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डॉ. आम्बेडकर वाङ्मयसमालोचना श्रृंखलासम्पूर्ण संस्करणछह महान कृतियों कीतार्किक, स...
अध्याय 11: पहली रात, लालची मानवीय स्वभावकाओ शिंग निश्चित रूप से झूठ बोल रहा था।&...
પ્રકરણ ૨૮: દાદા-દાદીની વાતો સમય ક્યારેય કોઈની પ્રતીક્ષા કરતો નથી, તે તો બસ પોતાન...
Divya SharmaDivya Sharma is the kind of girl who tops the class without announci...
सफल व्यवसायका १०१ रहस्यव्यावसायिक सफलता, रणनीति र आर्थिक स्वतन्त्रताको सम्पूर्ण...
←जुबैदा ने कहा, 'बीबियो, इस बेचारे मजदूर के सर से सामान तो उतारो। यह बोझ के...
నీ తోడు కావాలి…తోడు అనేది జీవితంలో చాలా ముఖ్యమైన పాత్ర పోషిస్తుంది.ఈ తోడు జీవితా...
(हवन कुंड के सामने बैठे पंडित जी अचानक मौन हो जाते हैं।मंत्र रुक चुके हैं।।उनकी...
तन्हा सफ़र: जज़्बातों की छांव में भीगा इश्क़ भाग 21: “वेदांता का अंधेरा सच” रच...
गाँव की उस गली और अधूरे वादे: एक प्रेम कहानी का अंतगाँव की शुद्ध हवा, लहलहाते खे...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
बारिश की पहली बूँद और एक अधूरा नाम रचयिता: बाबुल हक़ अंसारी उस रोज़ बारिश कुछ अलग थी… ना ज़ोर से बरसी, ना आहिस्ता गिरी — बस जैसे किसी की यादों को छूने आई हो।...
மதுரையின் அழகர் கோவில் சாலையை ஒட்டிய அந்தப் பழைய பண்ணை வீடு, நள்ளிரவு மழையில் ஒரு மாபெரும் பூதத்தைப் போலக் காட்சியளித்தது. வானம் தன் கோபத்தை இடி முழக்கங்களாக வெளிப்படுத்திக் கொண்டி...
આ રચના સંપૂર્ણપણે કાલ્પનિક છે જેનો જીવિત કે મૃત તથા કોઈપણ ઘટના, ધર્મ, પ્રદેશ સાથે સંબંધ નથી. જો કોઈ સામ્યતા જણાય તો એ સંયોગ માત્ર છે. **************** ડિસેમ્બરની હાડ થીજવી દેત...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
આજના સમયમાં જે પ્રમાણે ટેકનોલોજીનો વિકાસ થઇ રહ્યો છે, તેટલી જ ઝડપથી માહિતીનું પણ આદાન પ્રદાન થઇ રહ્યું છે. એક સમયે એવો હતો કે, માહિતી સંતાડવી અને તેણે જાહેર થતી રોકવી ખુબ જ સહેલું...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
সন্ধ্যা নামার ঠিক আগের এই সময়টা খুব প্রিয় মণিকার। যখন স্কুল কলেজে পড়ত, এই সময়ে এককাপ চা নিয়ে মায়ের সঙ্গে বসত গোল বারান্দায়। মা বসতে চাইত না, সন্ধে দিতে হবে, জলখাবার করতে হবে,...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
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