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शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक पुराने जर्जर मकान की बालकनी में बैठे अविनाश के चेहरे...
भाग 1: वह लड़की जिसे कभी किसी से प्यार नहीं हुआ था। ना कोई चाहत ना कोई सपना। उसक...
युद्ध के बीच पलता बचपन, और मन में उगते मौन प्रश्न युद्ध केवल रणभूमि में नहीं लड़...
मोनिका नेक्लेस दैखकर बहोत खुश हो जाती है और कहती है --मोनिका: - वाव , कितना सुंद...
वक़्त का सफ़र कितना अजीब होता है ना —कभी किसी को रोज़ देखना भी कम लगता है,और फिर...
संगमरमर की ठंडक राठौर मेंशन का वह विशालकाय लोहे का द्वार किसी भूखे अजगर के जबड़ो...
सभी रस्म बारी बारी से पुरी की जा रहीं थीं। आस पड़ोस की औरतों का गाना बजाना। ओर ग...
अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या मन ही मन वीर को चाहती रही और अनुराग के स्पर्श से असहज...
अंधेरे की दस्तक और आर्यन का संकल्पदेब ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया। उसने तुरंत प...
[30]‘शैल को गए इतना समय हो गया। अभी तक नहीं लौटा। क्या कभी नहीं लौटेगा?’‘संभव है...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
बारिश की हल्की बूँदें खिड़की के शीशे से टकरा रही थीं। हवा में मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी, जैसे ज़मीन भी अपनी कहानी सुनाने को बेचैन हो। Prakhra ने अपनी किताब बंद की, खिड़की के पास...
आज थाने में बड़ा शोर था। एक मासूम सी,, लगभग 23 साल की एक औरत थी। "औरत तो क्या बोले वो उम्र से " एक लडकी ही थी। बदन पर पुरानी सी साड़ी और रंग साफ़,,,, मगर हाथ एक मजदूर क...
योगेश और संगीता का घर जगमगा रहा था। सुंदर बिजली की लड़ियाँ मानो बार-बार खिलखिला कर हँस रही थीं। आने-जाने वालों का मन मोहने वाली इस घर की सुंदरता में ताज़े फूलों की ख़ुशबू अपनी उपस्...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
आठ वर्ष पूर्व :- दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द, इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क...
आसमान में काले बादल छाए हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे आज इंदर देव रूष्ट हो और अपना सारा कोप निकालना चाहते हो,बरसात आने की आशंका में सभी लोग अपना काम जल्दी-जल्दी समेट कर अपने घर पहुंचन...
एक भयानक खोज दिल्ली की पुरानी लाइब्रेरी, जहां धूल से भरे शेल्फ़ और पन्नों की हल्की महक थी, रिया का पसंदीदा ठिकाना था। 22 साल की रिया, इतिहास की छात्रा थी, और उसे लगता था कि हर पुर...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
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