Best book reviews in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

जिहाद (मुंशी प्रेमचंद)
by Satish Thakur
  • 255

''बहुत पुरानी बात है।हिंदुओं का एक काफ़िला अपने धर्म की रक्षा के लिए पश्चिमोत्तर के पर्वत-प्रदेश से भागा चला आ रहा था। मुद्दतों से उस प्रांत में हिंदू और ...

सच, समय और साक्ष्य-शैलेन्द्र शरण
by राजनारायण बोहरे
  • 96

शैलेंद्र शरण का कविता संग्रह "सच" समय और साक्ष्य" शिवना प्रकाशन से छपा हुआ एक शानदार संकलन है , जिसमें कुल 88 कविताएं संकलित हैं ।कविता संकलन की कविताएं ...

अरुण सातले-शब्द गूँज
by राजनारायण बोहरे
  • 207

अरुण सातले की कविताओं का सँग्रह"शब्द गूँज" शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित होकर पिछले दिनों सामने आया है ।इसमें कभी की कुल 77 कविताएं शामिल हैं ।लसंग्रह की अधिकांश कविताएं ...

जादूगर जंकाल और सोनपरी - राज बोहरे
by रामगोपाल तिवारी
  • 315

समीक्षा              कृति- जादूगर जंकाल और सोनपरी             कथाकार राजनारायण बोहरे समीक्षक      रामगोपाल भावुक         कथाकार राजनारायण बोहरे को बचपन से ही किस्से कहानियां सुनने का शौक रहा ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 20 - अंतिम भाग
by राजनारायण बोहरे
  • 372

सुधाकर शुक्ल और ’’देवदूतम’’ -राधारमण बैद्य             विल्हण और पंडितराज जगन्नाथ के बाद म्लान काव्य के मन को पुनः प्रमुदित करने वाले श्री ’’सुधाकर’’ न केवल प्रदेश की विभूति ...

'दहशत' - Book Review
by Ritu Bhanot
  • 666

Book Review of 'Dehshat'  शहर के वीभत्स पर्दे के पीछे के अपराध में जीवन का स्पंदन अंग्रेजी साहित्य में जासूसी और नेगेटिव शेड्स वाले थ्रिलर उपन्यास का चलन हिन्दी ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 19
by राजनारायण बोहरे
  • 294

दतिया अध्यात्म साहित्य और दर्शनीयता के वातायन   अध्यात्म-             दतिया धर्म और अध्यात्म की प्रसिद्ध साधना भूमि रही है। यहां के विभिन्न अंचल सनक सनन्दन की सनातन भूमि ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 18
by राजनारायण बोहरे
  • 291

एक अद्भुत प्रभावी कृति-गुरदयालसिंह का ‘‘परसा’’ ‘ राधारमण वैद्य                  पंजाब के स्वाभिमान, अक्खड़पन, आत्म गौरव और सधुक्कड़ी स्वभाव को उजागर करता यह ‘‘परसा’’ नामक उपन्यास अपने ढंग ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 17
by राजनारायण बोहरे
  • 345

अस्तित्व रक्षण की रचनात्मक गूँज-दर्दपुर राधारमण वैद्य                  उपन्यास केवल साहित्यिक रूप नहीं है, वह जीवन-जगत को देखने की एक विशेष दृष्टि है और मानव-जीवन और समाज का ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 16
by राजनारायण बोहरे
  • 282

आज की कहानी और आलोचक के नोट्स राधारमण वैद्य                  ’’एक शानदार अतीत कुत्ते की मौत मर रहा है, उसी में से फूटता हुआ एक विलक्षण वर्तमान रू-ब-रू ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 15
by राजनारायण बोहरे
  • 414

  स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य-में ऐतिहासिकता के ब्याज से समसामयिकता का चित्रण राधारमण वैद्य                  श्री जय शंकर प्रसाद (1889-1937 ई0) में धकियाकर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति नहीं है, बल्कि ...

घनश्यामदास पाण्डेय और उनका काव्य
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 273

घनश्यामदास पाण्डेय और उनका काव्य वर्तमान शताब्दी के प्रथमार्द्ध में झांसी जिले और उसके आसपास जो काव्य सक्रियता थी उसके पुरुरस्कर्ताओं में कविवर घनश्याम दास पांडेय का प्रमुख स्थान ...

आठवणींचे पक्षी - पुस्तक परीक्षण
by Suraj Kamble
  • 1.5k

आठवणींचे पक्षी - प्र.इ.सोनकांबळे                                        फार दिवसांपूर्वी म्हणजे जवळपास सहा- सात महिन्यांपूर्वी प्रतिलिपी च्याच एका मैत्रिणीने " आठवणींचे पक्षी " या पुस्तकांविषयी काही  माहिती सांगितली होती आणि मला वाचनाची ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 14
by राजनारायण बोहरे
  • 426

                 केशव कृत ’विज्ञान-गीता’: परम्परा-पोषण और युग चित्रण                राधारमण वैद्य                                   केशव की काव्य-साधना कई रूपों में प्रकट हुई। केशव के मुक्तक, जहाँ शास्त्रीय रस-रीति और ...

उर्दू रामायण-नवलसिंह प्रधान
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 567

नवलसिंह प्रधान कृत उर्दू रामायण बुंदेलखंड के अनेक देशी राज्यों में रहे प्रसिद्ध कवि नवल सिंह प्रधान अथवा नवल सिंह कायस्थ ने अनेक ग्रंथों की रचना की है उर्दू ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 13
by राजनारायण बोहरे
  • 516

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का ‘‘आलोक पर्व ’’ राधारमण वैद्य   परम्परा, लोक और शासन समन्वित संस्कृति विवेचन                 आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी बहु प्रतिभा के धनी थे, उनका ...

हजारी प्रसाद द्विवेदी -मूल्यों का पुनर्पाठ
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 387

हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्यः मूल्यों का पुनर्पाठ डॉ० के.बी.एल.पाण्डेय साहित्य को व्यापक मानवतावाद और मूल्यवत्ता से जोड़ने वाले तथा मनुष्य को सभी सरोकारों के केन्द्र में रखने वाले ...

अवध किशोर सक्सेना - अनुभव के पैगाम
by राज बोहरे
  • 429

नेतागिरी हो गई, गुंडों की दुकान: बौधगम्य दोहावली समीक्षक-राजनारायण बोहरे अनुभव के पैगाम नामक दोहा संग्रह में 705 दोहे शामिल है। यह संग्रह दतिया के बुजुर्ग कवि अवध किशोर ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 12
by राजनारायण बोहरे
  • 465

शक्ति के प्रतीक हनुमान: ’हनुमान बाहुक’ पर एक दृष्टि राधारमण वैद्य                मनीषियों का ऐसा मत है कि नाम-रूप से व्यक्त सभी पदार्थो में शक्ति तत्व धर्म, और गुण ...

बुंदेलखंड का सैर साहित्य
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 603

बुंदेलखंड में परिनिष्ठित साहित्य रचना के साथ ही लोक साहित्य की भी समृद्ध परंपरा रही है। साहित्य के यह दोनों रूप यहां समानांतर की स्थिति में ही सहवर्ती नहीं ...

अब सब कुछ - चम्पा वेद
by राज बोहरे
  • 513

चम्पा वेद का काव्य संग्रह ‘अब सब कुछ‘   पुस्तक समीक्षा- अब सब कुछ: ताजगी भरी कविताऐं। राजनारायण बोहरे चम्पा वेद का नाम कुछ बरस  तक अंजाना सा था, ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 11
by राजनारायण बोहरे
  • 342

तुलसी के ’’मानस’’ की पृष्ठभूमि राधारमण वैद्य                कलियुग के बाल्मीकि, मुगल काल का सबसे महान् व्यक्ति, बुद्धदेव के बाद सबसे बड़ा लोकनायक, सर्वतोमुखी ’’प्रतिभा’’ तथा निरन्तर विषपान करके ...

गूंगा गांव - रामगोपाल भावुक
by राज बोहरे
  • 801

  भारत के हर गांव की कथा है गूंगा गांव ।    पुस्तक समीक्षा पुस्तक का नाम उपन्यास गूंगा गांव लेखक रामगोपाल भावुक  प्रकाशक ममता प्रकाशन दिल्ली  मूल्य ₹125 ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 10
by राजनारायण बोहरे
  • 390

केशव का युग और शाक्त मत राधारमण वैद्य                               भारतीय वाङमय में सम्प्रदाय का पोषण और साम्प्रदायिक परम्पराओं का खण्डन-मण्डन खूब हुआ है पर उसे उच्च साहित्य का लेबिल ...

रत्नावली - भावुक
by राज बोहरे
  • 825

यह उपन्यास तुलसीदास जी की पतनी रत्नावली के अल्पज्ञात जीवन और व्यक्तित्व पर केद्रित उपन्यास है। लेखक कल्पना सूझ बुझ के धनी है। साहित्य इतिहास में मौजूद कुछ नाम ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 9
by राजनारायण बोहरे
  • 489

समय और समाज सापेक्ष रीतिकाल राधारमण वैद्य                किसी रचनाकाल के साहित्य-विवेचन में उस काल-खण्ड की दृष्टियों, शैलियों, तत्कालीन-सामाजिक रूचियों, आर्थिक दशा और राजनीतिक घात-प्रतिघात का पता चलता है। ...

कारवां ग़ुलाम रूहों का - अनमोल दुबे
by राजीव तनेजा
  • 564

आज के टेंशन या अवसाद से भरे समय में भी पुरानी बातों को याद कर चेहरा खिल उठता है। अगर किसी फ़िल्म या किताब में हम आज भी कॉलेज ...

अनिल करमेले - बाकी बचे कुछ लोग
by राज बोहरे
  • 660

अनिल करमेले बाकी बचे कुछ लोग अनिल कर मेले का दूसरा कविता संग्रह बाकी बचे कुछ लोग लगभग 20 वर्ष के अंतराल बाद सेतु प्रकाशन से आया है। अनिल ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 8
by राजनारायण बोहरे
  • 537

ऐतिहासिक एवं भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में सनकादि सम्प्रदाय राधारमण वैद्य                                 मध्यप्रदेश, जिसकी सीमा मनुस्मृति के अनुसार विनशन (सरस्वती) के पूर्व प्रयाग से पश्चिम, हिमालय से दक्षिण और विन्ध्याचल ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 7
by राजनारायण बोहरे
  • 528

सनकादि सम्प्रदाय, सनकुआ और सेंवढ़ा                  स्थान-नाम, भाषा की जीवन्त शब्दावली है, जो घिस-मँजकर रूपान्तरित होते हुए शताब्दियों तक अपना मूल्य स्थिर रखते हैं और जन-आस्थाओं के आधार ...