगा दिया करती थी, जिससे वह हमेशा चिढ़ जाता था। वह अपने कानों पर हाथ रखकर चादर फिर से मुँह तक खी...

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ગીતા - સવાલ તમારા જવાબ શ્રીકૃષ્ણના By Hardik Galiya

મિત્રો હું છું હાર્દિક ગાળિયા. અહીંયા યુવા મિત્રોને ગમે અને જીવનમાં કેવી રીતે ઉપયોગી બને તે રીતે શ્રીમદ્ ભગવદ્ ગીતાને શબ્દો દ્વારા અને પોડકાસ્ટ ના સ્વરૂપમાં અહીં લખવાનો પ્રયત્ન કર્...

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