मंदिर में तुम - 10

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कुछ दिनों बाद…सब कुछ शांत हो चुका था…खतरा खत्म…डर खत्म…अब…सिर्फ एक मंज़िल थी इंडिया… ️️ फ्लाइट में…सुनामी खिड़की के पास बैठी थी…बादलों को देखते हुए…उसके चेहरे पर सुकून था…उसने धीरे से कृतिक का हाथ पकड़ लिया और बोली—अब सब ठीक हो जाएगा ना…?कृतिक ने उसकी तरफ देखा…वो बोला - जब तक मैं हूँ…कुछ गलत नहीं होगा… ️सुनामी मुस्कुरा दी…इंडिया… नोएडा...वही शहर…वही सड़कें…वही मंदिर… जहाँ से सब शुरू हुआ था…दोनों सबसे पहले वहीं गए…राधा-कृष्ण के मंदिर में…दोनों साथ खड़े थे…आँखें बंद…जैसे पहली बार…घंटी बजी… और…फूल फिर से गिरा… दोनों ने एक साथ आँखें खोलीं…और इस बार…कोई झिझक नहीं थी…बस…प्यार था…