अमृत वाणी - संत वाणी - 23

“जे जे भेटे भूत, ते ते मानिजे भगवंत।हा भक्तीचा पैं गा गाभा, जाणिजे सर्वथा॥” — संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानेश्वरी)( अनुवाद: “इस चराचर संसार में तुम्हें जो भी जीव या प्राणिमात्र मिले, उसे साक्षात ईश्वर का ही रूप मानो। संत ज्ञानेश्वर जी कहते हैं कि संसार के हर छोटे-बड़े जीव के प्रति मन में आदर और सम्मान का भाव रखना ही सच्ची भक्ति का असली मर्म (सार) है।”)संत ज्ञानेश्वर जी के इस क्रांतिकारी विचार को अक्सर लोग बहुत सतही ढंग से समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि ज्ञानेश्वर जी हमें संसार के व्यावहारिक नियम छोड़कर हर अच्छे-बुरे इंसान के सामने बस