Hindi Stories PDF Free Download | Matrubharti

श्रेया-विस्तार
by Sultan Singh
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सूरज दाहिनी ओर से निकल कर माथे पर चढ़ रहा था। लेकिन श्रेया को इसका शायद ही अहसास हो, आज वह पता नही अपने ही विचारो में खोई खोई ...

पथ के दावेदार - 8
by Sarat Chandra Chattopadhyay
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जिन-जिन लोगों ने कमरे में प्रवेश किया वह सभी अच्छी तरह जाने-पहचाने लोग थे। डॉक्टर ने कहा, 'आओ।' लेकिन उनके चेहरे का भाव देखते ही भारती समझ गई, कम-से-कम आज ...

डॉमनिक की वापसी - 8
by Vivek Mishra
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कई दिन गहरे सन्नाटे में बीते थे। पाँच लाख का इन्तज़ाम नहीं होना था सो नहीं हुआ…, बाहर सब कुछ पहले सा ही था पर भीतर कहीं कुछ दरक गया था. ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 11
by Mohd Arshad Khan
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‘‘साहब, यह देखिए, असली सूती क़ालीन। सबसे महँगा। विलायत में बड़ी क़ीमत में बिकता है।’’ बानी कर्तार जी को अपने क़ालीन दिखा रहा था। ‘‘सचमुच, बड़ा सुंदर है!’’ कर्तार जी ...

चुड़ैल वाला मोड़ - 2
by VIKAS BHANTI
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शीशा नीचा होते ही लड़की ने सर भीतर की ओर डाल दिया और कुछ पलों के लिए भीतर मुआयना सा करने लगी | संकेत सहमा सा ड्राईवर सीट पर ...

यादें - 1
by प्रियंका गुप्ता
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यादें...यादें...और यादें...। कितनी अजीब होती हैं न यादें...? कभी ब्लैक एण्ड व्हाइट, तो कभी सतरंगे इंद्रधनुष-सी रंग-बिरंगी...। वही यादें जो कभी तो जीने का संबल बन जाती हैं तो ...

सौ कैंडल पॉवर का बल्ब
by Saadat Hasan Manto
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वो चौक में क़ैसर पार्क के बाहर जहां टांगे खड़े रहते हैं। बिजली के एक खंबे के साथ ख़ामोश खड़ा था और दिल ही दिल में सोच रहा था। ...

प्रकृति मैम - गाकर देखो
by Prabodh Kumar Govil
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1.गाकर देेेे...मेरी नई - नई नौकरी वाला ये शहर भी सुन्दर था और वक़्त भी।ज्वाइन करने के लिए थोड़े से सामान के साथ यहां आया तो मैं पहले दो ...

भूख की आग
by Dinesh Tripathi
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मै तब बारह वर्ष का था |मेरा रोज का नियम था सुबह नास्ते में एक लोटा गाय का ताजा दूध पीना |उस दिन गॉव के पश्चिम दिशा के हनुमान ...

मायामृग - 11
by Pranava Bharti
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उदित अपने स्वभावानुसार नौकरियाँ बदलता रहा था, विवाह के लगभग दो वर्षों के बाद शहर से बाहर भी दो-तीन वर्ष दोनों पति-पत्नी रह आए थे पास ही ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 15
by Rashmi Ravija
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

The Seven Doors - 9
by Sarvesh Saxena
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कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा रशेल और वास्को सातवें दरवाजे यानी शैतानों की दुनिया में पहुंच जाते हैं जहां सारे शैतान मिलकर अपने शैतान देवता को बुलाने ...

ज्ञान और मोह
by Ajay Amitabh Suman
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(1)    ज्ञान और मोह   दो राही चुप चाप चल रहे,ना नर  दोनों एक  समान,एक मोह था लोभ पिपासु ,औ ज्ञान को निज पे मान। कल्प गंग के तट पे दोनों,राही धीरे चले ...

अब लौट चले - 4
by Deepak Bundela Moulik
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अब लौट चले -4तभी बस का हॉर्न बजा तो मेरी तन्द्रता भंग हुई... लोग बस में बैठने लगे थे... और बस धीरे -धीरे रेंगने लगी थी.. मन असमंजस में ...

हा यही प्यार है... - 8
by Alpa
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भाग 8 हा यही प्यार है..  अब  तक आपने जाना, राहुल usa जा रहा है, प्रिया राहुल की collage मे जाके राहुल के बारेमे उनके फ्रेंड्स से जानती है, ओर ...

एक औरत
by Pritpal Kaur
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कमरे में बंद दरवाज़ों के भीतरी पल्लों पर जड़े शीशों से छन कर आती रोशनी बाहर धकलते बादामी रंग के परदे, नीम अँधेरे में सुगबुगाती सी लगती आराम कुर्सी, ...

माँ की पूर्ति
by Sohail Saifi
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सरद बाबू को विद्यालय की ओर से माँ के ऊपर  कुछ पंक्तिया लिखी मिली जिसको उनके बेटे ने लिखा था पुत्र द्वारा लिखी पत्रिका  पड़ पिता के भीतर संवेदना ...

पथ के दावेदार - 7
by Sarat Chandra Chattopadhyay
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जलमार्ग से आने वाले शत्रु के जलयानों को रोकने के लिए नगर के अंतिम छोर पर नदी के किनारे मिट्टी का एक छोटा-सा किला है। उसमें संतरी अधिक नहीं ...

आखर चौरासी - 7
by Kamal
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उस सुबह भी सूरज आम दिनों-सा निकला था। चिड़ियों ने हर रोज की भाँति ही चहचहाते हुए अपने दिन की शुरुआत की थी। रोजाना की तरह ही लोग अपने-अपने ...

ROYAL COLLEGE 1992 - 5
by Urvil V. Gor
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पिछले पार्ट में देखा कि रोनाल्ड ओर रॉनी फाइल ले कर आए।अब रॉनी ने फाइल ओपन करी । फाइल में लिखा था SR.NO :-      56 NAME :-       DIVYA CHANDRAKANT ...

फिर भी शेष - 9
by Raj Kamal
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रितुपर्णा को पहले चरण में सफलता बहुत आसानी से मिल गई। यह सफलता शिक्षा—परीक्षा से संबंधित नहीं थी। पढ़ाई में उसकी रुचि तो पहले ही नहीं थी। स्कूल के ...

शायरी
by pradeep Tripathi
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1.परिंदों के जो पऱ आये तो निकल पड़े जिंदगी का एहतराम करने को। उन्हें क्या मालूम था शिकारी घात लगा के बैठे हैं कत्ले आम करने को।।2माँ ज़िन्दगी का ...

आसपास से गुजरते हुए - 11
by Jayanti Ranganathan
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सुबह-सुबह अप्पा ने जगा दिया, ‘अनु, उठ! वॉक पर चलते हैं!’ सुबह के छह बज रहे थे। मैं ‘ना नू’ करती हुई उठी। अप्पा ने गर्म झागदार कॉफी का गिलास ...

वैश्या वृतांत - 19
by Yashvant Kothari
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कहानी डबल बेड की        यशवन्त कोठारी   वैसे मेरी शादी काफी वर्षो पूर्व हो गई थी। उन दिनों  डबल बेड का रौब दाब राज-महाराजाओं  तक ही था। ...

मन्नू की वह एक रात - 25
by Pradeep Shrivastava
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'‘मैं ऐसी लड़की से ही शादी कर सकता हूं जो मेरे सामने जब आए तो मुझे ऐसा अहसास हो कि सामने तुम खड़ी हो। क्योंकि तुम्हारी जैसी जो होगी ...

खौफ - 9
by SABIRKHAN
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दूर-दूर से समीर को ऐसा लगा जैसे ओस की बुंदे उसके चेहरे पर गिर रही है आंखें खुल नहीं रही थी और पलकों पर भारी वजन था वह करवट ...

MURDER MYSTERY - 1
by Vismay
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" लगातार बज रहीं टेलीफोन की घंटी की वजह से हवलदार मातरे की नींद खुल गई."                           ...

कमसिन - 28
by Seema Saxena
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राशी के पेपर हो चुके थे वह अब ज्यादातर समय उसके साथ ही बिताती ! घर में काकी माँ, माँ, राजीव और पापा जी भी बहुत ध्यान रखने लगे ...

जिन की मोहब्बत... - 19
by Sayra Khan
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ओर तुझे पता है तेरी सहेली सबा के होने वाले पति का आज तक कुछ पता नहीं है । लेकिन उस गाड़ी वाला जो सबा के पति को लेकर ...

दिल की दुआ
by परमार प्रकाश
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राहफकीर जुनूनी मिजाज में जंगल के भीतर इधर से उधर भटक रहा था| कठिनाइयों से उलझी इस जिंदगी में उसे एक ही खास और आदर्श नसीहत मिली थी,वह थी ...