Best Hindi Stories read and download PDF for free

प्रेम निबंध - भाग ३
by Anand Tripathi

यह उन दिनों की बात है जब लोग कहा करते हैं कि संभल के चलो वरना जवानी में पैर फिसल जाएंगे। बस कुछ उनको ही फॉलो कर रहा था ...

अनोखा जुर्म - भाग-1
by Kumar Rahman

जासूसी उपन्यास अनोखा जुर्म कुमार रहमान कॉपी राइट एक्ट के तहत जासूसी उपन्यास ‘अनोखा जुर्म’ के सभी सार्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं। किसी भी तरह के उपयोग से ...

में और मेरे अहसास - 36
by Darshita Babubhai Shah

बडा संगदिल मुजे मेरा महेबुल मिला lफ़िर भी किस्मत से नहीं है कोई गिला ll बेइंतिहा बेपनाह चाहत के बावजूद भी lआज क्यूँ नीखरा है हीना का रंग पीला? ...

वर्जिनिटी का भूत उतर गया
by S Sinha

                                       कहानी - वर्जिनिटी का भूत उतर गया    “  सुमन ...

दायरों के पार - 6
by नादान लेखिका

दूसरो के घर मे क्या चल रहा है..? कौन आ रहा है कौन जा रहा है..? किस समय क्या हो रहा है..? इन सबकी जानकारी औरतो को होनी बहुत ...

मायावी सम्राट सूर्यसिंग - 5
by Vishnu Dabhi

           उन दोनों को दफनाने के बाद सोभाग्या वापस लौट आई। सूर्या और अलीखान दोनो वहा पर रुक कर सोभाग्या का इंतजार करते थे।    ...

मुझसे दोस्ती करोगे - भाग 9
by Sarvesh Saxena

मिस्टर मल्होत्रा अपने अतीत से जागे और बोले "मुझे माफ कर दो मुझसे गलती हो गई, प्लीज मुझे माफ कर दो", तो गुड़िया ने हंसते हुए कहा "तुझे माफी ...

मिड डे मील - 1
by Swatigrover

मिड  डे  मील  1  हरिहर  स्कूल  की  दीवार  पर लिखा  पढ़  रहा  है ----'शिक्षा  पर  सबका  अधिकार  हैं' उसने  यह बार-बार पढ़ा  और अपने  दोनों  बेटे  केशव और  मनोहर  ...

मैं ईश्वर हूँ - 8
by Satish Thakur

बिम्ब अब अपने अंतिम प्रश्न काल में पहुँच चूका है जहाँ ईश्वर के साथ हुई बातचीत का अंतिम चरण है, यहाँ कुछ बातें ईश्वर की हैं और कुछ बिम्ब ...

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 9
by ARUANDHATEE GARG मीठी
  • 168

        एहसास प्यार का खूबसूरत सा ( भाग - 9 ) शिवानी ( झल्लाते हुए ) - अरे यार जल्दी करो ना , एक घंटे से ...

मिलन
by रामानुज दरिया
  • 186

आइये न प्लीज , अंदर आ जाइये आख़िर बाहर क्यों खड़े हैं, उसकी आँखें खुली और ओठ सिले हुए थे और नज़र सिर्फ़ उन अधरों पर थे जो बार ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 14
by राजनारायण बोहरे
  • 33

                 केशव कृत ’विज्ञान-गीता’: परम्परा-पोषण और युग चित्रण                राधारमण वैद्य                                   केशव की काव्य-साधना कई रूपों में प्रकट हुई। केशव के मुक्तक, जहाँ शास्त्रीय रस-रीति और ...

मैं तो ओढ चुनरिया - 23
by Sneh Goswami
  • 78

मैं तो ओढ चुनरिया  अध्याय तैंतीस   बचपन बचपन ही होता है । एकदम भोला और मासूम । दुनिया जहान की फिक्रों से बेखबर । सीधा और सच्चा । ...

कोई समाचार नहीं..
by Alok Mishra
  • 111

        कोई समाचार नहीं ...      भोलाराम जी को समाचार देखे ,सुने और पढ़े बगैर चैन ही नहीं मिलता । यही कारण है देश ही नहीं ...

रेज़्यूमे वाली शादी - भाग 2
by Daanu
  • 210

घर पहुंचते ही अवनी ने अपने घरवालों को रिश्ते के लिए मना कर दिया जिस पर माँ बोली, "अच्छा ही है  वो लोग मुझे तो बिल्कुल पसंद नहीं आए ,मैंने ...

आधार - 19 - कार्यावकाश, उन्नति का बाधक है।
by Krishna
  • 60

कार्यावकाश, उन्नति का बाधक है।कार्य में सफलता और जीवन में उन्नति का मूल मंत्र श्रम है। श्रम के बिना सफलता प्राप्ति की कामना पूर्णतया असंभव है। जिंदगी में आगे बढ़ने, ...

आस्था का धाम - काशी बाबा - 1
by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"
  • 447

 आस्था का धाम काशी बाबा  (श्री सिद्धगुरू-काशी बाबा महाराज स्थान)                              ( बेहट-ग्वालियर म.प्र)                                                       वेदराम प्रजापति  ‘मनमस्त                                                            

दो आशिक़ अन्जाने - 10 - अंतिम भाग
by Satyadeep Trivedi
  • 99

खाली बैठा इंसान समय काटने के मक़सद से जो भी काम करता है, उन सभी कामों को दो प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। कान की खूँट निकालना, ...

नई सुबह
by Sunita Agarwal
  • 297

आज रोहन और उनकी पत्नी रागिनी सुबह से ही बहुत उत्साहित थे।हो भी क्यों न आज पूरे 12 बर्ष बाद उनका पोता रितिक जो घर आने वाला था।रागिनी सुबह ...

कैसा ये इश्क़ है.... - (74)
by Apoorva Singh
  • 360

अर्पिता अंदर चली आती है उसके चेहरे पर बैचेनी है एव ह्रदय की धड़कन बढ़ी हुई है।वो शान की ओर देखती है एवं उन्हें मूर्छित देख वो उनके पास ...

अर्पण--भाग (१)
by Saroj Verma
  • 198

रूको...राजहंसिनी!अपने कमरे में जाने से पहले ये बताओ कि कहाँ से आ रही हो?हाँस्टल की वार्डन ने राजहंसिनी से पूछा।। जी,मैं जरा घूमने चली गई थी,राजहंसिनी बोली।। इतने रात ...

दैहिक चाहत - 10
by Ramnarayan Sungariya
  • 393

उपन्‍यास भाग—१० दैहिक चाहत –१०                                                 ...

रिस्की लव - 41
by Ashish Kumar Trivedi
  • 309

   (41)अलीशिया गुस्से में भरी बैठी थी। वह मीरा को किसी भी तरह अपने रास्ते से हटाने के बारे में सोच रही थी। वह मीरा से मिलकर उसे ‌धमकाना ...

मौत का खेल - भाग-4
by Kumar Rahman
  • 426

रक्स शरकी और ठरकीरक्स शर्की अपने दूने टाइम तक चला था। दरअसल उसे दस बजे शुरू हो जाने के बाद साढ़े ग्यारह बजे तक खत्म हो जाना था। उसके ...

गलती बड़ी या अफसोस
by Aj.
  • 342

दिसंबर का महीना था । रात के ग्यारह बज रहे थें । कुहरा अपने साथ सर्द हवाएं भी लाया था और    अब वो सबकुछ को अपनी आगोश में ...

धारा - 7
by Jyoti Prajapati
  • 372

दो दिन के लगातार सफर के बाद देव और धारा ने देहरादूरन की धरती पर कदम रखा..! देहरादूरन, देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी ! बेहद खूबसूरत..! दोनो स्टेशन से बाहर ...

कन्‍हर पद माल - शास्त्रीय रागों पर आधारित पद - 8
by ramgopal bhavuk
  • 141

कन्‍हर पद माल- शास्त्रीय रागों पर आधारित पद 8 सन्‍त प्रवर श्री श्री 1008 श्री कन्‍हर दास जी महाराज  कृत       (शास्त्रीय रागों पर आधारित पद.) हस्‍त‍लिखित पाण्‍डुलिपि सन् ...

नौकरानी की बेटी - 20
by RACHNA ROY
  • 246

शैलेश का भी हल्दी हो गया अब  आगे।। रात को रीतू दुल्हन बन कर मंडप में बैठी थी। अमर, राजू और बाकी जेंस लोगों ने सफ़ारी पहना था।लेडिस साड़ियां पहनी ...

योग और जीवन - योग से प्रारम्भ कर प्रथम पहर
by Archana Singh
  • 114

योग से प्रारम्भ कर प्रथम पहर (कविता) योग को शामिल कर जीवन में स्वस्थ शरीर की कामना कर। जीने की कला छुपी है इसमें, चित प्रसन्न होता है योग कर।  घर ,पाठशाला या चाहे ...

मार खा रोई नहीं - (भाग चौदह)
by Dr Ranjana Jaiswal
  • 108

हर स्कूल के अपने प्लस माईनस होते हैं ।मेरे इस स्कूल के भी रहे।विशाल ,भव्य और खूबसूरत यह स्कूल मेरे अब तक के स्कूलों में सर्वोत्तम था।ज़िन्दगी के सोलह वर्ष ...