रक्त की प्यास

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हवेली की पुकार राहुल ने कार का इंजन बंद किया। कुछ सेकंड तक सिर्फ सन्नाटा था। फिर… दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज गूँजी, जो अचानक ही थम गई, जैसे किसी ने उनका गला दबा दिया हो। उसने धीरे-धीरे हवेली की ओर देखा। पुरानी हवेली—टूटी-फूटी, जर्जर, और समय की मार से झुकी हुई। चाँदनी रात में भी उसका रंग काला ही लग रहा था। खिड़कियों पर जंग लगे लोहे के शटर हल्की हवा में चरमराते हुए हिल रहे थे। हवा में एक अजीब सी गंध थी। सड़ी हुई मिट्टी… और कुछ और। कुछ… खून जैसा। राहुल ने गहरी साँस ली।

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रक्त की प्यास (भाग-1)

भाग 1: हवेली की पुकारराहुल ने कार का इंजन बंद किया।कुछ सेकंड तक सिर्फ सन्नाटा था। फिर… दूर कहीं के भौंकने की आवाज गूँजी, जो अचानक ही थम गई, जैसे किसी ने उनका गला दबा दिया हो।उसने धीरे-धीरे हवेली की ओर देखा।पुरानी हवेली—टूटी-फूटी, जर्जर, और समय की मार से झुकी हुई। चाँदनी रात में भी उसका रंग काला ही लग रहा था। खिड़कियों पर जंग लगे लोहे के शटर हल्की हवा में चरमराते हुए हिल रहे थे।हवा में एक अजीब सी गंध थी।सड़ी हुई मिट्टी… और कुछ और।कुछ… खून जैसा।राहुल ने गहरी साँस ली।“ये बस एक पुरानी इमारत है,” ...Read More

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रक्त की प्यास (भाग-2)

भाग 2: कुएँ का रहस्यसुबह की रोशनी हवेली के अंदर घुस तो रही थी…लेकिन अंधेरा पूरी तरह हट नहीं था।जैसे हवेली के किसी कोने में अभी भी रात छिपी हो।राहुल की नींद टूट चुकी थी।विक्रम का चेहरा पीला पड़ गया था।“राहुल…” उसकी आवाज कांप रही थी,“ये जगह ठीक नहीं है… हमें यहाँ से निकलना चाहिए।”राहुल ने उसकी तरफ देखा।“तू ठीक है?”विक्रम ने अपना गला छुआ।“मुझे लगा… कोई मुझे छू रहा था… बहुत ठंडी उंगलियाँ…”राहुल ने गले के निशान देखे।“ये सिर्फ… एक सपना था।”लेकिन अंदर ही अंदर, उसे भी शक होने लगा था।---हवेली के भीतर खोजराहुल ने फैसला किया—वो इस ...Read More

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रक्त की प्यास (भाग-3)

भाग 3: खून की विरासत (Extended Version)अंधेरा…सिर्फ अंधेरा नहीं…जैसे कोई जिंदा चीज़ हो, जो धीरे-धीरे राहुल को अपने अंदर रही हो।हवेली की दीवारें ठंडी हो चुकी थीं।हवा में नमी थी… और एक अजीब सी सड़न की गंध।राहुल के चारों तरफ सन्नाटा फैला हुआ था।इतना गहरा सन्नाटा कि उसकी अपनी सांसों की आवाज भी उसे अजनबी लगने लगी।उसने हिलने की कोशिश की…लेकिन उसका शरीर जैसे जम गया था।तभी—एक ठंडी हवा का झोंका उसके चेहरे से टकराया।उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।और उसी पल—लाइट अपने आप जल उठी।राहुल की आँखें चौंधिया गईं।उसने धीरे-धीरे सामने देखा…और उसका दिल रुक सा गया।वो औरत…वहीं ...Read More

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रक्त की प्यास (भाग-4)

(️ नोट :इस कहानी में “काली माँ” नाम सिर्फ एक काल्पनिक पात्र के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिसका देवी, धर्म या आस्था से कोई संबंध नहीं है।मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना बिल्कुल भी नहीं है।)भाग 4: पूर्णिमा का नरसंहाररात…धीरे-धीरे और गहरी होती जा रही थी।आसमान में चाँद पूरा चमक रहा था—पूर्णिमा।लेकिन उसकी रोशनी अब सुकून नहीं दे रही थी…बल्कि हर चीज़ को और डरावना बना रही थी।हवेली के चारों तरफ फैली सफेद चाँदनी में…परछाइयाँ लंबी हो चुकी थीं।हवा…भारी हो चुकी थी।जैसे पूरे माहौल ने सांस लेना बंद कर दिया हो।हर चीज़…एक अनजाने डर से जकड़ी ...Read More

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रक्त की प्यास (भाग-5)

भाग 5: अनंत प्यासठीक है…अब कहानी अपने अंतिम और सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुकी थी।यहाँ से या तो खत्म होने वाला था…या फिर…कुछ ऐसा शुरू होने वाला था जो कभी खत्म नहीं होगा।---हवेली के अंदर अब सिर्फ सन्नाटा नहीं था…बल्कि एक जिंदा डर था।हवा भारी हो चुकी थी—हर सांस लेना मुश्किल लग रहा था।दीवारें…धीरे-धीरे सिकुड़ती हुई महसूस हो रही थीं।जैसे वो सब कुछ अपने अंदर कैद करना चाहती हों।फर्श—ठंडा…लेकिन अजीब तरह से धड़कता हुआ।जैसे उसके अंदर अनगिनत चीखें दबाई गई हों।पूरा माहौल…अब इंसानों के लिए नहीं बचा था।---राहुल धीरे-धीरे खड़ा हुआ।उसकी चाल पहले जैसी नहीं थी।उसकी आँखें—अब लाल ...Read More