Best book reviews in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

समीक्षा
by Madhu Sosi
  • 26

  उपन्यास लिखना किसी भी प्रकार सरल हैं ,न सहज , मात्र कुछ पृष्ठों में किसी कहानी को बुनना , शब्दों में पिरोना , उसको आदि से अंत तक ...

ધ રોઝેબલ લાઈન - પુસ્તક પરિચય
by Kiran oza
  • 94

          અશ્વિન સાંઘી લિખિત અને ચિરાગ ઠક્કર 'જય' દ્રારા ગુજરાતી ભાવાનુવાદ કરવામાં આવેલી આ વર્લ્ડ ક્લાસ થ્રીલર નવલકથા છે. 'દ વિન્ચીઝ કોડ' વાંચી કે જોઈ ...

પંખીઘર: ‘સામાજિક નિસ્બત ધરાવતી વાર્તાઓ’
by Hardik Prajapati HP
  • 106

અનુ-આધુનિક ગુજરાતી વાર્તા સાહિત્યસ્વરૂપમાં અનેક નવી કલમો પ્રગટી તેમાં શ્રી અમૃત પરમારનું નામ પણ ધ્યાનાકર્ષક ખરું. આધુનિક સાહિત્ય તરફથી અનુ-આધુનિક સાહિત્ય તરફ ગતિ એટલે જનપદ, પ્રાદેશિક, દલિત, પીડિત, દરીબી ...

अमेरिका में 45 दिन - सोनरूपा विशाल
by राजीव तनेजा
  • 72

किसी भी देश, उसकी सभ्यता, उसके रहन सहन..वहाँ के जनजीवन के बारे में जब आप जानना चाहते हैं तो आपके सामने दो ऑप्शन होते हैं। पहला ऑप्शन यह कि ...

प्रेमचंद शैली में राज बोहरे - रूपेंद्र राज
by राज बोहरे
  • 88

                        गद्य साहित्य में कहानियों का इतिहास लगभग सौ वर्ष पुराना है.हिंदी साहित्य में जो स्थान मुंशी प्रेमचंद को मिला वहां तक का सफर अभी तक किसी कहानीकार ...

रत्नावली-रामगोपाल भावुक
by ramgopal bhavuk
  • 184

रत्नावली-रामगोपाल भावुक आदरणीय सडैया जी, सादर प्रणाम।  आपके आदेशानुसार मैंने रत्नावली उपन्यास का अध्ययन किया । इसे मैने पूरी गंभीरता से पढा यद्वपि इस मेंरेप ास पढने क लिए ...

अक्कड़ बक्कड़- सुभाष चन्दर
by राजीव तनेजा
  • 88

आम तौर पर हमारे तथाकथित सभ्य समाज दो तरह की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। एक कामकाजी लोगों की और दूसरी निठल्लों की। हमारे यहाँ कामकाजी होने से ये तात्पर्य ...

अंधेरे कोने@फेसबुक डॉट कॉम
by राजीव तनेजा
  • 90

जिस तरह एक सामाजिक प्राणी होने के नाते हम लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आपस में बातचीत का सहारा लेते हैं। उसी तरह अपनी भावनाओं को ...

‘રેતીનો માણસ’: રણપ્રદેશની વ્યથા-કથાની વાર્તા
by Hardik Prajapati HP
  • 234

ગુજરાતી ટૂંકીવાર્તામાં સમયે-સમયે નૂતન સર્જકોના હાથે નૂતન આવિષ્કારો ઝીલાતા રહ્યા છે. ટૂંકીવાર્તા અનુ-આધુનિક સમયમાં અન્ય સાહિત્યસ્વરૂપોની તુલનાએ વધુ લોકપ્રિય અને લોકભોગ્ય સ્વરૂપ બન્યું છે. ગુજરાતી સાહિત્યમાં અનુ-આધુનિકતાના સમયગાળામાં અનેક ...

डॉर्क हॉर्स
by Amit Singh
  • 244

"नौजवानी के  इंच-इंच जूझ की कहानी है डार्क हॉर्स"************************            पूर्वी उत्तर प्रदेश और लगभग पूरा बिहार का क्षेत्र अपनी विविध प्रकार की समस्याओं के कारण अक्सर सुर्ख़ियों में रहता है| ...

જીવન સંગીત સજાવતા પુસ્તકો.
by Jagruti Vakil
  • 324

 જીવન સંગીતને સજાવતા  પુસ્તકો.                 વિચારોની ઉચ્ચતા,કલમની તાકાત, સાચા શુદ્ધ હૃદયનો ત્રિવેણી સંગમ દ્વારા જીવનતીર્થ ઉજાગર કરતા શ્રી સંજીવભાઈ શાહના ઓએસીસ પ્રકાશનના પુસ્તકો ખરા અર્થમાં સમાજ માટે ઉતમ નજરાણું ...

पुस्तक समीक्षा- दमयन्ती: रामगोपाल भावुक
by ramgopal bhavuk
  • 146

पुस्तक समीक्षा- दमयन्ती: रामगोपाल भावुक                         पंचमहल इलाके की ग्रामीण नायिका दमयन्ती नामक उपन्यास आज हम सबके सामने है, जिससे एक बार तो हम सबको यह भ्रम पैदा होता ...

थोड़ा हँस ले यार- सुभाष चन्दर
by राजीव तनेजा
  • 160

आमतौर पर किसी व्यंग्य को पढ़ते वक्त हमारे ज़हन में उस व्यंग्य से जुड़े पात्रों को लेकर  मन में कभी त्रासद परिस्थितियों की वजह से करुणा तो कभी क्षोभ ...

વિમલ-સંજીવની ઝરમર
by Jagruti Vakil
  • 464

પહાડોમાં લાદ્યો મુજને વિમલ પ્રસાદ... “વિમલ સંજીવની ઝરમર”   (વિમલા ઠકારને કૃતજ્ઞતા અંજલિ) પ્રકાશન: ઓએસીસ પ્રકાશન વડોદરા. પાના:120 મુલ્ય: રૂ.120/-                 નવેસરથી ચારિત્ર્ય ઘડતર તરફ લઈ જતાઓએસીસ પ્રકાશનોના  પુસ્તકોમાં જીવનનો અખૂટ ...

જીવનની ભેટ
by Jagruti Vakil
  • 584

    જીવનની ભેટ લેખક : શ્રી સંજય શાહ પ્રકાશન :ઓએસીસ પ્રકાશન.વડોદરા મૂલ્ય: રૂ. ૪૦૦/-   પાના :૩૦૪            અવનવી, પ્રેરણાદાયી ટચુકડી વાર્તાઓનો સંગ્રહ ‘જીવનની ભેટ’ પુસ્તક  ખરા ...

खिड़कियों से झाँकती आँखें- सुधा ओम ढींगरा
by राजीव तनेजा
  • 168

आमतौर पर जब हम किसी फ़िल्म को देखते हैं तो पाते हैं कि उसमें कुछ सीन तो हर तरह से बढ़िया लिखे एवं शूट किए गए हैं लेकिन कुछ ...

अंजू शर्मा का महत्वाकांक्षी कहानी संग्रह-पुस्तक समीक्षा
by राज बोहरे
  • 292

                                               अंजू शर्मा का दूसरा कहानी संग्रह सुबह ऐसे आती है पुस्तक मेला 2020 में दिल्ली में विमोचन हुआ। भावना प्रकाशन से प्रकाशित इस कहानी संग्रह में लेखिका की ...

बहुत दूर गुलमोहर- शोभा रस्तोगी
by राजीव तनेजा
  • 172

जब कभी भी हम अपने समकालीन कथाकारों के बारे में सोचते हैं तो हमारे ज़हन में बिना किसी दुविधा के एक नाम शोभा रस्तोगी जी का भी आता है ...

शुभ बुद्धीचे उपासक रवींद्रनाथ(पुस्तक परीक्षण)
by Aaryaa Joshi
  • 135

फूल फुलले हीच फुलाची अंतिम कथा फुलाचे साफल्य त्याच्या बहरण्यात आहे फूल विचारते,"फळा, तू कुठे आहेस?" फळ उत्तरते," मी तुझ्या हृदयातच आहे"!!! वाचल्याक्षणी मनावर मोहिनी घालणारे हे शब्द नव्हे ...

स्वप्नपाश- मनीषा कुलश्रेष्ठ
by राजीव तनेजा
  • 1.1k

कई बार हमें पढ़ने के लिए कुछ ऐसा मिल जाता है कि तमाम तरह की आड़ी तिरछी चिंताओं से मुक्त हो, हमारा मन प्रफुल्लित हो कर हल्का सा महसूस ...

सृजन के असली क्षण-पुस्तक समीक्षा
by राज बोहरे
  • 2k

                          सृजन के असली क्षण है यह जब वह श्रमिक  कला के आनंद में भी डूबा है।                                                                                                          राजनारायण बोहरे पुस्तक-ऐसे दिन का इंतज़ार (कविता संग्रह) कव

स्वाभिमान
by राजीव तनेजा
  • 2.2k

कई बार हम लेखकों के आगे कुछ ऐसा घटता है या फिर कोई खबर अथवा कोई विचार हमारे मन मस्तिष्क को इस प्रकार उद्वेलित कर देता है  कि हम ...

બુક રિવ્યુ શાંતનું - સિદ્ધાર્થ છાયા
by SUNIL ANJARIA
  • 1k

શાંતનું - શ્રી સિદ્ધાર્થ છાયા.થોડા વખત પહેલાં આ નવલકથા ઇ બુકનાં સ્વરૂપે પુરી કરી.પહેલાં તો નામ જોઈ ભીષ્મ વાળા શાંતનુ ની ઇતિહાસ કથા હશે એમ માનેલું. આ એક નાગર ...

The Suspense Mail
by Aman Joshi
  • 1.1k

Getting into a new school was really enjoying for Roy. The school was situated on banks of a river that covered with a dense forest. Sam,Mike and Joy were ...

निशां चुनते चुनते - विवेक मिश्र
by राजीव तनेजा
  • 529

कई बार कुछ कहानियाँ आपको इस कदर भीतर तक हिला जाती हैं कि आप अपने लाख चाहने के बाद भी उनकी याद को अपने स्मृतिपटल से ओझल नहीं कर ...

पुस्तक समीक्षा - 11
by Yashvant Kothari
  • 463

पुस्तक समीक्षा काल योर मदर अमेरिकी फ़िल्मकार  बेरीसोनेनफ़ेल्ड की आत्मकथा काल युओर मदर के नाम से हार्पर कोलिन सेइसी मार्च में अमेरिका में छप कर आइ है यह पुस्तक ...

खट्टर काका - हरिमोहन झा
by राजीव तनेजा
  • 458

कहते हैं कि समय से पहले और किस्मत से ज़्यादा कभी कुछ नहीं मिलता। हम कितना भी प्रयास...कितना भी उद्यम कर लें लेकिन होनी...हो कर ही रहती है। ऐसा ...

लक्ष्मी प्रसाद की अमर दास्तान - ट्विंकल खन्ना
by राजीव तनेजा
  • 465

कई बार कुछ किताबें हम खरीद तो लेते हैं मगर हर बार पढ़ने की बारी आने पर उनका वरीयता क्रम बाद में खरीदी गयी पुस्तकों के मामले पिछड़ता जाता ...

मुकम्मल अधूरेपन की एक अतृप्त सच्ची झूठी गाथा।
by Keshav Patel
  • 389

कहने को तो समय के साथ कई कहानियां कही जाती हैं, लेकिन कई कहानियों का अधूरापन समय की तमाम कोशिशों के बाद भी खाली ही रह जाता है। प्रमित ...

संस्थानोपनिषद
by Yashvant Kothari
  • 782

देश का हर नागरिक दिल्लीमुखी है,और दुखी है दुखी आत्माएं सशरीर दिल्ली की ओर कूंच करती रहती हैं राजधानी के सबसे महत्व पूर्ण इलाके में स्थित इस भवन से देश की महत्व ...