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एलओसी- लव अपोज़ क्राइम - 14
by jignasha patel

अध्याय -14            मां और पिताजी के बाहर जाते ही नंदिनी दीपक के कमरे में पहुंच गई । उसके पीछे -पीछे रीनी भी  वहां आ ...

मांस्टर फ़ोर्ट
by Farhan Sir

"कब जाना है हमें?" फ़्लोरेंस ने किचन में मैक्रोनी मनाते डेविड से पूछा।"नेक्स्ट वीक। तुम तैयारी करो चलने की। अब हम सिर्फ जाने से एक दिन पहले ही ऑफिस ...

अ स्टोरी ऑफ़ लव - 2
by Kashish

अगले दिन सुबह के 5 बजे ही अबीर उठ जाता है ,हमेशा की तरह । वो जाकर नितिन को उठाता है ,जो बड़ी ही घेरी नींद में सो रहा ...

गजल
by SURENDRA ARORA

गजल " इतने दिनों तक नाराज थे न. " " मतलब तुम जानती थी कि मेरा मूड ठीक नहीं है और तुम्हे लेकर मैं अपसेट हूँ. " " शुरू ...

कैसा ये इश्क़ है.... - (भाग46)
by Apoorva Singh

अब रूठे हुए को कैसे मनाये मुझे तो पता भी नही।नया नया कदम रखा है इस राह पर तो कैसे पता करूँ।अप्पू तुम भी न चिल्ला लेती,नाराजगी जता देती ...

अनमोल तोहफे
by Rama Sharma Manavi
  • 123

   आज जीवन और उसकी पत्नी स्वस्थ होकर हॉस्पिटल से घर आ गए थे।दो दिन बाद ही उनकी मैरिज एनिवर्सरी थी।उसकी शादी को 15 वर्ष हो गए थे।पत्नी  बगल ...

इश्क़ जुनून - 1
by Mehul Pasaya
  • 153

1♡ISHQ☆JUNOON♡ ℹ️नमश्कार दोस्तो हम एक बार और नई कहानी लेकर आगाये है तो चलो प्रारंभ करते है               दोस्तो कहते है ना की अगर प्यार की ताक़त अगर हादसे ...

प्रतिशोध--भाग(८)
by Saroj Verma
  • 132

रात्रि गहराने लगी थीं, चन्द्रमा का प्रकाश भी धूमिल सा था क्योंकि कल अमावस्या है, सत्यकाम ने मणिशंकर को पुकारा___   मित्र! सो गए क्या? किन्तु मणिशंकर ने सत्यकाम ...

वो भारत! है कहाँ मेरा? 7
by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"
  • 84

           वो भारत! है कहाँ मेरा? 7                                       (काव्य संकलन)                             सत्यमेव जयते       समर्पण मानव अवनी के,    चिंतन शील मनीषियों ...

दस्विदानिया - 2
by S Sinha
  • 129

  भाग 2  पिछले अंक में आपने पढ़ा जब विकास अपनी ट्रेनिंग के लिए सोवियत संघ गया वहां उसकी मुलाकात एक बार फिर से तान्या से होती है  ….  ...

बुन्देलखण्ड के लोकाख्यानों के सामाजिक अभिप्राय
by कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 30

बुन्देलखण्ड के लोकाख्यानों के सामाजिक अभिप्राय -के.बी.एल. पाण्डेय संस्कृति जीवन के परिष्कार के उद्देश्य से मानवीय रचनाशीलता की वह निष्पत्ति है जिसमें जीवन के व्यापक आयतन में निर्मित मूल्यबोध ...

सलाखों से झाँकते चेहरे - 8
by Pranava Bharti
  • 123

8 --- इशिता अपने कमरे में आकर गहरी नींद सो गई, उसे बिलकुल पता नहीं चला कि रात में किस समय मि. कामले आए थे | रोज़ की तरह ...

दूसरी औरत.. - 4
by NISHA SHARMA ‘YATHARTH’
  • 183

लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो शायद फिर इस जन्म में मुलाकात हो न हो! बेहद खूबसूरत नगमा है ये! मैं इसे जब भी ...

हमारे घर छापा
by Alok Mishra
  • 75

     हमारे घर छापा     एक दिन अचानक ही मेरे मोहल्ले में हड़कम्प मच गई । पुलिस के एक बड़े से दस्ते का एक बड़ा सा फौज-फाटा ...

पंचमहल के साहित्यकारों का रचना संसार
by ramgopal bhavuk
  • 216

        पंचमहल के साहित्यकारों का रचना संसार                                                                                                                      रामगोपाल भावुक                                                  मो0 09425715707        वर्तमा

अपनों के लिये
by Neelam Kulshreshtha
  • 216

नीलम कुलश्रेष्ठ आज पल पल न जाने कितनी बार शलभ के साथ जिया है, उसके ऑफ़िस होने पर भी । अब कुछ क्षण ही रह गये हैं, उसक वापिस ...

अनैतिक - २१
by suraj sharma
  • 174

      हम हॉस्पिटल से निकले, अब कशिश को मैंने पीछे बिठा दिया था और मै अंकल के पास सामने वाले सीट पर बैठा था, मै बार बार ...

मैं तो ओढ चुनरिया - 7
by Sneh Goswami
  • 105

  मैं तो ओढ चुनरिया अध्याय सात   साढे चार बजे के अंधेरे में बसअड्डे से निकली बस ने इधर फगवाङा पार कर होशियारपुर की सङक पर पैर रखा ...

बिछड़ना
by praveen singh
  • 138

मै सोच रहा हूँ, कुछ गुजरी हुई बातों को                                      जो संग ...

आधार - 3 - समय-प्रबंधन, जीवन की पहली आवश्यकता है।
by Krishna
  • 108

इस संसार में मौसम आते हैं और जाते हैं, मनुष्य आते हैं और जाते हैं, समाज बनता है और बिगड़ता है, पर समय बिना रुके सदा चलता रहता है। ...

चार्ली चैप्लिन - मेरी आत्मकथा - 57
by Suraj Prakash
  • 69

चार्ली चैप्लिन मेरी आत्मकथा अनुवाद सूरज प्रकाश 57 द डिक्टेटर के निर्माण के दौरान मुझे सनक भरे पत्र मिलने शुरू हो गये थे और अब चूंकि फिल्म पूरी हो ...

Love after marriage - 2
by YK.
  • 471

Episode 2 :- जूट /lie?Ayesha फिर Kartik को सिर्फ देखती ही रहती है। जब तक Kartik उससे यह नही पूछता की, beautiful lady क्या आप मुझे बता सकती है ...

पृथ्वी के केंद्र तक का सफर - 41
by Abhilekh Dwivedi
  • 111

चैप्टर 41 भूख। लंबे समय तक भूख लगना, कुछ समय का पागलपन है! मस्तिष्क जब आवश्यक भोजन के बिना अपने काम पर हो तो सबसे शानदार धारणाओं से मन ...

इश्क़ - 8
by ArUu Prajapat
  • 180

वो उसके पीछे पीछे रसोई तक जाता हैमुस्कुरा कर कहता है"भूल गया ना बाबा आज अपनी शादी की सालगिरह है माफ भी कर दो""तुम ना निक्षांत हर बार भूल ...

इंसानियत - एक धर्म - 24
by राज कुमार कांदु
  • 90

थोड़ी देर बाद चरमराहट की आवाज के साथ ही मुनीर के घर का दो पल्लों वाला दरवाजा खुल गया । सामने ही शबनम खड़ी थी । हाथों में पकड़ी ...

मेरी लघुकथाएँ- उमेश मोहन धवन
by राजीव तनेजा
  • 69

यूँ तो परिचय के नाम पर उमेश मोहन धवन जी से मेरा बस इतना परिचय है कि हम दोनों कई सालों से फेसबुक पर एक दूसरे की चुहलबाज़ीयों का ...

तुम्हारे बग़ैर
by Arjun Allahabadi
  • 186

""""""""तुम्हारे बगैर""""""By... Arjun Allahabadiअगर सही कहा जाये तो "अपनों की सही पहचान कठिन परिस्थितियों में ही होती है"। चीन के वुहान शहर से आये कोरोना वायरस ने जो दुनियाँ ...

उस रात का खसारा
by Deepak Bundela AryMoulik
  • 234

 उस रात का खसारा इंसान की पेचीदगी भी क्या गुल खिलाती हैं..ना खुद हद्द में रहती हैं ना औरों को रहना सिखाती हैं...ज़िन्दगी में कभी एक भी लंबे वक़्त का ...

हारा हुआ आदमी(भाग 23)
by किशनलाल शर्मा
  • 192

"यह लो।""थैंक्स।"और दोनों     चाय पीने लगे।। चाय पीने केे बाद निशा पलँग से उठते हुुुए बोली, अपना घर   तो दिखाओ""मेरा नही।अब यह घर तुम्हारा है।""मेरा क्यो?""घर तो तभी ...

क्या कहूं...भाग - ३
by Sonal Singh Suryavanshi
  • 267

स्मृति पुरस्कार लेती है और कुछ बोलने का आग्रह करती है। उसे माइक दिया जाता है। "मेरी उम्र केवल २५ वर्ष है। इतनी कम उम्र में हेड  डिपार्टमेंट बनना ...