अध्याय - १४शोभाबहन अपने पति की आंखों का गुस्सा देखकर पूरी तरह सन्न रह गईं। इतने सालों में रमेशभाई ने कभी गुस्से में पलटकर जवाब तक नहीं दिया था, और आज सारे सालों का हिसाब रमेशभाई के शोभाबहन के गाल पर पड़े एक थप्पड़ ने चुकता कर दिया। यह जरूरी नहीं कि हर बात शांति से कहने पर सुनने वाला समझ ही जाए, लेकिन जब सही समय पर कड़ा विरोध होता है, तो व्यक्ति दोबारा अनाप-शनाप बोलने से पहले सोचता जरूर है।राजेश ने अपनी चिंता जताते हुए कहा, "अमृता को गर्भाशय के मुख का कैंसर है, तुरंत ऑपरेशन कराना पड़ेगा