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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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लिंग्या गुरवाला लॉटरी लागली By Prof Shriram V Kale

कालवीतून टेंबवलीत जाणाऱ्या रस्त्यावर भिड्यांच्या घराकडून जरा पुढे गेल्यावर मळे जमीन सुरू व्हायची. तिथे सड्यावरून आलेल्या व्हाळावरची मोरी ओलांडून जरा पुढे गेलं की जवळ जवळ दीडेक फ...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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टूटता हुआ मन By prem chand hembram

(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । By miss k

क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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जया देव तारी By Prof Shriram V Kale

श्रावणात दाजी प्रभू मिराश्यांची वरसल सुरू झाली आणि ईश्वराच्या गाभाऱ्याला कुलूप लागलं. दत्तंभट सालाबाद प्रमाणे सकाळीच पूजा साहित्य घेवून एकादष्णी करायला देवळात गेले. बळाणीवर स...

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અવાવરુ વાવનો અતીત By Ashoksinh jadeja

પ્રકરણ ૧: સીમમાં સંભળાયેલો કાળજું ચીરતો અવાજ**

સૌરાષ્ટ્રની ખમીરવંતી ધરતી પર જાણે કુદરતે સોનાની મહોરો વેરવી હોય એવું એ રળિયામણું ગામડું. ગામની રક્ષા કરવા કુદરતે જાણે ચા...

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क्या सब ठीक है By Narayan Menariya

यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।
हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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लिंग्या गुरवाला लॉटरी लागली By Prof Shriram V Kale

कालवीतून टेंबवलीत जाणाऱ्या रस्त्यावर भिड्यांच्या घराकडून जरा पुढे गेल्यावर मळे जमीन सुरू व्हायची. तिथे सड्यावरून आलेल्या व्हाळावरची मोरी ओलांडून जरा पुढे गेलं की जवळ जवळ दीडेक फ...

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रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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टूटता हुआ मन By prem chand hembram

(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...

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खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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क्या सब ठीक है By Narayan Menariya

यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।
हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...

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