मैं आशा झा सखी मध्यप्रदेश से हूँ.जीवन की परिवार रूपी बगिया में दो प्यारे से फूल खिले हैं. जो परवरिश के अंतिम चरण में हैं. एक ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं कि साल दो साल में एक ऊंची उड़ान भर जाएंगे. लेखन मेरा शौक है. अपनी कलम से जीवन के विभिन्न रंगों को उकेरना अच्छा लगता है. जो अपने आसपास देखती हूँ.जो महसूस करती हूँ उन्ही अहसासों को कलमबद्ध करने की कोशिश रहती है.