मुंबई कभी नहीं सोती. रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए की तरह. आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी. दुनिया की नजरों में वह आज भी वही थी— मुंबई की रहने वाली एक साधारण Collage गर्ल. खुले बाल, हल्की मुस्कान, और आँखों में सपने. वही लडकी जो कभी शीशे के सामने खडी होकर फिल्मी डायलॉग्स बोला करती थी.
Agent Tara - 1
मुंबई कभी नहीं सोती.रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए तरह.आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी.दुनिया की नजरों में वह आज भी वही थी—मुंबई की रहने वाली एक साधारण Collage गर्ल.खुले बाल, हल्की मुस्कान, और आँखों में सपने.वही लडकी जो कभी शीशे के सामने खडी होकर फिल्मी डायलॉग्स बोला करती थी.वही लडकी जो Collage के हर फेस्ट, हर ड्रामा में सबसे आगे रहती थी.जिसकी खूबसूरती और एक्टिंग के चर्चे पूरे Collage में थे.लेकिन उस मुस्कान के पीछे अब कुछ और था.कुछ ऐसा, जिसे कोई देख नहीं सकता था.उसके पिता—रणविजय ...Read More
Agent Tara - 2
मुंबई की रात बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, भीतर से उतनी ही बेरहम होती है.ट्रस्ट की इमारत से समय तारा ने पीछे मुडकर नहीं देखा.आकृति मेहता अब भी वही थी—थकी हुई, साधारण, काम से लौटी एक लडकी.लेकिन जैसे ही उसने टैक्सी बदली,फोन स्विच ऑफ कियाऔर एक तंग गली में उतरकर पैदल चलने लगी—वह आकृति नहीं रही.अब वह तारा थी.उसका सीक्रेट बेस शहर के उस हिस्से में थाजहाँ कोई बिना वजह नहीं जाता.एक पुरानी, बंद पडी मिल.सरकारी रिकॉर्ड में वह इमारत सालों पहले असुरक्षित घोषित हो चुकी थी.बाहर से जर्जर दीवारें, टूटी खिडकियाँ.अंदर—टेक्नोलॉजी, निगरानी और खामोशी.तारा ने एक खास ...Read More
Agent Tara - 3
कबीर राणा उस रात बेस में अकेला बैठा था.स्क्रीन पर तारा की लाइव लोकेशन दिख रही थी—सहयोग फाउंडेशन से ही दूरी पर रुकी हुई.वह ज्यादा देर से नहीं रुकी थी, लेकिन कबीर के लिए हर मिनट भारी था.वह कुर्सी से उठा, दो कदम चला, फिर रुक गया.यह आदत बन चुकी थी.जब से तारा इस Mission पर गई थी,कबीर का दिमाग कभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ.वह जानता था कि तारा कितनी काबिल है.Training में वह सबसे तेज थी.सबसे शांत.सबसे खतरनाक हालात में भी खुद पर काबू रखने वाली.लेकिन यह जानना और महसूस करना—दो अलग बातें थीं.और कबीर.महसूस कर रहा ...Read More
Agent Tara - 4
इंतजार सबसे खतरनाक हथियार होता है.और यह बात तारा जानती थी.उसने खुद को शांत रखा. अगर डर दिखा, तो हार जाएगी.करीब पंद्रह मिनट बाद दरवाजा खुला.मीरा देसाई अंदर आई.आज के बाद, उसने कहा, तुम सीधे मेरे लिए काम करोगी।यह प्रमोशन नहीं था.यह निगरानी थी.तारा ने सिर हिलाया. ठीक है।मीरा बाहर चली गई.तारा ने धीरे से सांस ली.उसे नहीं पता था कि इस वक्त नीचे, उसी इमारत के बाहर, कबीर खडा है. सादे कपडों में, बिना पहचान के, लेकिन पूरी तैयारी के साथ.अगर ऊपर कुछ भी गलत होता.तो वह अंदर घुसने वाला था.चाहे कीमत कुछ भी हो.मीरा देसाई के केबिन ...Read More