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Hindi Stories PDF Free Download | Matrubharti

बाबूजी का चश्मा
by प्रेम गुप्ता 'मानी'
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कहानी                                                 बाबूजी का चश्मा                                                                                                      प्रेम गुप्ता ‘मानी’        सुबह के नौ बजे थे। आलोक ऑफ़िस चले गए थे और आशू कॉलेज...। म

बचपन का दोस्त और मेरा जुर्म
by Akshay Choudhary
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मेरी दोस्त मुझसे नाराज़ थी क्योंकि मेंने उसे कंजूस कि उपाधी  दी थी उसकी बात करु तो अब तक के मेरे  सबसे अच्छी दोस्त।       उसकी बात करु ...

एक्स रे बाबा
by VIKAS BHANTI
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हाथों में ऐ के 56 थामे जंगलों में भटकना ही हमारी ज़िन्दगी थी, हर पल खतरा रहा करता था कि कब किधर से कोई गोली आएगी और हममें से ...

अधूरी हवस - 3
by Balak lakhani
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 राज अपने अतीत के पन्ने खोलता हे मिताली के सामने ओर मिताली को भी बड़ी उत्सुकता होती ही जानने की अखिर ऎसा क्या राज हे राज की लाइफ मे ...

जंग ए जिंदगी - 2
by radha
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जंग ए जिंदगी-2 एक गुप्तचर आया ओर बोला; डाकुरानी को बोलो अर्जेंट गुप्तचर आया है। इस समय मे लोग अग्रेजी बोलने की ओर सिखने का शोख भी रखने लगे ...

अँधेरे में जुगनू - 2
by Kusum Bhatt
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घर से निकलते समय उसने एक बार भी नहीं सोचा। तूफान का मुकाबला करने की ताकत नहीं थी उसमें। पति ने मारपीट की- बच्चों के सामने! ग्लानि हुई! रोज़-रोज़ ...

आई तो आई कहाँ से - 2
by Dr Sudha Gupta
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गर्मी की छुट्टियों में माँ ने पिकनिक पर चलने का कार्यक्रम बनाया l आरुषि बोली - क्यों ना माँ, इस बार मेरे सारे दोस्तों को भी साथ ले चलते ...

फादर्स डे
by Ankita Bhargava
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मुझे रात को जल्दी सोने की आदत है। अपने बेटा बहू की तरह मैं देर रात तक जागना पसंद नहीं करता। शाम का खाना जल्दी खाना और खाने के ...

दहलीज़ के पार - 7
by Dr kavita Tyagi
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दो—तीन महीने तक गरिमा के पिता सुयोग्य वर की तलाश मे भटकते रहे। अन्त मे पर्याप्त भाग—दौड़ करने के उपरान्त ऐसा वर मिल ही गया, जो सुशिक्षित होने के ...