शिवपुर। एक ऐसा शहर… जहाँ रातें गोलियों की आवाज़ से शुरू होती थीं और लाशों पर खत्म। यहाँ लोग नाम से नहीं, गिरोह से पहचाने जाते थे। कानून सिर्फ दीवारों पर टंगे पोस्टरों में जिंदा था। असल सत्ता उन लोगों के हाथ में थी जिनके पास बंदूक, पैसा और डर था। और उन सबमें सबसे बड़ा नाम था — राजू भाई। आजम बाज़ार उसका इलाका था। वहाँ बिना उसकी मर्जी के पत्ता तक नहीं हिलता था। शाम के करीब सात बजे। पूरा आजम बाज़ार रोशनी से जगमगा रहा था। दुकानदार ग्राहकों को बुला रहे थे…
दी किंग ऑफ अंडरवर्ल्ड - 1
शिवपुर।एक ऐसा शहर…जहाँ रातें गोलियों की आवाज़ से शुरू होती थीं और लाशों पर खत्म।यहाँ लोग नाम से नहीं, से पहचाने जाते थे।कानून सिर्फ दीवारों पर टंगे पोस्टरों में जिंदा था।असल सत्ता उन लोगों के हाथ में थी जिनके पास बंदूक, पैसा और डर था।और उन सबमें सबसे बड़ा नाम था — राजू भाई।आजम बाज़ार उसका इलाका था।वहाँ बिना उसकी मर्जी के पत्ता तक नहीं हिलता था।शाम के करीब सात बजे।पूरा आजम बाज़ार रोशनी से जगमगा रहा था।दुकानदार ग्राहकों को बुला रहे थे…ठेलों से उठती मसालों की खुशबू हवा में फैली हुई थी।तभी दूर से एक सफेद स्कॉर्पियो बाज़ार ...Read More
दी किंग ऑफ अंडरवर्ल्ड - 2
छत पर गोलियों की आवाज़ लगातार गूंज रही थी।“मारो साले को!!”राजू भाई के आदमी चारों तरफ फैल चुके थे।लेकिन नहीं।उसकी आँखें बिल्कुल शांत थीं।जैसे ये सब पहले से उसके दिमाग में चल रहा हो।धाँय!!एक और गोली चली।भागता हुआ आदमी छाती पकड़कर नीचे गिर गया।खून छत पर फैलने लगा।“पीछे से घेरो इसे!”एक गुंडा चिल्लाया।अर्नब तेजी से पलटा…पास पड़ी लोहे की कुर्सी उठाकर पूरी ताकत से उसकी तरफ फेंकी।कुर्सी सीधे उसके चेहरे पर लगी।आदमी रेलिंग से टकराकर नीचे जा गिरा।बाकी लोग एक पल को रुक गए।डर।पहली बार उनके चेहरों पर डर दिख रहा था।क्योंकि सामने कोई लड़का नहीं था…कोई और चीज़ ...Read More