Patjhad ke phool by Mukteshwar Prasad Singh in Hindi Poems PDF

पतझड़ - के फूल

by Mukteshwar Prasad Singh Matrubharti Verified in Hindi Poems

सुकून ---------- अरसे बाद देखकर सुकून मिला मानो पतझड़ में कोई फूल खिला। रिश्तों में अब भी वही गर्माहट संजो रखा है जहाँ से राह बदलकर तूने ...Read More