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हार गया फौजी बेटा - 1
by Pradeep Shrivastava

हार गया फौजी बेटा - प्रदीप श्रीवास्तव भाग १ जब उसका दर्द मुझसे न देखा गया तो मैं उठकर चला गया उसके बेड के पास, जो न्यूरो सर्जरी वार्ड ...

ज़िन्दगी की धूप-छाँव - 7
by Harish Kumar Amit

ज़िन्दगी की धूप-छाँव हरीशं कुमार ’अमित' स्थितियाँ स्टेशन पर दस मिनट रूककर गाड़ी आगे चल चुकी थी, मगर मेरे दिमाग़ में अब भी पन्द्रह-बीस मिनट पहले का घटनाचक्रम घूम ...

राम रचि राखा - 2 - 1
by Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा गोपाल (1) नदी का कछार। किनारे से कुछ ऊपर दो चर्मकर्मी नदी में बहकर आए मरे हुए बैल का चमड़ा निकाल रहे थे। उनके पास ही बैठकर गोपाल ...

केसरिया बालम - 16
by Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 16 बारूद के ढेर पर घर की आर्थिक-मानसिक दुश्वारियों से बेखबर आर्या धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी। दोनों बड़ों के दुनियावी बदलाव से बेखबर ...

डर
by कलम नयन

बहुत बहुत समय पहले की बात है। इतनी पुरानी कि किसी को याद भी नहीं कि ऐसा भी हुआ था। पर मुझे याद है तो मैं तुम्हें बताता हूँ। ...

एक बूँद इश्क - 19
by Chaya Agarwal
  • 408

एक बूँद इश्क (19) एक बार फिर से उन्हीं सर्पीली, घुमावदार और लुभावनी सड़कों पर होती हुई उनकी गाड़ी 'कान्हू रिजार्ट'पर जा लगी। गणेश और शंकर पहले से उनकी ...

अंगूरी अंग
by Ramnarayan Sungariya
  • 200

कहानी--                                अंगूरी अंग                                                       आर.एन. सुनगरिया             ‘’गीता.....गीता.....अरे किधर चली गई। गुडि़या तो यह सो रही है।‘’             ‘’अभी सोई है।‘’ कहते हुये गीता अपनी रंगीन धोती

नमकीन चाय एक मार्मिक प्रेम कथा - अध्याय-5
by Bhupendra Kuldeep
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अध्याय – 5 इधर चंदन दूसरे दिन सुबह फिर से रिया के फोन का इंतजार करता हरा परंतु दिन भर फोन नहीं आया। वह बिना नाश्ता किए ही ऑफिस चला ...

वो पल
by Neerja Pandey
  • 198

आज मैं अपने जीवन के उस मोड़ पे खड़ा हूं जहां से सोचा जा सकता है कि मैंने गलतियां की या नहीं पर मैं गर्व से कह सकता हूं ...

आत्महत्या
by Priya Saini
  • 71

जब तुम अँधेरे से घिरे हुए हो और कहीं से एक रोशनी नज़र आये। तुम उस रोशनी का पीछा करते हुए आगे बढ़ो और पास जाकर पता चले ये ...

सोलहवाँ साल (9)
by ramgopal bhavuk
  • 72

उपन्यास    सोलहवाँ साल    रामगोपाल भावुक       सम्पर्क सूत्र-      कमलेश्वर कॉलोनी (डबरा) भवभूति नगर, जिला ग्वालियर म.प्र. 475110             मो 0 -09425715707Email:-   tiwariramgopal5@gmai.com   ...

आधी दुनिया का पूरा सच - 23
by Dr kavita Tyagi
  • 148

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 23. दुकान पर चाय-भोजन की तलाश में धीरे-धीरे ग्राहकों का आना आरम्भ हो गया था ।दुकान के स्तर के अनुरूप वहाँ पर आने ...

घर की मुर्गी - पार्ट - 7
by AKANKSHA SRIVASTAVA
  • 224

एक रोज फिर उसने व्योम से कहा व्योम में थक जाती हूं, मुझे भी आराम चाहिए। व्योम ने शकुंतला जी की तरह ताने मारते हुए कहा काम ही क्या ...

भवानी प्रसाद मिश्र की काव्य संवेदना
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 34

भवानी प्रसाद मिश्र की काव्य संवेदना ये कोहरे मेरे हैं भवानी प्रसाद मिश्र        ’’गीत फरोश’’ जैसी कालजयी कविता के रचयिता भवानीप्रसाद मिश्र की काव्य संवेदना जीवन के सरोकारों ...

रोबोट वाले गुण्डे (8) (अंत)
by राज बोहरे
  • 92

रोबोट वाले गुण्डे बाल उपन्यास   -राजनारायण बोहरे   8                                       रेडियो पर बातें सुनकर वे लोग सिहर उठे। वार्तालाप से उन्होंने जाना कि भारत के वैज्ञानिको का ...

भदूकड़ा - 57
by vandana A dubey
  • 197

कुंती ने पहले कभी ध्यान नहीं दिया था, लेकिन अब देख रही है कि हर आदमी उससे दूर भाग रहा है। भागता पहले भी होगा, लेकिन कुंती ने तब ...

अनदेखी
by Henna pathan
  • 224

कोरोना वायरस महामारी के देश में प्रवेश करने के बाद से मनोरंजन उद्योग द्वारा कई अपराध थ्रिलर सीरीज जारी की गई हैं।  इनमें से कई क्राइम थ्रिलर सीरीज़ दर्शकों ...

हारा हुआ आदमी (भाग 7)
by किशनलाल शर्मा
  • 62

देवेन जब भी आगरा आता इसी होटल में ठहरता था।इसलिए होटल का स्टाफ उसे जानता था।"आज इस समय पेपर की। क्या ज़रूरत  पड़ गई?"रीता उसे पेेेपर  देते हुए बोली।"कौन ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 12
by Prabodh Kumar Govil
  • 251

( बारह )मेरा जीवन बदल गया था।मैं अकेलेपन की भंवर में फंस कर कई सालों तक शहर दर शहर घूमता रहा था किन्तु अब परिवार के साथ आ जाने ...

दृश्यम फ़िल्म रिव्यू
by Mahendra Sharma
  • 242

विजय सलगांवकर और उनकी फैमिली 2 और 3 अक्टूबर को पणजी में थे। वहां वे पहले स्वामी चिन्मयानंद के सत्संग में गए, फिर होटल में रुके, दूसरे  दिन उन्होंने ...

तानाबाना -10
by Sneh Goswami
  • 65

  lतानाबाना 10   अभी तक आप पढ रहे थे , मंगला अल्पायु में ही विधवा हो गयी । दो बेटियों के साथ जीवन थोङा पटरी पर आया था ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 1
by Santosh Srivastav
  • 68

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (1) ज़िंदगी यूँ हुई बसर तनहा काफिला साथ और सफर तनहा जो घर फूँके आपनो कबीर मेरे जीवन में रचे बसे थे। ...

मेरा दुखद जिवन - जनता की अदालत में न्याय की मांग
by रनजीत कुमार तिवारी
  • 44

                      ।।श्री गणेशाय नमः।।जय श्री कृष्ण,हर हर महादेव आदरणीय पाठकों मेरा सादर प्रणाम मैं रनजीत कुमार तिवारी पिता श्री ...

छूटा हुआ कुछ - 3
by Ramakant Sharma
  • 120

छूटा हुआ कुछ डा. रमाकांत शर्मा 3. इन्हीं व्यस्तताओं में समय निकलता गया और उमा जी के पति के रिटायरमेंट का समय आ गया। उनके रिटायरमेंट के दो साल ...

लच्छो
by Lovelesh Dutt
  • 166

नाम तो लक्ष्मी था उसका, लेकिन ऐसे नाम भाग्यहीनों, गरीबों और अनाथों को शोभा नहीं देते। शायद यही सोचकर पूरा मुहल्ला उसे लक्ष्मी नहीं लच्छो कहता था। उसकी प्रसिद्धि ...

श्रीमद्भगवतगीता महात्त्म्य सहित (अध्याय-१८)
by Durgesh Tiwari
  • 187

जय श्रीकृष्ण भक्तजनों!ईश्वर के प्रिय आप सभी भक्त जनों के लिए श्रीगीताजी के सबसे फलदायी अध्यायय को लेकर उपस्थित हु । श्रीगीताजी के इस अध्यायय के नित्य पाठ करने ...

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर - 4
by Neena Paul
  • 62

कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर 4 साथ वाले घर में इतनी हलचल देख कर जूलियन ने अपने पति को आवाज दी... "डेव जल्दी आओ देखो पड़ोसी क्या करने ...

सेंधा नमक - 4
by Sudha Trivedi
  • 222

सेंधा नमक सुधा त्रिवेदी (4) माताजी के वापस चले जाने के दो-तीन दिन बाद की बात है। सुबह-ही-सुबह माताजी ने फोन करके साहिल को खूब चाभी घुमाई और वह ...

मिले जब हम तुम - 15
by Komal Talati
  • 163

                              भाग - 15                 पाठकगणो से अनुरोध हे... यह पार्ट पढने से पहले मेरी प्रोफ़ाइल मे जाकर यह कहानी के आगे के पार्ट अवश्य पढे...???? . ...

मिस्ट्री ऑफ दा टाउन - 1
by Akshay Kumar
  • 113

S01E01तुम मुझ पर यक़ीन क्यों नहीं करते हो ?हाँ मैं मानती हूं वो मेरे सौतेले भैया थे,पर प्यार तो हम में सगे जितना ही था...माँ बाबा के गुजर जाने ...