अध्याय-२९अमृता तीनों बेटियों के चेहरों की खुशी देखकर अतीत में खो गई थी। जब उसकी अपनी सगाई हुई थी, तब वह भी इतनी ही खुश थी। एक बेटी जब ससुराल विदा की जाती है, तो वह अपना संपूर्ण अस्तित्व अपने मायके में ही छोड़कर आती है। ससुराल में अपने जीवनसाथी और उसके परिवार के लिए स्नेह के अलावा वह भला किस महत्वाकांक्षा से आती है? परंतु ससुराल वालों की नज़र में वह स्नेह की पक्षी ही नहीं, बल्कि पूरे घर की केवल ज़िम्मेदारियों का ठिकाना बनकर रह जाती है। कभी किसी ससुराल वाले को ऐसा क्यों नहीं महसूस होता कि