मैं, संध्या राठौर - इंजीनियर , एक माँ , बेटी , बहन , सखी -इतने सारे किरदार और इन सब के बीच एक और किरदार -लेखिका ..... सपने देखने का शौक - कुछ पुरे हुए भी - कुछ नहीं भी। लेखन में रूचि बचपन से ही थी। उम्र के साथ साथ , ज़िन्दगी के बहुत सारे चेहरे देखे- कुछ अच्छे तो कुछ बुरे… बस जो कभी जुबां कह न पाई , कलम ने कह दिया - और बड़े ही पुरज़ोर ढंग से कहा। कवि ह्रदय था - काँच की तरह था - बड़े सारे दरक पड़े इसमें - फिर भी संजो के रखा। मेरी रचनाये, अपने समाज में इर्द गिर्द घट रही घटनाएँ का वर्णन मात्र है

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