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अधूरी किताबएपिसोड 73— कबीर का सचकमरे में पसरा अँधेरा इतना गहरा था कि कुछ पल के ल...
(कमरे में घना अंधेरा है। टूटी हुई मोमबत्तियाँ, खून के छींटे और सन्नाटा। अचानक कर...
रात काफी हो चुकी थी।शहर की ज्यादातर सड़कें सुनसान हो गई थीं।राहुल अपने कमरे में...
मामा और मामी से विदा लेकर मैं एक बार फिर माँ के साथ ठाकुर साहब की हवेली की तरफ़...
নীলা আকাশঅধ্যায় ১ — নীলা আকাশৰ তলতআশাপুৰ আছিল এখন সৰু আৰু শান্ত গাঁও। চাৰিওফালে...
अध्याय 8 : एक महीने की बीवी का सौदातहखाने के मुहाने पर रुद्र खड़ा था। सिर्फ एक स...
భారత సైన్యము యొక్క గరుడ గ్రిడ్ సార్వత్రికముగా లైవ్ అయి, ఇడీ ప్రపంచపు డిజిటల్ భద్...
रावण का व्यक्तित्व उसकी शिवभक्ति, तपस्या, विद्वत्ता और शक्ति के बिना पूरी तरह नह...
अनकहा सच___इसके बाद छुट्टियां खत्म हुई और राजू और हितेश वापस शहर की तरफ चले गए।श...
પ્રકરણ ૭૭: નવરાત્રિ પછીનો શાંત વિરામ, પરિસર સફાઈ અને અન્વી પાટીલનું 'પીઅર પ્...
डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की तीन लघुकथाएँ (1) लाइक एंड कॉमेंट्सरात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दू...
महायुद्धाची पहिली ठिणगी आणि 'व्हर्सायचा तह' २८ जून १९१९. फ्रान्सची राजधानी पॅरिसपासून काही अंतरावर असलेला 'व्हर्साय'चा (Versailles) भव्य राजवाडा आज एका ऐतिहासिक...
પ્રસ્તાવના કેટલીક વાર્તાઓની શરૂઆત મુલાકાતથી થતી નથી. કેટલીક વાર્તાઓ તો એ ક્ષણથી શરૂ થાય છે, જ્યારે કોઈ અજાણી વ્યક્તિ ભીડમાં માત્ર એક નજર માટે તમારી સામે આવે... અને પછી આખી જિંદગી મ...
एक नई शुरुआत सुबह के करीब छह बजे थे। छोटे से शहर की गलियों में अभी पूरी तरह चहल-पहल शुरू नहीं हुई थी। कहीं किसी घर के आंगन में झाड़ू लग रही थी, तो कहीं चाय की पहली खुशबू हवा...
दो दोस्त है चुन्नू और मुन्नू। चुन्नू जो है वो एकदम मजाकिया वाले जो होता है ना उस अंदाज में रहता है कि हमेशा उसको बस मजाक ही सूझता रहता है और मजाक ही सूझता रहता है। और वही मुन्नू जो...
वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...
મારી એક સવથી વાલી બેન પણી હતી. સ્કૂલ માં સાથે હતા.અને આખા રૂમ ની ડોન હતી. એમ કે તો બી ચાલે. અને જોય ને છોકરા ભાગે. સાઇદ એટલે મારી પ્રિય બની ગેલી.?એના જેવું કોઈ હતું જ ની અને સાઈદ છ...
हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़ "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने स...
સવારના સાત વાગ્યા હતા. બારીમાંથી સૂરજના કિરણો રૂમમાં ધીમે ધીમે પ્રવેશી રહ્યા હતા. બારી પાસે મૂકેલા છોડના પાંદડા પર રાતના પાણીનાં થોડાં ટીપાં હજુ ચમકી રહ્યા હતા. કાવ્યા રસોડામ...
बचपन की पहली यादें कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें हम चाहकर भी भूल नहीं पाते। वे यादें किसी तस्वीर की तरह हमारे मन में टंगी रहती हैं। वक्त गुजरता जाता है, उम्र बढ़ती जाती है,...
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