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ঐশী মাঠে দৌড়াতে দৌড়াতে হঠাৎ এক ছেলের সাথে জোরে ধাক্কা খেলো। ধপ করে মাটিতে লুটি...
कमरे में एसी चल रहा था, फिर भी संजना की हथेलियां पसीने से तर थीं। फोन को इतनी जो...
પ્રેમના રીસામણાં : પ્રણય અને પ્રિતીને રૂબરૂમાં મળ્યા ઘણો સમય વ્યતીત...
अध्याय 7 ठोस नींव का सिद्धांतसभा भवन से आने के बाद विराज अपने घर के आंगन में आ ग...
अभी नहीं...गाँव के किनारे एक विशाल पीपल का वृक्ष था। उसकी फैली हुई शाखाएँ दूर-दू...
जन्म आईने दिला, पण जपलं साऱ्यांनी...बाबांच्या, दादाच्या, काकांच्या, सर्वांच्याच,...
एपिसोड 22: अंधेरे का विस्तार और नई चुनौती---शहर की हालतपरछाई से लौटने के बाद रोह...
ਅਧਿਆਇ ੧: ਮੀਂਹ ਦੀ ਇੱਕ ਰਾਤ (Chapter 1)ਸੜਕ ਬਿਲਕੁਲ ਸੁੰਨਸਾਨ ਸੀ ਅਤੇ ਰਾਤ ਦੇ ਹਨੇਰੇ ਵਿੱ...
A MOMENTS WEAKNESS When I next saw Ellis it was at the airport. With last times...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 21: राजगढ़ महल का पहला दरवाज़ारात के तीन बज...
अभिशप्त रूह का तांडवदुनिया के नक्शे पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिन्हें कुदरत ने शायद स्वर्ग का द्वार बनाने के लिए रचा था, लेकिन इंसानी फरेब और खून ने उन्हें नर्क का रास्ता बना दिया।...
કરુણા લેખક : રવીન્દ્રનાથ ટાગોર અનુવાદ : રૂષિલ ડોડીયા
प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... .......
कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े झुमके, माथे पे बिंदी, खुले बाल जो कमर तक थे, हाथों में चूड़ियाँ ! वो खुद को देख ही रही थी ज...
वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...
हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर निकलना ही नहीं चाहते। मैं देखता हूँ कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी...
The rain had started at 3:17 a.m. Not outside. Inside her room. Suhani sat cross-legged on the floor of her tiny apartment in Delhi, candles flickering around her. Her pal...
सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था उनका। सब कुछ घर मे था, नौकर चाकर घर जायदाद घोड़े गाड़ियों के अंबार! और प्रभु महादेव जी की अपार कृपा थी कि किस...
આ વાત છે અમદાવાદની એ રાતની જેને આખું અમદાવાદ યાદ કરતું હશે અને ગુસ્સે થતું હશે કાં તો બીતું હશે. 2026 નવું વર્ષ શરૂ થયા ને લગભગ એક મહિનો વીત્યો અને ફેબ્રુઆરીના થોડા દિવસ ગયા હતા...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
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