अध्याय-३०अमृता सबके लिए मिल्कशेक्स बनाने गई। उसके पीछे-पीछे तुरंत हनी भी गई और बोली, "मम्मी! मुझे भी आपकी तरह ही सब कुछ सीख लेना है। आज मैं बनाऊँगी, आप जैसा-जैसा कहेंगी, मैं वैसा करती जाऊँगी।" अमृता तो दो पल हनी को देखती ही रह गई और सोच में पड़ गई—कितना निष्कपट होता है जीवनसाथी के प्रति प्रेम,सचमुच कुछ तो होता ही है उस जन्मों-जन्म के लेन-देन का प्रेम!हनी फिर बोली, "मम्मी! कैसे बनाऊँ, बताइए न!" और जैसा अमृता ने बताया, हनी वैसे ही बनाती गई। अमृता उसे देखकर बेहद खुश हो रही थी।रमेशभाई ने भव्या और हनी के साथ-साथ सोनाली