मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत।

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"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गहरा था कि आरव को अपनी ही धमनियों में दौड़ते खून की आवाज़ सुनाई दे रही थी। घड़ी की सुइयां एक-दूसरे पर रेंग रही थीं। कमरे की खिड़की से आती चाँदनी दीवारों पर लंबी और टेढ़ी-मेढ़ी परछाइयाँ उकेर रही थी, जो किसी के हाथ की उंगलियों जैसी लग रही थीं।

Full Novel

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 1

एपिसोड 1 — "रात 3:12 बजे की दस्तक"— इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तकरात का सन्नाटा इतना गहरा था कि आरव को अपनी ही धमनियों में दौड़ते खून की आवाज़ सुनाई दे रही थी। घड़ी की सुइयां एक-दूसरे पर रेंग रही थीं। कमरे की खिड़की से आती चाँदनी दीवारों पर लंबी और टेढ़ी-मेढ़ी परछाइयाँ उकेर रही थी, जो किसी के हाथ की उंगलियों जैसी लग रही थीं।तभी— ठक... ठक... ठक...आरव का शरीर पत्थर का हो गया। आवाज़ दरवाज़े से नहीं, बल्कि ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 2

आईने के पीछेपुरानी हवेलियों की अपनी एक ज़ुबान होती है। वे हवाओं के झोंकों में फुसफुसाती हैं, उनकी दीवारों दरारें गुज़रे हुए वक्त की कहानियाँ सुनाती हैं, और उनके अंधेरे कोनों में यादें धूल बनकर जम जाती हैं। आर्यन के लिए उसका पैतृक घर किसी भूलभुलैया से कम नहीं था। शहर की आपाधापी से दूर, पहाड़ों की गोद में बसा यह घर उसके दादा-दादी की आखिरी निशानी था।आर्यन एक लेखक था, और लेखक की सबसे बड़ी कमजोरी (या ताकत) उसकी कल्पनाशीलता होती है। वह यहाँ अपनी अगली किताब पूरी करने आया था। लेकिन उसे क्या पता था कि वह ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 3

देवगढ़ का आखिरी हॉल्टसमीर को पुरानी जगहों और अनसुलझे रहस्यों का शौक था। वह एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर था, मानना था कि 'भूत' जैसी कोई चीज नहीं होती, बस हमारे दिमाग का वहम और रोशनी का खेल होता है। इसी वहम को चुनौती देने के लिए वह पहुँचा 'देवगढ़'—एक छोटा सा रेलवे स्टेशन जो करीब 40 सालों से बंद पड़ा था।इलाके के लोग कहते थे कि रात के 12 बजकर 12 मिनट पर वहाँ एक 'काली ट्रेन' रुकती है, जो किसी समय सारिणी (Timetable) में नहीं है। समीर ने अपना कैमरा, ट्राइपॉड और टॉर्च उठाई और निकल पड़ा उस ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 4

साये का बसेरा: 'अंधेरपुर' की अभिशप्त हवेली: एक अनचाही यात्राकबीर एक खोजी पत्रकार था, जिसे रहस्यों को सुलझाने और घटनाओं के पीछे के सच को बेनकाब करने में महारत हासिल थी। वह भूतों पर विश्वास नहीं करता था; उसके लिए 'डर' सिर्फ एक रासायनिक प्रतिक्रिया थी जो दिमाग में होती थी। इसी विश्वास के साथ वह बिहार और नेपाल की सीमा पर स्थित एक छोटे से गांव 'अंधेरपुर' पहुँचा।इस गांव का नाम नक्शे पर तो था, लेकिन वहाँ जाने वाले रास्ते सालों से बंद पड़े थे। गांव के बारे में मशहूर था कि 19वीं सदी में यहाँ के जमींदार ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 5

भुतहा पेड़ की कहानीगाँवों में अक्सर कहा जाता है कि कुछ पेड़ सिर्फ छाया नहीं देते, बल्कि अपने भीतर भी छुपाए रहते हैं। बरगद, पीपल या पुराने नीम के पेड़ को लोग रात में देखने से डरते हैं। यह कहानी भी ऐसे ही एक पेड़ की है, जो देखने में साधारण था, लेकिन उसके पास जाने वाले लोग कभी पहले जैसे नहीं लौटे।---: गाँव और पेड़बरुन गाँव के बाहर एक पुराना बरगद का पेड़ था। उसकी जड़ें ज़मीन से बाहर निकलकर साँप जैसी लिपटी हुई थीं। दिन में लोग वहाँ से गुजरते तो बस छाया देखते, लेकिन रात ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 6

भुतिया हवेली की कहानीप्रस्तावनाबिहार के एक छोटे से गाँव में एक पुरानी हवेली थी। लोग उसे "काली हवेली" कहते कहते हैं कि वहाँ रात को अजीब आवाज़ें आती थीं—कभी किसी औरत की चीख, कभी बच्चों के रोने की आवाज़। गाँव वाले दिन में भी उस हवेली के पास जाने से डरते थे।---हवेली का इतिहासकहा जाता है कि यह हवेली लगभग सौ साल पहले राजा हरिनारायण सिंह ने बनवाई थी। राजा बहुत अमीर था, लेकिन उसका स्वभाव क्रूर और निर्दयी था। हवेली में उसने अपनी रानी और नौकरों के साथ रहना शुरू किया।एक रात अचानक रानी की मौत हो गई। ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 7

साये का बुलावा: भानगढ़ की वह काली रात1. एक अनसुलझा रहस्यराजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला की सबसे डरावनी जगहों में गिना जाता है। लेकिन इस किले से कुछ कोस दूर एक छोटी सी गढ़ी थी— 'काला डेरा'। लोग कहते थे कि यहाँ की रेत प्यासी है, पानी की नहीं, बल्कि इंसानी धड़कनों की।आर्यन एक आर्किओलॉजिस्ट (पुरातत्वविद) था। वह किंवदंतियों पर विश्वास नहीं करता था। उसके लिए भूत-प्रेत सिर्फ पुराने जमाने के लोगों की कल्पनाएँ थीं। वह अपनी टीम के साथ 'काला डेरा' पहुँचा था ताकि वह उस प्राचीन नक्काशी का अध्ययन कर सके जो सदियों ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 8

अतृप्त आत्मा का आह्वान: काले कुएँ का अभिशापराजस्थान के रेतीले धोरों के बीच बसा 'कुलधरा' जैसा ही एक और गाँव था—भानपुर। इस गाँव के बीचों-बीच एक विशाल पत्थर का कुआँ था, जिसे ग्रामीण 'काला कुआँ' कहते थे। उस कुएँ के चारों ओर लोहे की मोटी जंजीरें लिपटी हुई थीं और उस पर बड़े-बड़े ताले जड़े थे। गाँव के बुजुर्गों का सख्त आदेश था: "सूरज ढलने के बाद कुएँ की परछाईं भी शरीर पर नहीं पड़नी चाहिए।"आर्यन, जो एक मशहूर 'पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर' (Paranormal Investigator) था, अपने तीन दोस्तों—समीर, सानिया और कबीर—के साथ भानपुर पहुँचा। आर्यन का मकसद इस पुराने कुएँ ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 9

भुतहा हवेली का रहस्यभारत के एक छोटे से कस्बे में, जहाँ दिन में भी सन्नाटा पसरा रहता था, वहाँ पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग उसे "शिवकुंज हवेली" कहते थे। कहते हैं कि उस हवेली में रात के समय अजीब आवाज़ें आती थीं—कभी किसी के रोने की, कभी पायल की छनक, और कभी दरवाज़ों के अपने आप खुलने-बंद होने की। गाँव के लोग उस हवेली से दूर रहते थे, क्योंकि उनका मानना था कि वहाँ आत्माएँ भटकती हैं।---पहला अध्याय: हवेली की ओर कदमराहुल, एक युवा लेखक, जो रहस्यमयी कहानियों की तलाश में रहता था, उस हवेली की ओर आकर्षित हुआ। ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 10

भुतहा हवेली का रहस्यसर्दियों की एक ठंडी रात थी। गाँव के किनारे पर स्थित पुरानी हवेली को लोग "शापित कहते थे। कहते हैं कि वहाँ से अक्सर अजीब आवाज़ें आती थीं—कभी किसी औरत की चीख, कभी बच्चों की रोने की आवाज़, और कभी घंटियों की झंकार। गाँव के लोग उस हवेली के पास जाना तो दूर, उसका नाम लेने से भी डरते थे।रामेश्वर, जो कि एक युवा लेखक था, गाँव में अपने नाना-नानी से मिलने आया था। उसे रहस्यमयी कहानियाँ लिखने का शौक था। जब उसने हवेली की चर्चा सुनी, तो उसके भीतर जिज्ञासा जागी। उसने ठान लिया कि ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 11

हवेली का शाप: रूहों का कैनवासहिमालय की तलहटी में बसा 'नीलगिरी' गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए कम और सरहदों पर स्थित 'राय बहादुर की हवेली' के लिए ज्यादा जाना जाता था। 19वीं सदी की यह हवेली अब खंडहर बन चुकी थी, लेकिन इसकी भव्यता आज भी राहगीरों को डराने के लिए काफी थी। गांव के बुजुर्ग कहते थे कि उस हवेली के अंदर समय रुक गया है। जो वहां सूर्यास्त के बाद कदम रखता है, वह फिर कभी सूर्योदय नहीं देख पाता।आर्यन, दिल्ली का एक निडर खोजी पत्रकार और 'पैरानॉर्मल एक्टिविस्ट', इन कहानियों को सिर्फ अंधविश्वास मानता था। ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 12

अक्स: जो पीछे रह गयानील एक पेंटर था जिसे शोर-शराबे से नफरत थी। इसी तलाश में उसने शहर के एक बेहद सस्ता, पुराना विला किराए पर लिया। विला के मालिक ने चाबियाँ सौंपते वक्त सिर्फ एक बात कही थी, "बेटा, रात को हॉल के बड़े आइने को ढंक कर सोना।"नील ने इसे पुराने ज़माने का अंधविश्वास समझकर हंसते हुए टाल दिया।पहली रात: एक अजीब सा अहसासनील ने अपने बेडरूम में सामान सेट किया। हॉल के बीचों-बीच वह विशाल, आदमकद आइना लगा था। उसका फ्रेम काले पीतल का था जिस पर अजीब सी आकृतियां बनी थीं। नील को लगा कि ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 13

नीलगिरी की हवेली: एक खौफनाक दास्तानहिमाचल की वादियों में बसा एक छोटा सा गाँव, जहाँ धुंध इतनी गहरी होती कि हाथ को हाथ सुझाई न दे। उसी गाँव के छोर पर स्थित थी—नीलगिरी हवेली। गाँव वालों का मानना था कि उस हवेली की दीवारों में रूहें बसती हैं। सालों से वह हवेली बंद थी, उसके गेट पर लगे जंग खाए ताले इस बात की गवाही देते थे कि वहाँ इंसानों का नहीं, बल्कि सायों का बसेरा है।आर्यन, जो एक मशहूर 'पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर' (पिशाच अन्वेषक) था, अपने दो दोस्तों—समीर और रिया—के साथ वहाँ पहुँचा। आर्यन को पुरानी और डरावनी जगहों ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 14

खामोश गाँव का आखिरी मुसाफिरसमीर एक फ्रीलांस फोटोग्राफर था, जिसे दुनिया के नक्शे से मिट चुके या भुला दिए स्थानों की तस्वीरें खींचने का शौक था। इसी शौक के चलते वह हिमालय की तलहटी में बसे एक गुमनाम गाँव 'रुद्रपुर' पहुँचा। इस गाँव के बारे में कहा जाता था कि यहाँ सूरज ढलने के बाद परिंदे भी अपनी आवाज बंद कर लेते हैं।गाँव के लोग बाहरी दुनिया से कटे हुए थे और उनकी आँखों में एक अजीब सा खौफ हमेशा तैरता रहता था। समीर ने गाँव के बाहरी हिस्से में स्थित एक पुरानी सराय में रुकने का फैसला किया। ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 15

रात का सायापटना से थोड़ी दूर, बिहार के एक छोटे से गांव में, जहां जंगल घना था और नदी पानी रात में काला हो जाता था, वहां की पुरानी हवेली के बारे में हर कोई डरता था। हवेली का नाम था 'काली कोठी'। लोग कहते थे कि वहां रात को एक औरत की सिसकियां सुनाई देती हैं, और जो भी अंदर घुसता है, वो कभी लौटकर नहीं आता। लेकिन रवि को इन बातों पर यकीन नहीं था। वो पटना का एक युवा इंजीनियर था, जो गांव में अपनी दादी के अंतिम संस्कार के लिए आया था। दादी ने मरते ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 16

हवेली का शाप: रूहों का बुलावाअध्याय 1: सन्नाटे की दस्तकआर्यन एक स्वतंत्र छायाकार (photographer) था, जिसे दुनिया की चकाचौंध ज्यादा उन खंडहरों में दिलचस्पी थी जिन्हें वक्त ने भुला दिया था। उसकी खोज उसे 'नीलगिरी' की पहाड़ियों के बीच बसी एक गुमनाम हवेली 'ब्लैकवुड मनोर' तक ले आई। स्थानीय लोग इस हवेली का नाम सुनते ही अपनी उंगलियां दांतों तले दबा लेते थे। कहते थे कि साठ साल पहले यहाँ एक रईस खानदान रहता था, जो एक ही रात में रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया।शाम के धुंधलके में जब आर्यन उस विशाल लोहे के गेट के पास पहुँचा, ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 17

भाग 1: पुरानी यादों का बोझविक्रम एक सफल आर्किटेक्ट था, जिसे पुरानी इमारतों और ऐतिहासिक ढांचों से गहरा लगाव जब उसे पता चला कि उसके दादाजी ने पुश्तैनी गाँव 'रुद्रपुर' में उसके लिए एक पुरानी हवेली छोड़ी है, तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। वह शहर की भीड़भाड़ से थक चुका था और कुछ समय शांति में बिताना चाहता था।रुद्रपुर एक ऐसा गाँव था जहाँ सूरज ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था। जब विक्रम अपनी कार से वहाँ पहुँचा, तो गाँव वालों की नज़रें उस पर टिकी थीं—उन नज़रों में स्वागत कम और चेतावनी ज़्यादा थी। हवेली गाँव ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 18

अंतिम स्टेशन: रूहानी सफरपहाड़ों के बीच से गुजरती वह सड़क रात के सन्नाटे में किसी काले नाग की तरह रही थी। धुंध इतनी घनी थी कि कार की हेडलाइट्स भी हार मान रही थीं। आर्यन स्टीयरिंग व्हील थामे हुए था, जबकि उसका दोस्त समीर बगल वाली सीट पर सो रहा था। वे दोनों एक ट्रिप से वापस लौट रहे थे, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण वे 'काल-घाटी' नाम के एक अंजान इलाके में फंस गए थे।अचानक, कार के इंजन ने एक अजीब सी आवाज़ की और झटके खाकर बंद हो गई।"धत् तेरे की! अब इसे क्या हुआ?" आर्यन ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 19

: “दरभंगा की वह बंद हवेली”दरभंगा की पुरानी गलियों में एक हवेली थी—ऊँची, खामोश और समय से भी पुरानी। उसे बस “सेन हवेली” कहते थे। कहते हैं, वहाँ रात के बाद कोई नहीं जाता। और जो गया… वो कभी पहले जैसा लौटकर नहीं आया।अक्टूबर की ठंडी शाम थी। हवा में सीलन और धुएँ की मिली-जुली गंध थी। आसमान पर बादल ऐसे तैर रहे थे जैसे किसी ने काली स्याही उड़ेल दी हो। पटना से आई एक रिसर्च स्कॉलर, आर्या, उस हवेली के सामने खड़ी थी। वह लोककथाओं पर रिसर्च कर रही थी और उसे दरभंगा की इस हवेली के ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 20

हवेली की आख़िरी रातबरसात की वह रात जैसे किसी अधूरी कहानी की तरह आसमान पर टंगी हुई थी। बादलों गरज से धरती काँप रही थी और बिजली की चमक अँधेरे को चीरकर किसी रहस्य का इशारा कर रही थी। शहर से दूर, घने जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी—वक़्त की मार से टूटी हुई, मगर अब भी अपने भीतर अनगिनत राज़ समेटे।लोग उसे “विरान हवेली” कहते थे। कहते हैं, वहाँ जो भी गया… वापस नहीं लौटा।आरव, जो पेशे से लेखक था, ऐसी कहानियों को अंधविश्वास मानता था। उसे रहस्यों से प्यार था, और वह चाहता था कि ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 21

“दरभंगा की हवेली का साया”बिहार के दरभंगा शहर से थोड़ा दूर, एक पुरानी हवेली थी। लोग उसे “साया हवेली” थे। दिन में वह बस एक खंडहर जैसी इमारत लगती, लेकिन रात होते ही वहां से अजीब-अजीब आवाज़ें आने लगतीं — जैसे कोई रो रहा हो, कोई हंस रहा हो, या कोई भारी कदमों से सीढ़ियाँ उतर रहा हो।गांव के लोग कहते थे कि उस हवेली में सौ साल पहले एक लड़की की दर्दनाक मौत हुई थी। उसका नाम था माधवी। वह बहुत खूबसूरत थी, लेकिन उसकी शादी जबरदस्ती एक अमीर जमींदार से कर दी गई थी। कहते हैं, ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 22

हवेली का रहस्य रिया पटना की एक छोटी सी कॉलोनी में रहती थी। 25 साल की ये लड़की ग्राफिक थी, लेकिन जिंदगी ने उसे अचानक एक झटका दिया। उसके दादाजी की मौत के बाद, परिवार ने फैसला किया कि पुरानी पैतृक हवेली बेच दी जाए। हवेली गंगा नदी के किनारे, पटना के बाहर एक जंगल जैसे इलाके में थी। दादाजी हमेशा कहते थे, "वहां मत जाना, बेटी। वो जगह श्रापित है।"रिया को पैसों की तंगी थी। बॉयफ्रेंड अजय ने उसे धोखा दिया था – वो किसी और के साथ भाग गया। इसलिए रिया ने सोचा, हवेली को खुद साफ ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 23

शीर्षक: हवेली की आख़िरी रातदरभंगा शहर से कुछ दूर एक पुरानी हवेली थी। लोग उसे काली हवेली कहते थे। में भी उसके पास से गुजरते समय लोगों की चाल तेज़ हो जाती थी। रात में तो कोई उस रास्ते से गुजरने की हिम्मत ही नहीं करता था।कहते हैं कि कई साल पहले उस हवेली में एक अमीर ज़मींदार रहता था। उसकी एक बेटी थी—नैना। बेहद खूबसूरत, लेकिन उतनी ही रहस्यमयी। एक रात अचानक हवेली में आग लगी और उसके बाद से वह जगह हमेशा के लिए सूनी हो गई। कुछ लोगों का दावा था कि उन्होंने आधी रात को ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 24

साए का बसेरा: 'नीलगिरी विला' का रहस्यहिमाचल की वादियों के बीच बसा 'नीलगिरी विला' देखने में जितना भव्य था, खामोशी उतनी ही डरावनी थी। ऊंचे चीड़ के पेड़ों के बीच घिरा यह ब्रिटिश जमाने का बंगला पिछले पचास सालों से वीरान पड़ा था। आसपास के गांवों में मशहूर था कि जो भी इस बंगले की दहलीज लांघता है, वह अपनी परछाईं वहीं छोड़ आता है।1. दुस्साहस का आगाज़आर्यन, जो एक मशहूर 'पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर' (भूत-प्रेत खोजी) था, इस मिथक को तोड़ना चाहता था। उसके साथ उसकी टीम के दो और सदस्य थे—समीर, जो कैमरामैन था, और ईशा, जो साउंड रिकॉर्डिस्ट ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 25

भाग 1: अनजान राहेंइलाहाबाद के पास एक छोटा सा गाँव था—मुरारीपुर। कहने को तो यह गाँव था, लेकिन यहाँ हवाओं में एक अजीब सी भारीपन और सन्नाटा था। समीर, एक शहर का पढ़ा-लिखा लड़का और पेशे से आर्किटेक्ट, अपने पुराने पारिवारिक इतिहास को खोजने इस गाँव आया था। उसे पता चला था कि उसके परदादा की एक पुरानी हवेली यहाँ खंडहर बनी खड़ी है।गाँव के चाय वाले, बूढ़े काका ने जब समीर को हवेली जाते देखा, तो टोक दिया— "बेटा, सूरज ढलने से पहले लौट आना। उस हवेली की दीवारों के भी कान नहीं, बल्कि रूहें होती हैं।"समीर हँस ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 26

चुड़ैल का श्रापएक छोटे से पहाड़ी गाँव में, जहाँ घने जंगल चारों ओर फैले हुए थे, चुड़ैल का नाम ही लोग काँप जाते थे। गाँव के बाहर पुराना मंदिर था, जिसे 'चुड़ैल मंदिर' कहा जाता था। वहाँ रात में काली परछाईं भटकती, लंबे बाल उड़ते, और डरावनी हँसी गूँजती।राहुल, दिल्ली से आया नौजवान इंजीनियर, गाँव में अपनी नानी के पास छुट्टियाँ मनाने आया था। नानी ने चेतावनी दी, "बेटा, जंगल में मत जाना। वहाँ चुड़ैल रहती है—काली रानी। सौ साल पहले गाँव वालों ने उसे जिंदा जला दिया था। अब वह बदला लेती है।" राहुल हँसा, "नानी, ये सब ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 27

धनबाद की भूतिया हवेली धनबाद के पास एक सुनसान इलाके में खंडहर हवेली खड़ी थी, जिसे गाँव वाले 'भूतिया कहते थे। यह कहानी अजय नामक युवा फोटोग्राफर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो रोमांच की तलाश में इस रहस्य को सुलझाता है। �हवेली का भयावह इतिहासधनबाद जिले के टंडवा ब्लॉक में बसे इस गाँव में पुरानी हवेली 50 साल से वीरान पड़ी थी। 1970 के दशक में यहाँ ठाकुर परिवार रहता था। मालकिन सुनीता देवी एक सुंदर, धनी विधवा थीं, जिनकी संपत्ति पर उनका दूसरा पति रघुनाथ ठाकुर की नजर थी। गाँव वाले बताते हैं कि रघुनाथ ने संपत्ति हड़पने ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 28

हवेली का अंतिम पहर: आधी रात का सन्नाटाशहर की भागदौड़ से दूर, घने जंगलों के बीच बसी 'नीलगिरी हवेली' बारे में कई कहानियाँ मशहूर थीं। गाँव वाले कहते थे कि सूरज ढलने के बाद उस हवेली की दीवारें सांस लेने लगती हैं। आर्यन, जो एक मशहूर घोस्ट-हंटर (भूतिया रहस्यों को सुलझाने वाला) और लेखक था, इन बातों पर यकीन नहीं करता था। उसे अपनी नई किताब के लिए एक ठोस कहानी चाहिए थी, और नीलगिरी हवेली से बेहतर जगह क्या हो सकती थी?आगमन: एक अशुभ शुरुआतजब आर्यन अपनी पुरानी जीप से हवेली के पास पहुँचा, तो शाम के छह ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 29

श्रापित हवेली का रक्त-रंजीत रहस्यराजस्थान के धोरों के बीच बसा 'कुलधरा' गाँव अपनी वीरानी के लिए मशहूर था, लेकिन के पास एक और गुमनाम इलाका था जिसे लोग 'कालखोर' कहते थे। कालखोर के आखिरी छोर पर खड़ी थी— 'ठाकुर विक्रम सिंह की हवेली'। यह हवेली सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं थी, बल्कि बीते सौ सालों के काले इतिहास की गवाह थी। स्थानीय लोग कहते थे कि सूरज ढलते ही इस हवेली की दीवारों से खून रिसने लगता है और पायल की झंकार के साथ सिसकियों का दौर शुरू हो जाता है।अतीत की काली छायाहवेली का इतिहास 1920 के दशक ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 30

।पुरानी हवेली का रहस्य रांची के बाहरी इलाके में, घने जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग 'भूतिया हवेली' कहते थे। सालों से खाली पड़ी यह हवेली रात के समय अजीब सी आवाजें निकालती थी – कभी हंसी, कभी रोने की आवाज, कभी कदमों की थपथपाहट। गाँव वाले कहते, "वहाँ मत जाना, वरना भूत तुम्हें ले जाएगा।"अर्जुन एक युवा फोटोग्राफर था, जो रांची में रहता था। उसे पुरानी इमारतों की तस्वीरें खींचना बहुत पसंद था। एक दिन उसके दोस्त ने बताया, "भाई, भूतिया हवेली की फोटोज लेने जाओगे? वहाँ अमेजिंग शॉट्स मिलेंगे।" अर्जुन हँसा, "भूत-प्रेत सब बकवास ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 31

अंधेरी घाटी का बुलावा: एक खौफनाक दास्तानहिमालय की तलहटी में बसा 'रुद्रपुर' एक ऐसा गाँव था जहाँ सूरज की बाकी दुनिया से पहले चली जाती थी। ऊँचे-ऊँचे चीड़ के पेड़ों के बीच बसी यह बस्ती शाम होते ही सन्नाटे की चादर ओढ़ लेती थी। गाँव के किनारे पर एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग 'नीली कोठी' कहते थे। गाँव वालों का मानना था कि उस कोठी की दरो-दीवारों में आज भी उन लोगों की चीखें कैद हैं, जो कभी वहाँ से वापस नहीं आए।शहर से आए तीन दोस्तअयान, समीर और काव्या शहर की भागदौड़ से दूर कुछ रोमांच की ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 32

हवेली का खामोश पहरेदारअरावली की पहाड़ियों के बीच बसा 'निलयपुर' एक ऐसा गांव था, जहां सूरज ढलते ही सन्नाटा चादर बिछा देता था। गांव के छोर पर एक पुरानी हवेली खड़ी थी—‘रायजादा हवेली’। सफेद संगमरमर से बनी यह इमारत अब काली पड़ चुकी थी और उसके चारों ओर उग आई कटीली झाड़ियां ऐसी लगती थीं जैसे किसी ने हवेली को कैद कर रखा हो।गांव वाले कहते थे कि उस हवेली में वक्त ठहर गया है। वहां रहने वाला आखिरी वारिस, कुंवर विक्रम सिंह, चालीस साल पहले एक रात रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया था। उसके बाद जो भी ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 33

: अनजाना रास्तापहाड़ों की घुमावदार सड़कों पर आर्यन की पुरानी एसयूवी धीरे-धीरे रेंग रही थी। आर्यन एक पेशेवर फोटोग्राफर जिसे दुनिया के सबसे डरावने और वीरान स्थानों की तस्वीरें खींचने का जुनून था। उसकी अगली मंजिल थी—कालपुर। एक ऐसा गाँव, जो सरकारी नक्शों से मिट चुका था और जिसके बारे में कहा जाता था कि वहाँ का सूरज कभी पूरी तरह नहीं उगता।जैसे-जैसे वह ऊंचाई पर चढ़ रहा था, देवदार के घने पेड़ों ने रास्ता घेर लिया। अचानक, कार के इंजन ने दम तोड़ दिया। आर्यन ने बोनट खोलकर देखा, तो सब कुछ ठीक था, लेकिन बैटरी पूरी तरह ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 34

पटना के बाहरी इलाके में, जहाँ गंगा की लहरें खामोशी से बहती हैं, वहाँ एक विशालकाय और जर्जर इमारत थी। इसे लोग 'काली हवेली' के नाम से जानते थे। इस हवेली की दीवारें काली पड़ चुकी थीं और इसके झरोखों से झांकता अंधेरा राहगीरों के दिल में दहशत भर देता था। सालों से यह हवेली वीरान थी, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना था कि यहाँ सन्नाटा कभी चुप नहीं रहता। रात के सन्नाटे में यहाँ से पायल की छनछन, सिसकियों और भारी कदमों की आवाजें आती थीं।लालच और चुनौतीराजू, जो पटना शहर का एक उभरता हुआ और जिद्दी रियल ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 35

भूतिया हवेली का रहस्य पटना के बाहरी इलाके में, गंगा नदी के किनारे एक पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग 'भूतिया हवेली' कहते थे। सालों से खाली पड़ी यह हवेली रात के अंधेरे में डरावनी आवाजें निकालती थी। स्थानीय लोग कहते थे कि वहाँ एक औरत का भूत भटकता है, जो सौ साल पहले अपने प्रेमी के साथ मरी थी। लेकिन कोई सच्चाई जानता नहीं था।राहुल, एक 28 साल का युवक, पटना में एक आईटी कंपनी में काम करता था। उसे पुरानी कहानियाँ और रहस्य पसंद थे। एक शाम, उसके दोस्तों ने उसे हवेली के बारे में बताया। "भाई, तू ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 36

भुतहा हवेली का रहस्यप्रस्तावनाबरौनी गाँव, पटना से कुछ दूर, अपनी शांति और हरियाली के लिए मशहूर था। लेकिन गाँव किनारे पर खड़ी एक पुरानी हवेली ने उस शांति को हमेशा डर और रहस्य से ढक रखा था। हवेली की दीवारें काली पड़ चुकी थीं, खिड़कियाँ टूटी हुई थीं और दरवाज़े पर जंग लगे ताले लटकते थे। गाँव के लोग कहते थे कि वहाँ रात को अजीब आवाज़ें आती हैं—कभी किसी औरत की चीख, कभी पायल की झंकार।---पहला भाग: पत्रकार का आगमनरवि, एक युवा पत्रकार, लोककथाओं पर रिसर्च करने गाँव पहुँचा। उसे हवेली की कहानियाँ सुनकर रोमांच हुआ। गाँव के ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 37

भूतिया हवेली का रहस्य पटना के बाहरी इलाके में, गंगा नदी के किनारे एक पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग 'काली हवेली' कहते थे। सालों से खाली पड़ी, दीवारें काली पड़ चुकीं, खिड़कियां टूटी हुईं। रात के अंधेरे में वहां से आने वाली आवाजें—कभी हंसी, कभी रोना—गांव वालों को डराती रहतीं। लेकिन शहर से आया एक युवा पत्रकार, राहुल, को यह सब झूठ लगता था। वह एक ब्लॉग चलाता था, जहां सच्ची घटनाओं पर कहानियां लिखता। 'भूत-प्रेत सब अंधविश्वास है,' वह कहता। एक दिन, पुरानी खबरों में काली हवेली का जिक्र मिला—सत्तर साल पहले एक अमीर जमींदार की बेटी गायब ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 38

“वो दरवाज़ा जो कभी बंद नहीं हुआ…”रात के करीब 12 बज रहे थे।पूरे गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ था, किसी ने आवाज़ों को कैद कर लिया हो। दूर कहीं कुत्ते के भौंकने की आवाज़ गूँजती, और फिर सब कुछ फिर से शांत हो जाता।राघव अपनी पुरानी हवेली के बाहर खड़ा था।वो हवेली… जिसे लोग "मौत का घर" कहते थे।“तू पागल हो गया है क्या?” उसके दोस्त अर्जुन ने कहा था, “वहाँ जो भी गया, वो वापस नहीं आया।”लेकिन राघव के लिए ये सिर्फ एक डरावनी कहानी नहीं थी।उसके पिता की मौत भी इसी हवेली में हुई थी… और आज ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 39

पटना के बाहरी इलाके में, पटना के पास, गंगा नदी के शांत किनारे पर खड़ी वह हवेली अब पहले नहीं रही थी। जिस हवेली को लोग “भूतिया हवेली” कहकर दूर से ही नजरें फेर लेते थे, वही हवेली अब एक अनकही शांति में डूबी हुई थी। लेकिन यह शांति उतनी सरल नहीं थी, जितनी बाहर से दिखती थी।अध्याय: मुक्ति के बाद की छायाराकेश ने उस रात के बाद हवेली छोड़ने का फैसला तो कर लिया था, लेकिन जाने क्यों उसके कदम बार-बार रुक जाते थे। जैसे कोई अदृश्य डोर उसे बांध रही हो। मनीष तो अगले ही दिन पटना ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 40

भूतिया कहानी: “शापित हवेली”पटना से लगभग 40 किलोमीटर दूर बरौनी नाम का एक छोटा-सा गाँव बसा था। यह गाँव खेतों और नदी के किनारे तो था ही, लेकिन इसके बाहर एक पुरानी हवेली खंडहर की शक्ल ले चुकी थी। हवेली की दीवारें काली पड़ गई थीं, जंग लगे द्वार टूटे पड़े थे, और रात के सन्नाटे में वहाँ से अजीबो-गरीब आवाज़ें आतीं—जैसे किसी की सिसकियाँ, साँपों की फुफकार या टूटते कांच की खनक। गाँव वाले डरते थे। वे कहते, “जिसने भी उस हवेली में कदम रखा, वह कभी पहले जैसा नहीं रहा। कोई पागल हो गया, कोई गायब हो ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 41

“काली हवेली का श्राप”गया जिले के घने जंगलों के किनारे, जहाँ पहाड़ियाँ आसमान को चूमती हैं, एक पुरानी नेम खड़ी थी, जिसे गाँव वाले डरते हुए 'काली हवेली' कहते थे। सदियों से इसकी काली दीवारें रहस्यों से लिपटी रहतीं। रात के सन्नाटे में यहाँ से अजीब आवाज़ें आतीं—कभी किसी स्त्री की दिल दहला देने वाली चीख, कभी बच्चों के रोने की फुसफुसाहट, तो कभी लोहे की जंजीरों की खनक। गाँव के बुजुर्ग कहते, "वहाँ देवी का श्राप है। जो गया, वो लौटा ही नहीं।" बच्चे तो नाम लेते ही काँप जाते।लेकिन अमित, एक 28 वर्षीय युवा शोधकर्ता, दिल्ली से ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 42

रात के दो बजे थे, गाँव के बाहर पुराने श्मशान के पास से संजय अपनी बाइक लेकर गुज़र रहा हवा असामान्य रूप से ठंडी थी, जबकि दिन भर चिलचिलाती गर्मी पड़ी थी। सड़क के दोनों ओर सूखे पेड़ ऐसे खड़े थे जैसे काली परछाइयाँ हथेलियाँ फैलाकर उसे रोकना चाहती हों। अचानक बिना किसी वजह के उसकी बाइक झटके खाकर रुक गई, जैसे किसी ने पीछे से पकड़कर जकड़ लिया हो। उसने घबराकर दो‑तीन बार किक मारी, पर इंजन ने कोई जवाब नहीं दिया।तभी उसके पीछे से एक धीमी, ठंडी आवाज़ आई—“मुझे घर छोड़ दोगे…?”संजय के शरीर में सिहरन दौड़ ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 43

“आख़िरी ड्यूटी”: रेलवे हॉस्पिटल की आत्मारात के साढ़े बारह बज रहे थे। �शहर के पुराने रेलवे हॉस्पिटल की इमारत से ही अजीब-सी लगती थी—ऊँची, पीली पड़ी दीवारें, कई जगह से उखड़ा हुआ प्लास्टर, और बीच-बीच में टिमटिमाती ट्यूब लाइटें, जो जैसे हर पल बुझने की धमकी दे रही हों। �चारों तरफ़ सन्नाटा था, बस कभी-कभी किसी दूर जाती मालगाड़ी की सीटी रात की ख़ामोशी को चीरती हुई सुनाई दे जाती। �हॉस्पिटल के गेट के पास खड़े गार्ड रमेश ने अपनी जैकेट को सीने तक खींचकर बंद किया।ठंडी हवा अजीब तरह से चुभ रही थी, जबकि दिन में इतनी ठंड ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 44

पुरानी हवेली का रहस्यमुजफ्फरपुर की गलियों से थोड़ा दूर, एक जंगल के किनारे पर खड़ी थी पुरानी ठाकुर हवेली। कहते थे कि वहाँ रात को भूतों की आवाजें आती हैं। बच्चे डरते हुए उसकी कहानियाँ सुनाते, और बूढ़े चाय की चुस्कियों के बीच चेतावनी देते – "वहाँ मत जाना, वहाँ मौत बसती है।"राहुल नाम का एक युवक, जो शहर से पढ़ाई करने आया था, इन कहानियों से प्रभावित नहीं होता था। वह एक ब्लॉगर था, जो भूत-प्रेत की कहानियाँ इकट्ठा करता और यूट्यूब पर डालता। "ये सब अंधविश्वास है," वह हँसते हुए कहता। एक रात, दोस्तों के साथ शर्त ...Read More

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 45

भूतिया हवेली का रहस्यरांची के बाहरी इलाके में, घने जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग उसे हवेली' कहते थे। सौ साल पुरानी यह हवेली कभी एक जमींदार की संपत्ति थी, लेकिन अब वहां कोई नहीं जाता। रात के अंधेरे में दीवारों से अजीब आवाजें आतीं – कभी हंसी, कभी रोना, कभी पैरों की आहट। स्थानीय लोग कहते, "वहां भूत रहता है। जो गया, वो लौटा ही नहीं।"मेरा नाम राहुल है। मैं रांची का एक युवा पत्रकार हूं। मेरी जिंदगी में कुछ रोमांच की कमी थी। एक दिन, अखबार के लिए एक स्पेशल स्टोरी की जरूरत पड़ी ...Read More