अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश

(9)
  • 69
  • 0
  • 15.9k

चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन को, थोड़ा ऊपर सरकाया। जहाँ उसकी कलाई पर, वो प्लैटिनम का भारी कड़ा, सूरज की किरणों को मात दे रहा था। वो कड़ा सिर्फ जेवर नहीं था, वो रॉय खानदान की धमक थी। जो चीख-चीख कर कहती थी कि, अयान के कदमों में दुनिया झुकती है। तभी माहिरा की खिलखिलाहट गूँजी। उसने अयान की आँखों पर, अपनी ठंडी हथेलियाँ रख दीं। अयान मुस्कुराया, "माह

1

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 1

पार्ट 1 ( सल्तनत की राख )चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन को, थोड़ा ऊपर सरकाया।जहाँ उसकी कलाई पर, वो प्लैटिनम का भारी कड़ा, सूरज की किरणों को मात दे रहा था। वो कड़ा सिर्फ जेवर नहीं था, वो रॉय खानदान की धमक थी। जो चीख-चीख कर कहती थी कि, अयान के कदमों ...Read More

2

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 2

अयान,अपनी झोपड़ी से बाहर निकला, तो सामने का नजारा किसी डरावने सपने जैसा था। वही पुरानी, संकरी गलियां जहाँ और नाले की बहती हुई गंदा पानी,अब उसके फटे हुए जूतों का हिस्सा बन गया था।हवा में जो कभी विदेशी इत्र की महक हुआ करती थी, वहाँ अब सड़ी हुई मछलियों की तीखी गंध और समंदर का हैवानी शोर था।अयान का हर कदम भारी था, वह रास्ते से गुजरते हुए उन मछुआरों को देख रहा था। जो अपनी जालों से सड़े, महकते मछलियां निकलने में मशगूल थे। उनका चिल्लाना, समन्दर की रेत पर बच्चों का नंगे पैर दौड़ना—यह सब अब ...Read More

3

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 3

आर्यन ने अपने सूप से सने हुए कपड़ों को देखा, और फिर नफरत भरी नज़रों से ज़मीन पर पड़े को। उसने मैनेजर का गला पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा और दहाड़ते हुए बोला—"ओए मैनेजर! इस भिखारी को बोल, अभी के अभी घुटनों पर बैठे और मेरे जूतों के साथ-साथ ये कपड़े भी साफ़ करे। और हाँ, बिना माफ़ी माँगे ये यहाँ से हिलना नहीं चाहिए!"पूरे होटल में मौत सा सन्नाटा छा गया। सब लोग अपनी जगह जम गए। अयान ने धीरे से अपना सिर उठाया, उसकी आँखों में एक अजीब सी तड़प थी।आर्यन ने अपना पैर आगे बढ़ाया और ...Read More

4

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 4

अयान को लगा जैसे आसमान उसके सिर पर गिर पड़ा हो। "रॉय खानदान? वारिस? पागल हो गई हो क्या? एक मामूली मछुआरा हूँ!"दिया ने उसकी कलाई पकड़ी और उस खास निशान वाले,प्लेटिनियम की कड़ा की तरफ इशारा किया। "अगर यकीन नहीं आता, तो इसे देखिए। इस पर बना खास निशान राय खानदान की विरासत है।अयान ने उस कड़े की ओर देखा। उसकी चमक अब उसे डरा रही थी। उसके मुँह से बस इतना निकला, "मतलब... मैं मुंबई के सबसे अमीर खानदान से हूँ? फिर मैं इस हाल में कैसे पहुँचा? मेरे मम्मी-पापा कहाँ हैं?"दिया की आँखों में अचानक नमी ...Read More

5

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 5

अयान को लगा जैसे आसमान उसके सिर पर गिर पड़ा हो। "रॉय खानदान? वारिस? पागल हो गई हो क्या? एक मामूली मछुआरा हूँ!"दिया ने उसकी कलाई पकड़ी और उस खास निशान वाले,प्लेटिनियम की कड़ा की तरफ इशारा किया। "अगर यकीन नहीं आता, तो इसे देखिए। इस पर बना खास निशान राय खानदान की विरासत है।अयान ने उस कड़े की ओर देखा। उसकी चमक अब उसे डरा रही थी। उसके मुँह से बस इतना निकला, "मतलब... मैं मुंबई के सबसे अमीर खानदान से हूँ? फिर मैं इस हाल में कैसे पहुँचा? मेरे मम्मी-पापा कहाँ हैं?"दिया की आँखों में अचानक नमी ...Read More

6

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 6

अयान बैंक के भारी दरवाजों को धकेल कर बाहर निकला, बैंक के बाहर जोरो की बारिश हो रही थी।बिजली गुराना और बादलों से नीचे गिरती पानी ने पूरे शहर को डरावना बना दिया था। पर अयान को किसी चीज़ का होश नहीं था। वो ठंडे पानी में बुरी तरह भीग रहा था, लेकिन उसके अंदर एक अलग ही आग लगी थी।वो सड़क पर चलते हुए बार-बार उस फोटो को देख रहा था। हवा के तेज़ जोखो उसे अंदर से हिला रहे थे, पर उसकी नज़रें उस धुंधले चेहरे पर टिकी थीं।अयान का सिर फटा जा रहा था, "आखिर ये ...Read More

7

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 7

अयान के मुँह से 'माहिरा' नाम क्या निकला, मानो उस लड़की की रुकी हुई सांसें वापस आ गई हों।वो से पीछे मुड़ी और अयान को देखते ही पागलों की तरह उसके गले लग गई। उसका पूरा शरीर कांप रहा था, उसने अयान की कमीज़ को मुट्ठियों में जकड़ लिया और किसी बच्चे की तरह फूट-फूट कर रोने लगी"अयान... आप ज़िंदा हैं? सच में आप हैं न?" माहिरा की आवाज़ सिसकियों में डूबी जा रही थी। "मुझे लगा मैंने आपको हमेशा के लिए खो दिया... मैंने तो हार मान ली थी अयान!"माहिरा के छूते ही अयान के दिमाग में जैसे ...Read More

8

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 8

अयान अपनी आँसू पोंछता है, और माहिरा का हाथ थामे, शहर के शोर-शराबे से दूर लेकर जाने लगता है।माहिरा सांसें बुरी तरह से फूलने लगती हैं, और डर के मारे, उसका गला बार-बार सूखने लगता है। अयान के कानों में अभी भी वही बातें गूँज रही थीं, जो उसे माहिरा ने बताई थीं। उसका कलेजा छलनी हो रहा था, यह सोचकर कि उसका भाई जैसा यार विराज, मारा गया!अयान को यकीन नहीं हो पा रहा था कि जिस विराज के साथ उसने बचपन बिताया, जो उसकी ढाल बनकर हमेशा खड़ा रहता था, वह अब इस दुनिया में नहीं है। ...Read More

9

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 9

शहर की सड़कों पर अब धुंध की चादर थोड़ी पतली हो रही थी। मुंबई के इस हिस्से में सब्जी की गाड़ियाँ और अखबार फेंकने वालों की भागदौड़ शुरू हो चुकी थी।कहीं दूर किसी मंदिर की घंटी सुनाई दे रही थी, तो कहीं चाय की टपरी पर स्टोव जलने की 'सरसराहट' हो रही थी।अयान ने अपनी सिर की पगड़ी को थोड़ा नीचे खींचकर माथे तक किया और तेज़ कदमों से 'सेंट्रल बैंक' की उस ऊँची इमारत की तरफ बढ़ने लगा। सुबह की वो ठंडी हवाएं जब उसके सीने से टकरा रही थीं, तो उसे ठंड नहीं... बल्कि अपने अंदर जल ...Read More

10

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 10

सुबह के 10 बज गए थे।अयान ने अपनी धड़कनों को काबू में करते हुए देखा कि 'सेंट्रल बैंक' के भारी कांच वाले दरवाजे धीरे-धीरे खुलने लगे हैं। जैसे ही वो दरवाजे खुले, अंदर से आती AC की एकदम ठंडी हवा सीधे अयान के चेहरे पर लगी, पर ताज्जुब की बात ये थी कि उस ठंडक में भी उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।अयान ने अपनी पगड़ी को थोड़ा और नीचे खींच लिया, इतना कि उसकी आँखें बस सामने का रास्ता देख सकें, पर कोई उसकी आँखों में झांककर उसका डर न पढ़ ले।अयान को लग रहा ...Read More

11

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 11

अयान ने जैसे ही अपनी उंगली दोबारा मशीन के फिंगरप्रिंट सेंसर पर रखी, उसे महसूस हुआ कि उसका पूरा पत्थर का हो चुका है। खून जैसे नसों में दौड़ना ही बंद कर गया हो। उसने अपनी आँखों को इतना कसकर बंद कर लिया था, मानो इस बार स्क्रीन पर रेड नोटिफिकेशन देखना ही नहीं चाहता हो।अयान के बंद आँखों के सामने अंधेरा नहीं, बल्कि एक चेहरा साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा था—वो चेहरा था आर्यन का। वही शातिर मुस्कान, वही घमंड। वही आर्यन, जिसने अयान से उसका नाम, उसका परिवार और उसकी खुशियाँ छीनकर उसे एक ज़िंदा लाश बना दिया ...Read More

12

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 12

अयान ने फोन जेब में डाला और तेज कदमों से गली के बाहर की तरफ भागा। उसके दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि किसी तरह सुरक्षित जगह पहुँचकर इस पेनड्राइव का कच्चा चिट्ठा खोले। पर अभी उसने गली का मोड़ काटा ही था कि अचानक...'चूँ...ऊँ...ऊँ!'टायरों के रगड़ने की तीखी आवाज आई और धुएं के गुबार के साथ चार काली गाड़ियाँ अयान के ठीक आगे-पीछे आकर रुकीं। अयान संभल पाता, उससे पहले ही गाड़ियों के दरवाज़े खुले गाड़ियों से 8-10 हट्टे-कट्टे गुंडे बाहर निकले, जिनकी शक्लें ही बता रही थीं कि वो यहाँ खून-खराबा करने आए हैं।अयान ...Read More

13

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 13

आर्यन की कलाई पर डंडा क्या पड़ा, जैसे उसके हाथ का सारा सिस्टम ही हिल गया हो। वह वहीं पर बैठ गया। अपने हाथ को ऐसे सहलाने लगा, जैसे उसे यकीन ही न हो रहा हो कि ये उसी का हाथ है। दर्द के मारे उसके चेहरे की लकीरें टेढ़ी-मेढ़ी हो गईं। वह मछली की तरह मुँह खोल-खोल कर हवा खींचने लगा, पर गले से आवाज़ नहीं निकल रही थी।उसकी आँखों के किनारे लाल पड़ गए थे। वह बस अपनी बेजान उंगलियों को देख रहा था, जो अब मुड़ने का नाम भी नहीं ले रही थीं।तभी करीम चाचा की ...Read More

14

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 14

अयान की उंगलियों के बीच वह पेनड्राइव किसी लट्टू की तरह घूम रही थी। तभी आर्यन के पिता के से 'बस्ती जलाने' की बात निकली और अयान के कानों में किसी जलते कोयले जैसी लगी। उस एक शब्द ने अयान के दिमाग़ में लगे सालों पुराने जंग लगे ताले को जैसे एक झटके में तोड़ दिया।अयान के दिमाग़ के पर्दे पर जैसे कोई पुरानी रुकी हुई फिल्म फिर से चलने लगी।अयान को अब एक के बाद एक वो सारे धुंधले चेहरे बिल्कुल साफ़ दिखने लगे थे, उसकी रूह तक कांप रही थी—उसे महसूस होने लगा बारिश का शोर, वही ...Read More

15

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 15

अयान जैसे ही लड़खड़ाते हुए घर की दहलीज पर पहुँचा, वहां एक ऐसी अजीब सी चुप्पी पसरी हुई थी वक्त ठहर गया हो। तभी अचानक घर के अंदर से कांच टूटने की ज़ोरदार आवाज़ आई।अयान ने जैसे-तैसे अपनी हिम्मत बटोरी और घिसटते हुए कदम अंदर बढ़ाए, पर सामने का मंजर देखते ही उसकी रही-सही सांसें भी गले में अटक गईं।सामने माहिरा खड़ी थी, जिसे देखकर लग रहा था कि उसमें जान ही नहीं बची है; वो एकदम बेजान मूरत बन गई थी।अयान का वो खून से सना चेहरा और फटे हुए कपड़े देखकर माहिरा के हाथ-पैर जैसे सुन्न पड़ ...Read More

16

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 16

कमरे में बिखरी खामोशी को, दरवाजे पर जोरदार दस्तक ने, कांच की तरह तोड़ दिया— धड़, धड़, धड़!अयान, जो पीठ में लगे दर्द और बदले की आग से जूझ रहा था, दरवाजे के जोरदार झटके से तड़प कर उठ गया। उठते ही उसके ताजे जख्मों ने, जैसे फिर से जहर उगलना शुरू कर दिया।अयान का पूरा बदन पसीने से भीग गया। उसने कांपते हाथों से अपनी फटी पसलियों को जकड़ा, जहाँ दर्द से ज्यादा, उस इंतकाम की तड़प उसे जला रही थी।माहिरा, जो अयान की हालत देखकर पहले ही मर चुकी थी, उसकी यह तड़प देख पूरी तरह कांप ...Read More

17

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 17

अयान के चेहरे पर पसीने की बूंदें अभी भी चमक रही थीं। उसने कांपते हाथों से अपनी जेब से असली पेनड्राइव निकाली। लैपटॉप की स्क्रीन की हल्की रोशनी में., वह छोटी सी चिप किसी जिंदा बम जैसी लग रही थी।अयान ने बड़ी सावधानी से उसे लैपटॉप में सेट कर दिया। स्क्रीन पर हुई एक हल्की सी हलचल ने साफ़ कर दिया कि अब., आर्यन की बर्बादी का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।तभी करीम चाचा ने अयान के कंधे पर अपना भारी हाथ रखा। अयान ने पलटकर देखा, चाचा के चेहरे पर आज वह पुरानी हिम्मत नहीं., बल्कि एक बेचैनी ...Read More

18

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 18

"उस बंद कमरे में सन्नाटा इतना भारी था कि अयान के सीने में धड़कता हुआ गुस्सा साफ सुनाई दे था। वीडियो खत्म होने के बाद भी लैपटॉप की वह ठंडी रोशनी अयान के तपते चेहरे पर पड़ रही थी।माहिरा और दिया की आंखों में आर्यन के लिए नफरत का ऐसा जहर उतरा आया था, मानो वे उस वीडियो में दिखे हर एक पल का हिसाब अभी के अभी चुकता कर देना चाहती हों।""अयान ने लैपटॉप को एक झटके के साथ बंद किया, उसकी आवाज़ में दबा हुआ गुबार फूट पड़ा, 'मैंने बहुत देख लिया अपनी लाचारी का यह तमाशा!दिया… ...Read More

19

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 19

अयान ने माहिरा की डरी हुई आँखों में झाँका, जैसे बिना कुछ कहे उसे यकीन दिला रहा हो कि ठीक हो जाएगा'।उसने झुककर बड़े प्यार से माहिरा के माथे को चूमा—इस एक छोटे से स्पर्श में फिक्र भी थी! और बिछड़ने का वो अनजाना डर भी।जो अयान के दिल को अंदर ही अंदर काट रहा था।अयान एक गहरी सांस लेकर, खुद को पत्थर बनाया और बिना पीछे मुड़े कमरे के उस भारी दरवाज़े की तरफ बढ़ गया। उसे पता था कि अगर वो एक बार भी पीछे मुड़कर देख लेता, तो शायद कदम वहीं रुक जाते। उसके दिमाग़ में ...Read More

20

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 20

अयान घंटों उस अंधेरे कमरे में ज़मीन पर पत्थर बना बैठा था। सन्नाटा इतना गहरा था कि उसे अपने दिल की धड़कन साफ़ सुनाई दे रही थी।जैसे ही वो आँखें मूँदता, माहिरा का वो डरा हुआ चेहरा सामने आ खड़ा होता—जैसा उसने उसे आख़िरी बार दरवाज़े पर देखा था। वही बेबसी, वही खौफ...वही मंज़र अयान के दिमाग में हथौड़े की तरह चोट कर रहा था। उसने अपनी उंगलियां हथेली में इतनी ज़ोर से गड़ाईं कि उसके हाथ कांपने लगे। उसने अपनी गर्दन को एक झटका दिया, जैसे कोई भारी बोझ उतार फेंकना चाहता हो।उसकी आँखों में अब आँसू सूख ...Read More

21

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 21

Note: दिन की भीड़ और शोर में मैं अक्सर खामोश रहता हूँ, लेकिन जैसे ही रात का सन्नाटा गहराता मेरा असली सफर शुरू होता है।जब पूरी दुनिया सो रही होती है, मैं अपनी तनहाई में मोबाइल उठाता हूँ और नोटपैड की उस कोरी स्क्रीन पर अयान के जख्मों को कुरेदना शुरू करता हूँ।मेरे लिए लिखना सिर्फ शौक नहीं, बल्कि उन जज्बातों को बाहर निकालने का जरिया है जिन्हें लोग अक्सर दबा देते हैं।मेरी कहानियों में आपको सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि अपनों का दिया वो धोखा, इंतकाम का वो जुनून और एक 'जख्मी शिकारी' का वो दर्द मिलेगा जो वजूद ...Read More

22

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 22

आर्यन ने अयान की आँखों में आँखें डालीं और चेहरे पर एक फीकी सी मुस्कान लाकर बोला” फिलॉसफी अच्छी लेते हो अयान! पर ये जो मौत और आखिरी वक्त की बातें कर रहे हो न... ये सिर्फ हारने वाले की छटपटाहट है।तुम्हें लग रहा है कि तुम इन बातों से मुझे डरा दोगे? सच तो ये है कि तुम अभी इस वक्त सिर्फ इसलिए सलामत खड़े हो क्योंकि मैं अभी तुम्हें जिंदा रखा हूं । ये 'मौत की गिनती' अपने पास ही रखो, क्योंकि जीत का जश्न मैं मना रहा हूँ और हार का मातम तुम्हें मनाना है।”इतना कहकर ...Read More

23

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 23

आर्यन ने इशारा किया, और वे सातों गुंडे एक साथ अयान पर टूट पड़े। गोदाम की घुटन भरी हवा जूतों की रगड़, और दरिंदगी भरी चीखें गूँजने लगीं। चारों तरफ उड़ती धूल और पसीने की गंध के बीच, मौत का खेल शुरू हो चुका था।एक गुंडे ने पीछे से अयान की गर्दन पर सरिया तान दिया, पर अयान ने फुर्ती से अपनी गर्दन झटक दी। सरिया हवा को चीरता हुआ निकल गया। अयान ने अपनी कोहनी पीछे की तरफ जोर से मारी, जो सीधा गुंडे के पेट में धंसी।पलक झपकते ही अयान पीछे घूमा, और उसकी कलाई ऐसी मरोड़ी...'कड़क'... ...Read More

24

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 24

आर्यन के सीने के पार सरिया निकलते ही अयान का शरीर एक जख्मी शेर की तरह पलटा। उसने एक के लिए भी पीछे गिरते हुए, आर्यन की तरफ मुड़कर नहीं देखा। उसकी आँखों में अब सिर्फ ऊपर बीम से लटकती माहिरा और दिया थी। उनके चेहरे नीले पड़ रहे थे और गले की नसें फूल चुकी थीं।हवा के एक-एक कतरे के लिए उनकी छटपटाहट साफ़ दिख रही थी,"माहिरा!" अयान की दहाड़ गोदाम की दीवारों से टकराई।उसकी नज़र ज़मीन पर पड़ी, जहाँ एक रामपुरी चाकू फर्श पर चमक रहा था। उसने लपककर उसे उठाया और पास पड़ी लोहे की ऊँची ...Read More

25

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 25

अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने माहिरा और दिया को चेकअप के लिए अंदर ले लिया। अयान बाहर कॉरिडोर में से चक्कर काट रहा था। कुछ देर बाद डॉक्टर बाहर आए और बताया कि घबराने की कोई बात नहीं है, बस हल्का इलाज और आराम की ज़रूरत है।अयान वहीं वार्ड के बाहर खड़ा होकर शीशे से माहिरा और दिया को देख रहा था। उसके चेहरे पर अब सुकून था। तभी करीम चाचा उसके पास आए और गौर से अयान के हाथ-पैर और फटी हुई शर्ट को देखा। अयान की बांह से अब भी खून रिस रहा था और जगह-जगह खरोंचें ...Read More

26

अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 26

जैसे ही दिया की गाड़ी मोड़ काटते हुए आँखों से ओझल हुई, सड़क पर एक भारी सन्नाटा पसर गया।अयान गर्दन घुमाकर पीछे खड़ी उस दूसरी काली गाड़ी को देखा।वहाँ खड़ा वो लंबा-चौड़ा जवान, पत्थर की मूरत बना अदब से दरवाज़ा पकड़े खड़ा था। उसकी खामोशी में एक अजीब सा खौफ था, जैसे वो अयान के एक इशारे पर किसी की भी गर्दन नाप सकता हो।अयान ने माहिरा का हाथ थाम लिया। माहिरा की हथेलियाँ बर्फ की तरह ठंडी पड़ चुकी थीं, जैसे उसके जिस्म का सारा खून खौफ के मारे जम गया हो।उसके पैरों में इतनी जान भी नहीं ...Read More