अधूरापन - 7

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अध्याय-७मानसकुमार को अमृताभाभी की एक-एक बात दिल को छू गई। भाभी तो चली गईं, लेकिन उनकी बातें मानसकुमार के मन में बार-बार गूंज ही रही थीं। उनके मन में अमृताभाभी के वे शब्द बार-बार प्रतिध्वनित हो रहे थे। वे अमृता की बातों पर मंथन करने लगे और उस आत्ममंथन के परिणामस्वरूप आज उन्होंने ऑफिस में भी छुट्टी के लिए ईमेल भेज दिया। उनका मन कहीं लग ही नहीं रहा था। मन में एक अलग ही प्रकार की पीड़ा महसूस हो रही थी। कभी वे कमरे में टहलते, तो कभी मोबाइल चलाते, लेकिन मन को शांति नहीं मिल रही थी। उनके