अमृत वाणी by Nitya Oswal in Hindi Novels
“माटी कहै कुम्हार सों, तू क्या रौंदे मोहि।इक दिन ऐसा होयगा, मैं रौंदूगी तोहि।।”संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत स...