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अंधेरा कोना By Rahul Narmade ¬ चमकार ¬

पिछले डेढ़ साल से मैंने अनंतगढ़ गांव से दूर आलोक और रतिबेन पाटिल कॉलेज ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज से बायो-मेडिकल साइंस में एमएससी कर रहा था, मैं सेमेस्टर 4 मे बायोसेंसर विषय पर डेझर्टेश...

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समता के पथिक: भीमराव By mood Writer

गाँव के बाहर, महू छावनी के शांत किनारे पर एक छोटा सा घर था। 14 अप्रैल 1891 की भोर, जब सूरज की पहली किरणें पहाड़ियों के पार से झांक रही थीं, उस घर में रोने की मधुर आवाज़ गूँज उठी। य...

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ಗುರುತಿನ ನೆರಳು By Sandeep joshi

ಪಶ್ಚಿಮ ಘಟ್ಟಗಳ ದಟ್ಟ ಕಾಡಿನಲ್ಲಿ ಆ ರಾತ್ರಿ ಸಂಪೂರ್ಣ ಮೌನ ಆವರಿಸಿತ್ತು. ಹತ್ತಾರು ಮರಗಳ ಎಲೆಗಳು ಗಾಳಿಯಲ್ಲಾಡುತ್ತಿದ್ದ ಸದ್ದು ಮಾತ್ರ ಕೇಳಿಸುತ್ತಿತ್ತು. ಈ ಮೌನವನ್ನು ಛೇದಿಸಿದ್ದು ಒಬ್ಬ ಯುವಕನ ಒರಟಾದ ಉಸಿರಾಟದ ಸದ್...

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অসম্পূর্ণ চিঠি By MOU DUTTA

কলকাতার লোকাল ট্রেন সবসময়ই ভিড়ভাট্টায় ভর্তি। দুপুরের ট্রেনটা তুলনায় একটু ফাঁকা হলেও জানালার পাশে বসার সৌভাগ্য সবার হয় না। সেদিন ঈশা জানলার ধারে বসে বই পড়ছিল। তার চারপাশের কোল...

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अनाथ का दिल - एक प्रेंम कहानी By H.k Bhardwaj

“वादल बेटा, आज फिर खिड़की से सूरज को देख रहे हो?”मथुरा के अनाथालय की अधीक्षिका सरला मैडम ने हल्के डपट भरे स्वर में पूछा। उनकी उम्र पचपन के आसपास रही होगी। चेहरे पर कठोरता की रेखाएँ...

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तेरे मेरे दरमियाँ By Neetu Suthar

स्थान: उदयपुर, राजस्थान
समय: जुलाई की शुरुआत — हल्की बारिश का मौसम

सुबह के सात बजे थे। उदयपुर की संकरी गलियों में हल्की बारिश की बूंदें मिट्टी से मिलकर एक मोहक सी खुशबू फैला रह...

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वो जो मेरा था By Neetu Suthar

शहर की गलियों में उस दिन बरसात कुछ ज़्यादा ही बेक़रार थी...
जैसे बादलों के पास कहने को बहुत कुछ हो और वो किसी से छुप-छुप कर रो रहे हों।

काव्या, एक छतरी के बिना, बूँदों से भीगती...

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काळाचा कैदी By Dr Phynicks

पुण्याच्या बाहेर, मुळशीच्या डोंगररांगांमध्ये एक शांत दरी होती. हिरवाईने नटलेली, पावसाळ्यात धुक्याच्या पडद्याने लपलेली, आणि उन्हाळ्यात जणू संपूर्ण जगापासून वेगळीच. त्या दरीच्या मध्य...

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The Demon Catcher By Mister Rakesh

धरती पर लाखों साल बीतने के बाद छोटे से छोटे और बड़े से बड़े जानवर विशालकाय होने लगे। कुछ शांत स्वभाव के थे तो कुछ इतने खतरनाक कि उनकी झलक मात्र से लोगों की रूह कांप जाती थी। समय के...

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अधूरी घंटी By Arkan

शहर से दूर, पुराने गाँव के कोने में एक हवेली थी, जिसे लोग “काली हवेली” कहते थे। वहाँ कभी किसी ज़मींदार का परिवार रहता था, लेकिन दशकों से वह वीरान थी। टूटी खिड़कियाँ, दरकती दीवारें...

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अंधेरा कोना By Rahul Narmade ¬ चमकार ¬

पिछले डेढ़ साल से मैंने अनंतगढ़ गांव से दूर आलोक और रतिबेन पाटिल कॉलेज ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज से बायो-मेडिकल साइंस में एमएससी कर रहा था, मैं सेमेस्टर 4 मे बायोसेंसर विषय पर डेझर्टेश...

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समता के पथिक: भीमराव By mood Writer

गाँव के बाहर, महू छावनी के शांत किनारे पर एक छोटा सा घर था। 14 अप्रैल 1891 की भोर, जब सूरज की पहली किरणें पहाड़ियों के पार से झांक रही थीं, उस घर में रोने की मधुर आवाज़ गूँज उठी। य...

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ಗುರುತಿನ ನೆರಳು By Sandeep joshi

ಪಶ್ಚಿಮ ಘಟ್ಟಗಳ ದಟ್ಟ ಕಾಡಿನಲ್ಲಿ ಆ ರಾತ್ರಿ ಸಂಪೂರ್ಣ ಮೌನ ಆವರಿಸಿತ್ತು. ಹತ್ತಾರು ಮರಗಳ ಎಲೆಗಳು ಗಾಳಿಯಲ್ಲಾಡುತ್ತಿದ್ದ ಸದ್ದು ಮಾತ್ರ ಕೇಳಿಸುತ್ತಿತ್ತು. ಈ ಮೌನವನ್ನು ಛೇದಿಸಿದ್ದು ಒಬ್ಬ ಯುವಕನ ಒರಟಾದ ಉಸಿರಾಟದ ಸದ್...

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অসম্পূর্ণ চিঠি By MOU DUTTA

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“वादल बेटा, आज फिर खिड़की से सूरज को देख रहे हो?”मथुरा के अनाथालय की अधीक्षिका सरला मैडम ने हल्के डपट भरे स्वर में पूछा। उनकी उम्र पचपन के आसपास रही होगी। चेहरे पर कठोरता की रेखाएँ...

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सुबह के सात बजे थे। उदयपुर की संकरी गलियों में हल्की बारिश की बूंदें मिट्टी से मिलकर एक मोहक सी खुशबू फैला रह...

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वो जो मेरा था By Neetu Suthar

शहर की गलियों में उस दिन बरसात कुछ ज़्यादा ही बेक़रार थी...
जैसे बादलों के पास कहने को बहुत कुछ हो और वो किसी से छुप-छुप कर रो रहे हों।

काव्या, एक छतरी के बिना, बूँदों से भीगती...

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काळाचा कैदी By Dr Phynicks

पुण्याच्या बाहेर, मुळशीच्या डोंगररांगांमध्ये एक शांत दरी होती. हिरवाईने नटलेली, पावसाळ्यात धुक्याच्या पडद्याने लपलेली, आणि उन्हाळ्यात जणू संपूर्ण जगापासून वेगळीच. त्या दरीच्या मध्य...

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The Demon Catcher By Mister Rakesh

धरती पर लाखों साल बीतने के बाद छोटे से छोटे और बड़े से बड़े जानवर विशालकाय होने लगे। कुछ शांत स्वभाव के थे तो कुछ इतने खतरनाक कि उनकी झलक मात्र से लोगों की रूह कांप जाती थी। समय के...

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अधूरी घंटी By Arkan

शहर से दूर, पुराने गाँव के कोने में एक हवेली थी, जिसे लोग “काली हवेली” कहते थे। वहाँ कभी किसी ज़मींदार का परिवार रहता था, लेकिन दशकों से वह वीरान थी। टूटी खिड़कियाँ, दरकती दीवारें...

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