अधूरापन - 25

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अध्याय-२५शोभाबहन की गैरमौजूदगी से परिवार धीरे-धीरे ढल रहा था। हाँ, उनकी कमी ज़रूर महसूस होती थी, लेकिन हनी और भव्या की चहल-पहल से घर खुशियों से गूँजता रहता था। सभी के मन में एक-दूसरे के लिए अटूट प्रेम और अपार स्नेह उमड़ता रहता था। घर का माहौल बहुत आनंदित था। दिन कैसे बीत रहे थे, कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। छुट्टियों के दिनों में जब गायत्री बहन और मानस कुमार भी सोनाली को लेकर आते, तब विनय और नीला को भी राजेश भाई ज़रूर बुलाते थे। परिवार इतना करीब आ गया था कि बाहर से जो भी देखता,