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એક પુરુષ- બધાની વચ્ચે એકલો By Aloka Patel

એક દિવસ, ઘણી જવાબદારીઓ

સવારે છ વાગ્યાનો એલાર્મ વાગ્યો.

મિહિરે આંખો ખોલી, પણ થોડી ક્ષણો માટે પથારીમાં જ પડ્યો રહ્યો.

બાજુમાં તેની પત્ની નિશા હજુ ઊંઘતી હતી. સામેની દિવાલ પર...

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ધર્મ અને લગ્ન : ધંધો કે વ્યવસ્થા ?? By Ved Patel

     કબીર હવે રાજનીતિમાથી સંન્યાસ લઇ પોતાના પરમાત્માની નિત્ય સેવામાં જીવન સમર્પિત કરી દીધું.અને રોજ પોતાના ગુરુના આદેશ મુજબ નામ જપ અને સાધના કરતો.કેટલાય વર્ષોથી આ પોતાના જીવન નો નિ...

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निषाद पर्व By Prof Shriram V Kale

“प्रभासक्षेत्री यादव वीरांचा संहार झाला. बलराम, श्रीकृष्ण यांचीही अवतार समाप्ती झाली. सिंधुसागर कणाकणाने द्वारकापुरी आपल्या उदरात घेऊ लागला. यादवीतून वाचलेले वृध्द, नारीजन आणि बालक...

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बांसुरी की धुन By prem chand hembram

भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।
देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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कोकणातले भोरपी By Prof Shriram V Kale

लावणी सुरू होण्याचा हंगाम आलेला होता. त्यावेळी सकाळ संध्याकाळ दोन वेळा शाळा भरायची. नऊ वाजता लघवीची सुटी झाली नी आम्ही वर्गा बाहेर पडून देवराईकडे दडदडत निघालो. ग्रामपंचायती...

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । By miss k

क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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लिंग्या गुरवाला लॉटरी लागली By Prof Shriram V Kale

कालवीतून टेंबवलीत जाणाऱ्या रस्त्यावर भिड्यांच्या घराकडून जरा पुढे गेल्यावर मळे जमीन सुरू व्हायची. तिथे सड्यावरून आलेल्या व्हाळावरची मोरी ओलांडून जरा पुढे गेलं की जवळ जवळ दीडेक फ...

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એક પુરુષ- બધાની વચ્ચે એકલો By Aloka Patel

એક દિવસ, ઘણી જવાબદારીઓ

સવારે છ વાગ્યાનો એલાર્મ વાગ્યો.

મિહિરે આંખો ખોલી, પણ થોડી ક્ષણો માટે પથારીમાં જ પડ્યો રહ્યો.

બાજુમાં તેની પત્ની નિશા હજુ ઊંઘતી હતી. સામેની દિવાલ પર...

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ધર્મ અને લગ્ન : ધંધો કે વ્યવસ્થા ?? By Ved Patel

     કબીર હવે રાજનીતિમાથી સંન્યાસ લઇ પોતાના પરમાત્માની નિત્ય સેવામાં જીવન સમર્પિત કરી દીધું.અને રોજ પોતાના ગુરુના આદેશ મુજબ નામ જપ અને સાધના કરતો.કેટલાય વર્ષોથી આ પોતાના જીવન નો નિ...

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निषाद पर्व By Prof Shriram V Kale

“प्रभासक्षेत्री यादव वीरांचा संहार झाला. बलराम, श्रीकृष्ण यांचीही अवतार समाप्ती झाली. सिंधुसागर कणाकणाने द्वारकापुरी आपल्या उदरात घेऊ लागला. यादवीतून वाचलेले वृध्द, नारीजन आणि बालक...

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बांसुरी की धुन By prem chand hembram

भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।
देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

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कोकणातले भोरपी By Prof Shriram V Kale

लावणी सुरू होण्याचा हंगाम आलेला होता. त्यावेळी सकाळ संध्याकाळ दोन वेळा शाळा भरायची. नऊ वाजता लघवीची सुटी झाली नी आम्ही वर्गा बाहेर पडून देवराईकडे दडदडत निघालो. ग्रामपंचायती...

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । By miss k

क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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लिंग्या गुरवाला लॉटरी लागली By Prof Shriram V Kale

कालवीतून टेंबवलीत जाणाऱ्या रस्त्यावर भिड्यांच्या घराकडून जरा पुढे गेल्यावर मळे जमीन सुरू व्हायची. तिथे सड्यावरून आलेल्या व्हाळावरची मोरी ओलांडून जरा पुढे गेलं की जवळ जवळ दीडेक फ...

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