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बुन्देलखण्ड के लोकाख्यानों के सामाजिक अभिप्राय
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय

बुन्देलखण्ड के लोकाख्यानों के सामाजिक अभिप्राय -के.बी.एल. पाण्डेय संस्कृति जीवन के परिष्कार के उद्देश्य से मानवीय रचनाशीलता की वह निष्पत्ति है जिसमें जीवन के व्यापक आयतन में निर्मित मूल्यबोध ...

पंचमहल के साहित्यकारों का रचना संसार
by ramgopal bhavuk

        पंचमहल के साहित्यकारों का रचना संसार                                                                                                                      रामगोपाल भावुक                                                  मो0 09425715707        वर्तमा

मेरी लघुकथाएँ- उमेश मोहन धवन
by राजीव तनेजा
  • 66

यूँ तो परिचय के नाम पर उमेश मोहन धवन जी से मेरा बस इतना परिचय है कि हम दोनों कई सालों से फेसबुक पर एक दूसरे की चुहलबाज़ीयों का ...

राजा मीरेन्द्र सिंह जू देव‘ प्रेमानन्द’
by ramgopal bhavuk
  • 120

    राजा मीरेन्द्र सिंह जू देव‘ प्रेमानन्द’ चर्चित कवि के साथ कथाकार                      रामगोपाल भावुक          राजा मीरेन्द्रसिंह जू देव ‘प्रेमानन्द’- वे इस क्षेत्र की मगरौरा गढ़ी के ...

रामधारीसिंह 'दिनकर' की सांस्कृतिक चेतना
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 96

संस्कृति के चार अध्यायः रामधारीसिंह 'दिनकर' की सांस्कृतिक चेतना डॉ. के0वी०एल० पाण्डेय ओज, राष्ट्रीयता और निर्भीक वैचारिकता के कवि दिनकर अपनी कविता में भावपरकरता के आधार पर जिस सांस्कृतिक ...

स्वतंत्र सक्सैना -सरल नहीं था यह काम
by ramgopal bhavuk
  • 168

सरल नहीं था यह काम जो डॉ. स्वतंत्र ने कर दिखया। समीक्षक-रामगोपाल भावुक सरल नहीं था यह काम जो डॉ. स्वतंत्र सक्सैना ने इस काव्य संकलन के माध्यम से ...

तक़दीर का तोहफ़ा- सुरेन्द्र मोहन पाठक
by राजीव तनेजा
  • 180

यूँ तो अब तक के जीवन में कई तरह की किताबें पढ़ने का मौका मिलता रहा है मगर वो कहते हैं कि वक्त से पहले और किस्मत से ज़्यादा ...

આત્મ સાક્ષાત્કાર
by Mrs. Snehal Rajan Jani
  • 296

પુસ્તક પરિચયલેખિકા:- શ્રીમતી સ્નેહલ રાજન જાનીપુસ્તકનું નામ:- આત્મ સાક્ષાત્કાર              કુલ પાનાં:- 56                          ...

पं0 जवाहर लाल नेहरू का लेखन
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 120

पं0 जवाहर लाल नेहरू का लेखन, ज्ञान और संवेदना का रचनात्मक संयोग डा0 के0बी०एल० पाण्डेय आधुनिक भारत के प्रमुख शिल्पी युग पुरुष पं० जवाहर लाल नेहरू अन्तर्राष्ट्रीय जगत् के ...

अक्टूबर जंक्शन- दिव्य प्रकाश दुबे
by राजीव तनेजा
  • 276

कई बार हमारे द्वारा कुछ काम बिना किसी खास मकसद या उद्देश्य के खामखाह भी कर लिए जाते हैं। आमतौर पर ऐसा हम बिना किसी के प्रभाव या दबाव ...

मिथिलेश कुमारी मिश्रा-उपन्यास के कबीर
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 186

मिथिलेश कुमारी मिश्रा के उपन्यास के कबीर -डॉ के.बी.एल. पाण्डेय हिन्दी के जीवनीपरक उपन्यासों में एक उपविधा यह विकसित हुई है जिसमें कवियों की जीवनी को आधार बनाया गया ...

प्रेम नाम है मेरा..प्रेम चोपड़ा- रकिता नंदा
by राजीव तनेजा
  • 228

"प्रेम नाम है मेरा..प्रेम चोपड़ा।"इस संवाद के ज़हन में आते ही जिस अभिनेता का नाम हमारे दिलोदिमाग में आता है..वह एक घने बालों वाला..हीरो माफ़िक सुन्दर कदकाठी लिए हुए ...

महेश कटारे सुगम की कविता
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 189

महेश कटारे सुगम की कविता : हमारे समय का यथार्थ के0बी0एल0 पाण्डेय कहानी, गीत, नवगीत, गजल और समकालीन कविता के अन्यतम रचनाकार महेश कटारे सुगम की रचनाओं के साथ ...

जहीर कुरैशी का गजल संसार
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 132

जहीर कुरैशी का गजल संसार किस्से नहीं हैं ये किसी विरहन की पीर के। ये शेर हैं अँधेरों से लड़ते जहीर के।चिन्तन ने कोई गीत लिखा या ग़ज़ल कही ...

भली लड़कियाँ.. बुरी लड़कियाँ - अनु सिंह चौधरी
by राजीव तनेजा
  • 192

कहते हैं कि दुनिया गोल है और संयोगों से भरी इस अजब ग़ज़ब दुनिया में अगर एक तरफ़ भले लोग हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ बुरे भी कम नहीं ...

मदन मोहन दानिश-शुभकामनाओं का विनम्र पाठ
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 300

मदन मोहन यानि की कविताः शुभकामनाओं का विनम्र पाठ के.बी.एल.पाण्डेय मैक्सिको के ऑक्टागवियो पाज की एक कविता की पंक्तियाँ है.. हमें तब तक गाना है जब हमारा गीत जड़ों ...

सकारात्मक विचार
by DIPAK CHITNIS
  • 144

    सकारात्मक विचार  सकारात्मक दृढनिश्चयामुळे आपण मानवी जीवनात आनंद अनुभवूशकतो. परंतु ही जादू नाही की आपण एका दिवसात शिकू शकता आणिआपण सकारात्मक होऊ शकता. त्यासाठी तुम्हाला सराव करावा लागेल. आपण बर्‍याच काळापासून अनुसरण करीत असलेल्या विचारसरणीमुळेबदल घडवून

ख़्वाहिशों का खाण्डववन- योगिता यादव
by राजीव तनेजा
  • 204

कहते हैं कि हर चीज़ का कभी ना कभी अंत हो जाता है लेकिन ख्वाहिशों..इच्छाओं का कोई अंत नहीं है। एक इच्छा के पूरी होने से पहले ही दूसरी ...

काली बकसिया- आभा श्रीवास्तव
by राजीव तनेजा
  • 267

ऐसा बहुत कम होता है कि किसी का लिखा आप पहली बार पढ़ें और पहली बार में ही उसके लेखन के इस हद तक मुरीद हो जाएँ कि लव ...

मैत्रैयी पुष्पा अल्मा कबूतरी
by राज बोहरे
  • 333

    मैत्रैयी पुष्पा . अल्मा कबूतरी   पुस्तक समीक्षा- अल्मा कबूतरीरू कुछ सवाल, कुछ बातें पुस्तक - अल्मा कबूतरी लेखिका - मैत्रैयी पुष्पा   हमारे यहा जब किसी ...

बद्री नारायण: शब्दपदीयम्
by राज बोहरे
  • 300

बद्री नारायण: शब्दपदीयम् पुस्तक समीक्षा- ’ बद्री नारायण हिन्दी के एकमात्र ऐसे कवि है जो उलटबांसी नुमा कविता नहीं लिखते । वे जो लिखते है वह आम पाठक भी ...

नौशाद - भूमिका द्विवेदी अश्क
by राजीव तनेजा
  • 387

कई बार हम चाह कर भी अपने जज़्बातों पर काबू नहीं रख पाते और ज़हन में भारी कशमकश और हाँ.. ना से निरंतर जूझते हुए दिल के हाथों मजबूर ...

जितेन्द्र विसारिया-हादसा- राज बोहरे
by राज बोहरे
  • 240

जितेन्द्र विसारिया-हादसा- राज बोहरे    पुस्तक समीक्षा:                  अपने समय से मुठभेड़ करती  राजनारायण बोहरे  की  कहानियाँ                    -जितेन्द्र विसारिया पुस्तक: हादसा (कहानी संग्रह)/लेखक: राजनारायण बोहरे/प्रकाशन: ...

हिंदी साहित्य की पुरस्कार परंपरा
by Suryabala
  • 204

सूर्यबाला हिंदी साहित्य के लेखकों को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है - एक, पुरस्कृत लेखक और दुसरा, अपुरस्कृत लेखक। मोटे तौर पर पुरस्कृत लेखक वे ...

हिन्दी उपन्यास और समाज -ड़ा0 ओमप्रकाश शर्मा
by राज बोहरे
  • 270

हिन्दी उपन्यास और समाज -ड़ा0 ओमप्रकाश शर्मा पुस्तक समीक्षा- पुस्तक-हिन्दी उपन्यास और समाज                                                                             प्रकाशक-अरावली पब्लिकेशन, दिल्ली           लेखक-ओमप्रकाश शर्मा                            

સૌરાષ્ટ્રનો ઇતિહાસ - 4
by ભરતસિંહ ગોહિલ ગાંગડા - ગાંગડગઢ
  • 564

પ્રકરણ ૨ જા નું ચાલુ જયદામનના રાજ્યઅમલની કોઈ પ્રશસ્તિ, શિલાલેખ કે ઉલ્લેખ ઉપલબ્ધ નથી. તેનું મૃત્યુ ક્યારે થયું તે પણ વસ્તુ પ્રાપ્ત નથી, પરંતુ રૂદ્રદામને પહેલાને પુત્ર ઈ. સ. ૧૪૩ ...

ऐसा क्यों होता है समीक्षा-राज बोहरे
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 300

के बी एल पांडे हिंदी के प्रसिद्ध वैचारिक गीत कार  राजनारायण बोहरे  हिंदी के प्रसिद्ध गीत कारों की चर्चा चलने पर बहुत से ऐसे नाम अचर्चित रह जाते हैं ...

पवनकरण का ‘काव्य संग्रह‘ इस तरह मैं
by राज बोहरे
  • 228

पवनकरण का ‘काव्य संग्रह‘ इस तरह मैं   पुस्तक समीक्षा- सहज और उम्दा कविताऐंः इस तरह मैं राजनारायण बोहरे पुस्तक-इस तरह मैं ‘काव्य संग्रह‘                                       कवि-पवनकरण     प्रकाशक-मेघा बुक्स दिल्ली   ...

सूरज प्रकाश की 10 चर्चित कहानियाँ- सूरज प्रकाश
by राजीव तनेजा
  • 264

कई बार किसी का परिपक्व एवं बहुचर्चित लेखन पढ़ने को मिल जाता है कि पढ़ने के बाद आप  निशब्द हो..असमंजस एवं संकोच में पड़ जाते हैं कि इस पर ...

પ્રેરણા નો દરિયો
by Jagruti Vakil
  • 1.2k

         " નવેસરથી ચારિત્ર્ય ઘડતર તરફ" ના ધ્યેય સાથે કાર્ય કરતી ઓએસિસ  સંસ્થાના પ્રકાશનમાં  સાત પુસ્તકો નું વિમોચન, એક સાથે સાત કેન્દ્ર પર,સાત મહાનુભાવોના હસ્તે થયું.. ...