Bayaan - Part 18

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Part 18  डायरी का आखिरी पन्ना...मेरे हाथ अब काँपने लगे थे। पता नहीं क्यों... ऐसा लग रहा था कि मैं सिर्फ़ किसी की कहानी नहीं पढ़ रही, बल्कि किसी की पूरी ज़िंदगी जी रही हूँ।मैंने आखिरी पन्ना खोला..."उस दिन के बाद..."एक दिन अभिन्नव मेरे घर आए।ज़्यादा देर तो नहीं रुक पाए, लेकिन जितनी देर रहे... मेरी पूरी दुनिया वहीं थम गई थी।हमने बहुत सारी बातें कीं।हँसे...एक-दूसरे को देखा...भविष्य के सपने देखे...और कब समय निकल गया, पता ही नहीं चला।लेकिन जब उनके जाने का समय आया...न जाने क्यों मेरा दिल घबराने लगा।ऐसा लग रहा था जैसे कोई मेरी सबसे प्यारी चीज़ मुझसे