Hindi Stories PDF Free Download | Matrubharti

आसपास से गुजरते हुए - 3
by Jayanti Ranganathan
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मेरी आई निशिगन्धा नाइक महाराष्ट्र की सारस्वत ब्राह्मण थीं। पुणे में उने बाबा थियेटर कम्पनी चलाते थे। आई भी थियेटर में काम करती थीं। उनका पूरा परिवार नाटक में ...

फिर भी शेष - 1
by Raj Kamal
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हिमानी अंदर से दरवाज़ा बंद करना भूल गई थी। जैसे ही नशा टूटा, सुखदेव को हिमानी की देह की तलब लगी तो जा घुसा उसके कमरे में। भयभीत हिरनी—सी ...

ROYAL COLLEGE 1992 - 2
by Urvil Gor V.
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पिछले पार्ट में देखा कि केसे कॉलेज के ग्राउंड में फुटबॉल गोलपोस्ट के उपर एक लाश लटकती मिली। ओर अभि रोनाल्ड ओर रॉनी को छोड़ कर सब होटल ग्रीन ...

जिन की मोहब्बत... - 15
by Sayra Khan
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आप लोग अपना ख्याल रखना ज़ीनत से कहा अम्मी को किसी चीज की परेशानी ना हो ये तुम्हारी ज़िम्मेदारी है ।शान घर से निकल गया पूरा दिन ज़ीनत बे ...

हाउस वाइफ नहीं बनूंगी
by r k lal
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“हाउस वाइफ नहीं बनूंगी” आर 0 के 0 लाल               पूनम सुबह उठी तो उसके बुखार चढ़ा हुआ था। पूरा बदन तप रहा था, सर भी फटा ...

अच्छाईयाँ - ३४
by Dr Vishnu Prajapati
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भाग – ३४ दुसरे दिन सूरज और निहाल कोलेज के लिए निकले रास्ते में निहाल कई सारे सवाल करने लगा, ‘सूरज तु रात को कहाँ था ? वो इन्स्पेक्टर ...

क्या यही प्यार है - 3
by Deepak Bundela Moulik
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भाग 3 "क्या यही प्यार हैं "रात के बारह बज चुके थे.... मेरी दास्तां सुनकर  हबलदार की हालत सुमेर की हालत पतली दिखाई एक बाबरी का मसला कम था जो ...

खुशियों की आहट - 7
by Harish Kumar Amit
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अगले दिन शाम के छह बजे के आसपास मोहित क्रिकेट खेलने जाने के लिए तैयार हो ही रहा था कि दरवाज़े की घंटी बजी. कुछ पल बाद दरवाज़ा खोलने ...

मन्नू की वह एक रात - 13
by Pradeep Shrivastava
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यह सोचते-सोचते मुझे हर तरफ से ज़िंदगी में अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह चुड़ैल मुझ पर हंस रही है कि ...

कमसिन - 16
by Seema Saxena
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रवि ने एक हजार रूपये का नोट राशि को देते हुए कहा यह पीका को दे दो ! वो अपने लिऐ कुछ खरीद लेगी ! पीका ने मना किया ...

खास बात
by Mamtora Raxa
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  खासबात                                           आईने में देखकर वह मन ही मन अपने सौंदर्य को देखकर खुश हो रही थी, खुश क्यों न हो टाईट जिन्स और पिंक कलर कलर ...

वैश्या वृतांत - 15
by Yashvant Kothari
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लक्ष्मी बनाम गृहलक्ष्मी यशवन्त कोठारी      दीपावली के दिनों मे गृहलक्ष्मियों का महत्व बहुत ही अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि वे अपने आपको लक्ष्मीजी की डुप्लीकेट मानती हैं ...

भविष्य एक विनाशक अंत हैं
by Sohail Saifi
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प्राचीन काल में वर्तमान की तरह ना तो सुख सुवींधा थी ना ही आज के समान प्रगती और उपलब्धी किन्तु इन सब के बिना भी वो लोग हमारी तुलना ...

एक एहम हस्ती, मैं
by Ritu Chauhan
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बस शौक है लिखने का बचपन से ही, बहुत सरे पन्नो पे दिल की बातें लिखी हैं जिनमे से कई तो किसी को मालूम भी नहीं. हम सब ऐसा ...

दीप शिखा - 3
by S Bhagyam Sharma
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गीता आ गई। पूरा घर एक ही क्षण में प्रसन्नता व खुशियों से भर गया। घर के अन्दर घुसते ही उत्साह से उछलते हुए अम्मा! चिल्लाते हुए भागकर आकर ...

जनवरी की वो रात
by Saroj
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जनवरी माह की हो सर्द रात! म्यूनिसिपल हास्पिटल का जच्चा-बच्चा वार्ड भी मानो ठंड की चादर ओढ़े शांत पड़ा था । यह एक छोटा सा अस्पताल था , जहां ...

गुमशुदा की तलाश - 1
by Ashish Kumar Trivedi
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              गुमशुदा की तलाश                          (1)रंजन चर्च में प्रार्थना कर बाहर निकल रहा ...

पल जो यूँ गुज़रे - 5
by Lajpat Rai Garg
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जिस दिन निर्मल घर वापस आया, दोपहर में सोने के बाद माँ को कहकर जितेन्द्र से मिलने के लिये जाने लगा तो सावित्री ने उसे बताया — ‘मैं बन्टु ...

घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 11
by Ranju Bhatia
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हिमाचल प्रदेश का नाम लेते हैं शिमला, घूमने का ध्यान आ जाता है, पर शिमला के पास ही और भी बहुत सुन्दर जगह है जहाँ दिल्ली से कुछ दूरी ...

रिसता हुआ अतीत
by Rajesh Bhatnagar
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लाजो बेजान कदमों से चलती हुई अपना थका बोझिल शरीर लिए धम्म से कुर्सी पर बैठ गई । उसके ज़हन मं छटपटाती एक ज़ख्मी औरत चीख-चीखकर जैसे उसे धिक्कार ...

दस दरवाज़े - 19
by Subhash Neerav
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हम वैंबले की विक्टोरिया रोड पर खड़े हैं। मैं नक्शा खोलकर ट्रैवलर्ज़ कैम्प दीखने जैसी जगह खोज रहा हूँ। जैकलीन ने ही मुझे बता रखा है कि जिप्सियों को ...

सैलाब - 1
by Lata Tejeswar
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शतायु पलंग से उठ कर बैठा। नींद न आने के कारण वैसे भी परेशान था, ऊपर से गरमी। कुछ देर पहले ही बिजली गुल हो गई थी। आधी रात ...

आमची मुम्बई - 27
by Santosh Srivastav
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स्पा के इस युग में शायद ही किसी को यकीन होगा कि मुम्बई जैसे महानगर में मुग़ल हमाम भी हुआ करते थे बल्कि थोड़ी सी खोजबीन से उनके आज ...

संतर पन्च
by Saadat Hasan Manto
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मैं लाहौर के एक स्टूडियो में मुलाज़िम हुआ जिस का मालिक मेरा बंबई का दोस्त था उस ने मेरा इस्तिक़बाल क्या मैं उस की गाड़ी में स्टूडियो पहुंचा था ...

अनजान रीश्ता - 16
by Heena katariya
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पारुल सुबह उठती है तभी उसे किसी के हंसने की आवाज आती है तो वह अपने रूम का दरवाजा खोल के देखती है की सेम और उसके पापा किसी ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 2
by Neelam Kulshreshtha
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कावेरी को जयपुर अपने घर आये उन्नीस बीस दिन हो चुके हैं लेकिन ऐसा लगता है दिल व घर दोनों खंडहर बन गये हैं। । एक जानलेवा सूनेपन का ...

गलतफहमी
by Dr. Vandana Gupta
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        सर्दी की दोपहर सिया को हमेशा ही अनोखे अहसास कराती है, पहले सिर्फ गुदगुदाती थी, अब कभी कभी उदास कर देती है। आज सुबह से ...

बिन तेरे...! भाग 4 - लास्ट पार्ट
by Dipti Methe
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Continue.........."राजीव..! कहाँ थे तुम..? तुम्हें पता भी हैं कितनी परेशान थी मैं तुम्हारे लिए | कमसे कम एक कॉल तो कर देते | और तुम फोन क्यूँ नहीं उठा ...

माँ:एक गाथा - भाग - 1
by Ajay Amitabh Suman
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ये कविता संसार की सारी माताओं की चरणों में कवि की सादर भेंट है.  इस कविता में एक माँ के आत्मा की यात्रा स्वर्गलोक से ईह्लोक तक विभिन्न चरणों में ...

बरसात के दिन - 11 ( अंतिम भाग )
by Abhishek Hada
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आदित्य दिशा के पास गया। और उससे कहा - ‘‘दिशा। अच्छा हुआ जो तुमने आज मिलने के लिए बुला लिया।’’ ‘‘मुझे तुमसे मिलने में कोई इन्टरेस्ट नही है। वो ...