अमृत वाणी - संत वाणी - 2

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संत रहीम दास जी का यह दोहा समाज में ऊंच-नीच के भेद को मिटाकर हर व्यक्ति का सम्मान करना सिखाता है। “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि।।”अक्सर लोग इस दोहे को पढ़कर सोचते हैं कि क्या बड़े लोगों या बड़ी चीज़ों का कोई महत्व नहीं है? लेकिन रहीम जी यहाँ बड़े लोगों का अपमान नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे हमें हर छोटी-से-छोटी चीज़ और छोटे व्यक्ति की अनूठी कीमत (Value) समझा रहे हैं।गहरे अर्थ की व्याख्या :इस संसार में जब किसी व्यक्ति को बड़ा पद, पैसा या प्रभाव मिल जाता है, तो