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Featured Books
  • अधूरापन - 12

    अध्याय - १२राजेश और अमृता डॉक्टर के पास पहुँचते तब तक दोनों मन ही मन विचारों में...

  • સરકારી પ્રેમ - ભાગ 62

    નવનીત પણ વિચાર કરવા લાગ્યો કે શું થઈ રહ્યું હતું? અચાનક જ તેને રોનક શ્રીવાસ્તવ ન...

  • अंधेरी रात का राज़ - भाग 1

    रात के करीब बारह बजे थे। पूरा गाँव गहरी नींद में सो रहा था। चारों तरफ सन्नाटा था...

  • ಅಧ್ಯಾಯ 5: ಬ್ರಹ್ಮಗಿರಿ ರಹಸ್ಯ

    ಈ 65ನೇ ಪುಟವನ್ನು ಓದುವವನೇ 66ನೇ ಬಲಿಯಾಗುತ್ತಾನೆ ಎಂಬ ವಾಕ್ಯವನ್ನು ಓದುತ್ತಿದ್ದಂತೆ ವಿಕ್ರಂನ...

  • भोजशाला रहेगा मंदिर

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस...

  • શહેરની હવામાં ખોવાયેલું ગામ - 1

    એક ગામ, જ્યાં સંબંધો લોહીથી નહીં, લાગણીઓથી બંધાયેલા હતા… અને એક શહેર, જ્યાં સપના...

  • प्यार का जाल - 7

    तस्वीर देखते ही रिया के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं। जो आँखें अब तक मासूमियत और...

  • പുലർകാലത്തെ മഞ്ഞുതുള്ളി

    പുലർകാലത്തെ മഞ്ഞുതുള്ളിരാത്രിയുടെ അവസാന യാമങ്ങളിലൊന്നായിരുന്നു അത്.ചുറ്റുമുള്ള ല...

  • બાપની વેદના

    ભાગ 1 — બાપનું સપનુંગામના છેવાડે એક નાનું કાચું ઘર હતું. ઘરની દીવાલો માટીની હતી...

  • PLATFORM - 8

    अध्याय 8: कोमा के भीतरधड़… धड़… धड़…ट्रेन के पहियों की आवाज़ अंधेरे अस्पताल में...

એક પુરુષ- બધાની વચ્ચે એકલો By Aloka Patel

એક દિવસ, ઘણી જવાબદારીઓ

સવારે છ વાગ્યાનો એલાર્મ વાગ્યો.

મિહિરે આંખો ખોલી, પણ થોડી ક્ષણો માટે પથારીમાં જ પડ્યો રહ્યો.

બાજુમાં તેની પત્ની નિશા હજુ ઊંઘતી હતી. સામેની દિવાલ પર...

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निषाद पर्व By Prof Shriram V Kale

“प्रभासक्षेत्री यादव वीरांचा संहार झाला. बलराम, श्रीकृष्ण यांचीही अवतार समाप्ती झाली. सिंधुसागर कणाकणाने द्वारकापुरी आपल्या उदरात घेऊ लागला. यादवीतून वाचलेले वृध्द, नारीजन आणि बालक...

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बांसुरी की धुन By prem chand hembram

भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।
देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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कोकणातले भोरपी By Prof Shriram V Kale

लावणी सुरू होण्याचा हंगाम आलेला होता. त्यावेळी सकाळ संध्याकाळ दोन वेळा शाळा भरायची. नऊ वाजता लघवीची सुटी झाली नी आम्ही वर्गा बाहेर पडून देवराईकडे दडदडत निघालो. ग्रामपंचायती...

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । By miss k

क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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लिंग्या गुरवाला लॉटरी लागली By Prof Shriram V Kale

कालवीतून टेंबवलीत जाणाऱ्या रस्त्यावर भिड्यांच्या घराकडून जरा पुढे गेल्यावर मळे जमीन सुरू व्हायची. तिथे सड्यावरून आलेल्या व्हाळावरची मोरी ओलांडून जरा पुढे गेलं की जवळ जवळ दीडेक फ...

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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એક પુરુષ- બધાની વચ્ચે એકલો By Aloka Patel

એક દિવસ, ઘણી જવાબદારીઓ

સવારે છ વાગ્યાનો એલાર્મ વાગ્યો.

મિહિરે આંખો ખોલી, પણ થોડી ક્ષણો માટે પથારીમાં જ પડ્યો રહ્યો.

બાજુમાં તેની પત્ની નિશા હજુ ઊંઘતી હતી. સામેની દિવાલ પર...

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निषाद पर्व By Prof Shriram V Kale

“प्रभासक्षेत्री यादव वीरांचा संहार झाला. बलराम, श्रीकृष्ण यांचीही अवतार समाप्ती झाली. सिंधुसागर कणाकणाने द्वारकापुरी आपल्या उदरात घेऊ लागला. यादवीतून वाचलेले वृध्द, नारीजन आणि बालक...

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बांसुरी की धुन By prem chand hembram

भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।
देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

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कोकणातले भोरपी By Prof Shriram V Kale

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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लिंग्या गुरवाला लॉटरी लागली By Prof Shriram V Kale

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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